बिन पिता के

बिन पिता के स्वाभिमान, सुरक्षा, स्नेह, समर्पण वटवृक्ष सी छाया जिसने की अर्पण चरणों में जिसके सब कर्म धर्म समझाया जिसने जीवन का मर्म माँ के जीवन के, जो थे परिभाषा मिली उन्हीं से अदम्य जिजीविषा निष्ठा, कर्त्तव्य, पोषण, अनुशासन मूल मंत्र सा जिसने, फूंका अंतर्मन बिन तुम्हारे अधूरा हर संकल्प तुम बिन दूजा न…

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साइकिल

साइकिल “गौरी की माँ जरा पानी तो पिलाओ।” रामधर पसीने से तर-बतर थे,चेहरा गर्मी से लाल हो रहा था। “कुछ काम बना..?” रामधर ने एक सांस में पानी गले के नीचे उतार दिया और तौलिये से मुँह पोछने लगे। “जरा पंखा तेज कर दो..” मालती मशीन की तरह रामधर की हर बात का पालन करती…

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मैं बसंत हो जाती हूँ…

मैं बसंत हो जाती हूँ… ओ मेरे बसंत जब तुम आते हो दिल को लुभाने वाली पवन बहाते हो और मैं मस्तमौला हो सारी चिंताओं को विस्मृत कर निडरता से जिधर रुख कर जाना चाहती हूं उधर चली जाती हूँ क्योंकि मन बसंत हो जाता है बसंत होना तुम जानते हो न खुशी का,उमंग का,उत्साह…

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यमुना का वरदान

यमुना का वरदान भ्रातृ द्वितीया , भाई दूज, भैया दूज, भाई टीका, यम द्वितीया आदि विविध नाम प्रचलित थे। यह त्योहार कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।सनातन धर्म में इस त्योहार को भाई-बहन के लिए विशेष महत्वाकांक्षी माना जाता है।  यह पवित्र त्यौहार भाई-बहन के स्नेह को और भी…

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ज्ञान के गौरव

ज्ञान के गौरव अंधकार से जो प्रकाश का स्वप्न दिखाते हैं जीवन की शूलभरी राहों पर पुष्प खिलाते हैं संघर्षों में जो मंगल के गान रचाते हैं वंदनीय जग में गुरु की अनुपम सौगातें हैं अमर हुए तुलसी कबीर भी गुरु का ज्ञान मिला प्रतिभा की जय हुई जगत मे शुभ सन्मार्ग मिला एकलव्य आरुणि…

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बसंत बहार

बसंत बहार पीली सरसों पीले खेत बसन्ती छटा में रंगा धरती का परिवेश पवन सुगन्धित मन आह्लादित बसंत बहार सुनाये रे… पतंग रंगा, नीला आकाश “वो काटा” से गूंजा जाए अमराई बौरें झूम झूम डोलें मन मयूर बहका जाए रे… सरस्वती पूजन मन्त्रोच्चारण, कानों में शहद सा घुलता जाए हिय हुलसै,मन उडे बचपन की गलियों…

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समा जाये तेरे हर गुण मुझ में

समा जाये तेरे हर गुण मुझ में माँ जीवन का सार हो तुम मेरी ताल लय मीठी धुन हो मेरी तेरे जैसे बनना है, सदा रहूँ कदमों में तेरी। सदा नयन में बसती हो मेरी हृदय में विराजती मेरी जीवन से और कोई चाहत नहीं परछाई बनना है तेरी। हो धरा सी क्षमाशीला जानकी सदृश…

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अपनेपन का पुष्प खिलाये रखना

अपनेपन का पुष्प खिलाये रखना समय की विषम आंधियों में आस का दीप जलाए रखना अपने उपायों और खूबियों से भारत को बचाये रखना धरती देखो नभ देखो हे ईश्वर! इस कहर से बचाए रखना हे लाड़लों! हम साथ है ये विश्वास बचाये रखना चलो साथियों एकजुट हो इस दानव से जिंदगी की जंग चलाए…

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नमन

नमन गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुरेव परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।। कहते हैं हमारा अहम और खुद की शंकाए ही हमें अपने गुरुजनों और अपनों के पास या करीब जाने से रोकती हैं। स्वतः हम इसके जिम्मेदार होते हैं। हमारे मन के अंदर का कचरा हम में इस क़दर भरा रहता हैं कि वह दूसरी अच्छी…

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