महादेवी वर्मा – हिंदी के विशाल मंदिर की सरस्वती !!
महादेवी वर्मा – हिंदी के विशाल मंदिर की सरस्वती !! नष्ट कब अणु का हुआ प्रयास विफलता में है पूर्ति-विकास। (-रश्मि) सन 26 मार्च 1907 में फर्रुखाबाद में, पिता बाबू गोविन्दप्रसाद और माता हेमरानी देवी के घर में छायावाद के उस चौथे स्तंभ का जन्म हुआ जिसे महादेवी वर्मा के नाम से जाना जाता है।…
घरेलू हिंसा
घरेलू हिंसा मुझे हिंसा अपने आप में ही बहुत बुरी लगती है ।आमतौर पर लोगों को ऐसा लगता है कि हम हिंसक हो जाएंगे तो हमें हमारा हक मिल जाएगा , लोग हम से डर जाएंगे लेकिन यह गलतफहमी है ।हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है ।जब यहीं हिंसा घर में होने…
ये अंतर्नाद है
ये अंतर्नाद है मेरा जन्मस्थल पाटलिपुत्र (पटना) वैदिक काल से ही अपना एक ऐतिहासिक गौरव समेटे हुए है। मेरे दादा मेवालाल लक्ष्मण प्रसाद जौहरी स्वतंत्रता सेनानी थे और अपने समय में पटना के प्रसिद्ध जौहरी भी थे।मेरे पिता जी राजा राम मोहन राय स्कूल में टीचर थे,बाद में कृषि विभाग में हो जाने पर सरकारी…
हमारी सांस्कृतिक भूमि अयोध्या नगरी
हमारी सांस्कृतिक भूमि अयोध्या नगरी परमपुज्य अनंतश्री विभूषित योगी सम्राट श्री श्री १०००८. श्री देवरहा बाबा जी महाराज ने वर्षों पूर्व प्रयागराज के कुंभ के मेले मे संतो ,राजनितिज्ञों और आम जनता की जिज्ञासा एवं प्रार्थना को स्वीकार करते हुए ये सांत्वना दी थी कि,,,”अयोध्या में रामजन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण अवश्य होगा। जन जन…
निर्मला
निर्मला मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित प्रसिद्ध हिन्दी उपन्यास निर्मला का प्रकाशन१९२७ में हुआ था । यह उपन्यास मुझे बहुत ही ज़्यादा पसंद है। निर्मला उपन्यास बेमेल विवाह एंव दहेज प्रथा पर आधारित है।यह बेहद मार्मिक कहानी जो दिल को छू जाती है।यह एक प्रकार से मनोवैज्ञानिक उपन्यास है। मानस पटल पर एक छाप छोड़ देती…
दो अक्टूबर के कुछ अनछुए पहलू
दो अक्टूबर के कुछ अनछुए पहलू राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का नाम सिर्फ साबरमती आश्रम से ही नहीं जुड़ा है ।यह बात शायद काफी लोगों की जानकारी से अछूती हो सकती है। बात कुछ यूं निकली और जब मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में बुजुर्गों के बीच सिमट कर रह गई। बापू का लगाव और…
‘सावन के झूले पड़े, तुम चले आओ’
‘सावन के झूले पड़े, तुम चले आओ’ सावन के मौसम में बड़े पैमाने पर वर्षा होती है जिसे मानसून कहा जाता है. “मानसून में तीन अलग-अलग कारक शामिल होते हैं – हवा, जमीन और समुद्र। मानसून का वर्णन प्राचीन काल से ही होता आ रहा है। ऋग्वेद और सिलप्पाधीकरम, गाथासप्तशती , अर्थशास्त्र, मेघदूत, हर्षचरित्र जैसे…
हिन्दी दिवस और हिन्दी
हिन्दी दिवस और हिन्दी कहने को राजभाषा है हिन्दी, भारती के भाल की सच में बिन्दी । न मारो माँ को अपने हाथों से, साँसें टूटतीं पर अब तक जिन्दी । छंदों से करती अपना श्रृंगार, पहनकर अद्भुत-अनुपम अलंकार । संगम अगनित भाषा बोलियों का, नव रस से आप्लावित चमत्कार । पहचानो इसमें है अपार…