मंत्र

मंत्र “मंत्र” कहानी डॉ चड्ढा की है जो अपने नियम पर चलते हैं और अपने समय पर मरीज देखते हैं। इसके अलावा वह अपने आनंद के लिए गोल्फ आदि में समय व्यतीत करते हैं।एक दिन एक आदमी आता है जो अपनी बीमार लड़के को देखने की अपील करता है।डॉक्टर चड्ढा के गोल्फ खेलने का समय…

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लम्हे

लम्हे वक्त की तेज़ रफ़्तार में जिंदगी भले ही भागती रहे, पर कुछ लम्हे यूँ ही एक जगह पर आकर थम जाते हैं, मानों अंगद का पाँव हो, जिसे आप जरा सा भी हिला नहीं पाते अपनी जगह से। कभी सोचा ही नहीं था कि सत्ताइस साल के एक लंबे, व्यस्ततम, भागदौड़ भरे सफर के…

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हिन्दी-दिवस

हिन्दी-दिवस तुम प्राण देश की हो “हिन्दी “पर हो तुम किस तरह उजड़ी? किसने उजाड़ा है तुमको? किसने संहारा है तुमको? विलुप्त सी हो चली हो तुम भारत धरा से विस्मृत हो कर तुमही तो भारत मनु की सतरूपा थीं जिसने किया था समर्पण एक दिन भारत मनु को अपना सर्वस्य देकर पर परतंत्रता के…

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शहादत के खुले -अधखुले पन्ने

शहादत के खुले -अधखुले पन्ने विद्रोह ,गदर, क्रांति-इन शब्दों के अर्थ कभी भी बहुत स्पष्ट नहीं रहे। जुल्म के खिलाफ समय-समय पर फूटे जन असंतोष को यदि शासकों , शासितों ने अलग- अलग नाम दिए तो इसका कारण स्पष्ट है-दोनों की मंशा अलग होती है, उद्देश्य अलग। जिस विद्रोह को विप्लव, गदर, राजद्रोह कहकर जुल्मी…

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सौम चन्द्रिका

सौम चन्द्रिका गरल गरल हुआ वदन सुधाविहीन सिंधु मन। जल रहा नयन नयन धुआं धुआं धरा गगन।। स्वार्थ छद्म से यहाँ चिनी गई इमारतें मूक प्राणियों के कत्ल से सजी इबादतें नाम पर विकास के हरा भरा भी कट रहा वक्ष भूमि का लहूलुहान जैसे फट रहा कर्णभेदती बिगाड़ती रही ध्वनि: पवन मूल से उखड़…

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एक गुफ़्तगु

एक गुफ़्तगु जिंदगी के पल के साथ सोचूँ बैठु आज तुम्हें लेकर रूबरू गुलाबी इस ठण्ड की चटक धुप में थोड़ी देर…! हो हाथ में गर्म अदरक की कड़क चाय और उलझाऊँ तुम्हें कुछ सवालो के चक्रव्यूह में…! बाँटू कुछ तजुर्बे अपने और पूछूँ कुछ तुम्हारे तरीके जिंदगी के फ़लसफ़े पर करना चाहूँ एक गुफ्तगूं…!…

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तुम लौट आओ

तुम लौट आओ हे बुद्ध तुम लौट आओ क्योंकि तुमने कहा था “ईर्ष्या या घृणा को प्रेम से ही खत्म किया जा सकता है” पर असंवेदनशील आत्माओं के साथ जी रही मानव जाति भूल चुकी है किसी से भी निःस्वार्थ प्रेम करना लौटकर अब तुम प्रेम क्या है इन्हें फिर से याद दिलाओ हे बुद्ध…

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नवरात्रि दक्षिण में – एक सामाजिक झांकी

नवरात्रि दक्षिण में – एक सामाजिक झांकी नाम ही स्पष्ट कर देता है कि यह नौ दिनों का उत्सव जो शरद और वसंत दोनों कालों में आता है संध्याकालीन पूजा का द्योतक है जैसे कृष्ण जन्माष्टमी अर्धरात्री की पूजा है। केरल में विशु नामक पर्व वर्षारंभ का शुभ समय सूर्योदय से पूर्व होता है। होलिका…

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लोहड़ी

लोहड़ी आज से पचास या साठ वर्ष पहले उत्तर पूर्व के राज्यों में लोहड़ी के त्यौहार को कोई कोई जानता था। परन्तु अब पंजाब की ओर से अनेक रिवाज़ अन्य प्रांतों की जीवन शैली में घुल मिल गए हैं। इसका मुख्य कारण सिख समुदाय का परिवहन के क्षेत्र में योगदान है। भारत ही नहीं विश्व…

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