माँ

माँ मुझे याद है आपको अक्सर तीज त्योहार पर पूछती थी कि क्या चाहिए आपको और आपका हमेशा एक ही जवाब होता था…. मुझे मेरे सभी बच्चों की खुशहाली चाहिए। सच में माँ कभी अपने लिए कुछ नहीं चाहती, वो ख़ुश होती है, बच्चों को उनके मन पसंद खाना खिलाकर, वो ख़ुश होती बच्चों के…

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इश्क करो ख़ुद से और ख़ुदा से ….

  इश्क करो ख़ुद से और ख़ुदा से ….   इश्क, प्रेम का वह रूप है जिसमें कोई किसी में लीन हो जाना चाहता है …. फिर चाहे वह अपनी अंतरात्मा हो या अपना ईश्वर ! इश्क यानी प्रेम भक्ति का भी एक प्यारा रूप है जो समर्पण माँगता है तभी तो उसका सफर रूमानियत…

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बापू की अमर कहानी

बापू की अमर कहानी आओ बच्चों तुम्हें दिखाये , स्वतंत्रता की अजब ग़ज़ब ये गाथायें हैं बापू की ये अमर कहानी हैं ! नोटो की हरियाली में आज भी छाये रहते हैं ! आओ बच्चों तुम्हें दिखाये , आज़ादी बलिदानो की ये सुंदर गाथा ! अपनी माता से बढ़ कर थी , मातृभूमि की रक्षा…

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गुरु महिमा

गुरु महिमा गुरु जन के उपकार बहुत है । गिनती हम नहीं कर पाते ।। पूरा जीवन कम लगता है । उनकी महिमा गाते गाते ।। कोरे कागज जैसे मन पर । गुरु ज्ञान की बात सजाते ।। सच्चा मानव कैसे बनते । पाठ हमें यह रोज पढ़ाते ।। शिखर सफलता के पाने की। राह…

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देवी नहीं, नारी हूँ मैंं

देवी नहीं, नारी हूँ मैंं मुझे चाहत नहीं मैं कोई देवी बनूँ, शक्ति का पर्याय कहलाऊँ करुणा की वेदी बनूँ चाह मुझे बस इतनी कि मैं इंसान रहूँ खुलकर साँस लूँ अविरल धारा सी बहूँ, खुले आसमान में पँख फैलाकर उड़ूँ, खुश रहूँ,सपने देखूँ उसे निर्बाध पूरा करूँ अपने प्रेम को हँसता देखूँ अपनी ममता…

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प्रेम की पूरकता

प्रेम की पूरकता तुम कोई गीत लिखो तुम कोई गीत लिखो, और मै गाऊं, गीत माटी के, गीत फसलों के, गीत सुबह-शाम ,गोधूली-विहान के. तुम कोई सूरज गढ़ों, और मै .. किरणों का परचम सजाऊं, मन की मञ्जूषा में यादों के साये हैं, भूले बिसरे नगमे बादल बन छाये हैं, जीवन के आँगन में तुम,…

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काहे बिहाए बिदेश

काहे बिहाए बिदेश गाँव का चबूतरा जो हमेशा गुलजार रहता था, आज सुनसान है। वहाँ हमेशा एक भीड़ हुआ करती थी, खोमचे वाले, बस पकड़ने वाले, फेरी वाले। सुस्ताने की एक वही जगह थी। पीपल का बड़ा पेड़ और चारों तरफ बड़ा चबूतरा। एक हैंड पम्प भी लगा हुआ है। दरअसल कल ही सरकारी दफ्तर…

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छाप ‘मंत्र’ की

छाप ‘मंत्र’ की सर्वाधिक लोकप्रिय साहित्यकार प्रेमचंद की बहुत सी कहानियों ने मुझे पुनः-पुनः पढ़ने के लिए विवश किया| उनकी कहानियों के कथानक और चरित्र हमारे आस-पास की घटनाओं और चरित्रों से इस कदर मिलते-जुलते है कि हमारे भावों और संवेदनाओं को छूते हैं| साथ ही उनका लेखन आज भी प्रासंगिक हैं| प्रेमचंद की कहानियों…

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कुछ ऐसा लिखूँ

कुछ ऐसा लिखूँ मेरा नाम डॉ.सरला सिंह है । मेरा जन्म पूर्वी उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में कादीपुर तहसील के बलुआ नामक गाँव में क्षत्रिय कुल में हुआ । प्रारम्भिक शिक्षा कानपुर तथा गाँव दोनों जगह हुई । पिताजी व बाबा जी दोनों ही कानपुर में सी.ओ.डी. में नौकरी करते थे । वहीं बाबूपुरवा…

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परवाज़

परवाज़ वह पन्द्रह दिन पहले न्यूयॉर्क में बिजनेस मीटिंग मे भाग लेने आया। मीटिंग बहुत अच्छी रही और कम्पनी को नया प्रोजेक्ट मिल गया। वह बहुत खुश था उसे अपनी कामयाबी पर बहुत फक्र हो रहा था आज उसकी मेहनत सफल हुई। खुशी का एक कारण यह भी वह अपने वतन लौट रहा था ।…

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