दुनिया की पहली नारीवादी कवयित्री: सप्पो
दुनिया की पहली नारीवादी कवयित्री: सप्पो वो झुकती रही दुनिया झुकाती रही उसने सहे हैं दर्द पर मुस्कुराती रही यही दस्तूर है तो परवाह न कर नाजुक फूल नही अब तू पाषाण बन कठोर रियायतें हैं ये दुनिया की सदा पार कर हौंसले से तू आगे तो बढ़ अब सरस्वती के संग संग दुर्गा का…