विश्व स्वास्थ्य दिवस और हम

विश्व स्वास्थ्य दिवस और हम आज विश्व स्वास्थ्य दिवस है।इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस के प्रभाव से जूझ रही है, ऐसे में इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। आज ही के दिन साल 1948 में विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना हुई थी।विश्व स्वास्थ्य संगठन, जिसे डब्ल्यूएचओ (WHO)के नाम से जाना जाता…

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वीरता और विद्वत्ता का अद्भुत समन्वय

वीरता और विद्वत्ता का अद्भुत समन्वय मेरे जीवन की क्षुधा, नहीं मिटेगी जब तक मत आना हे मृत्यु, कभी तुम मुझ तक… भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन भारतीय इतिहास का स्वर्णिम युग है। भारत की धरती पर जितनी भक्ति और मातृभावना उस युग में थी, उतनी कभी नहीं रही। 1857 की क्रांति के बाद हिंदुस्तान की धरती…

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मुर्दा खामोशी

” मुर्दा खामोशी “ तेरे जग में भीड़ बहुत है आगे बढ़ने की होड़ बहुत है मंज़िल की मुर्दा खामोशी रस्तों का पर शोर बहुत है ख़्वाबों के साये को थामे जीने की घुड़दौड़ बहुत है बुत से दिखते चलते फिरते मरे हुओं की फ़ौज बहुत है पीठों में खंजर…भोंकते प्यार जताते यार बहुत है…

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दीया

दीया अंतस में दीया जलता है । बाहर में दीया जलता है । मन के दीप से ही अब तो । घर घर में दीया जलता है ।। देश में दीपोत्सव मनता है । अंतस बाहर गम हटता है । आओ घर घर दीप जलाएँ । कलुषता का तम हटता है ।। दीपक शुद्धता है…

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सावन बदला अपना स्वरूप ?

सावन बदला अपना स्वरूप ? काले काले बदर धुमड घुमड कर आए वर्षा रानी भी जमकर बरसी बिजली कौन्धी और जोरों की कड़की भी, सावन न्यौता जो लेकर आई मस्ती की,झूमने की भींगने और भिगाने की रूठने की, मनाने की सपनाने की ,अलसाने की। नहीं, सावन नहीं बदला अपना स्वरूप, हां, बदला झूमने का रूप…

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सूर्योपासना का महापर्व: लोकपर्व छठ

सूर्योपासना का महापर्व: लोकपर्व छठ आस्था की भावभूमि भारत, जहाँ संस्कृतियों की महानदी आकर एकाकार हो जाती है, जहाँ जीवन त्योहारों, लोकपर्वों, परंपराओं की रंगोली से सदैव सुशोभित होता रहता है, ऐसे’ विविधता में एकता ‘ वाले देश की अपनी विशिष्टता है- विविध प्रांतों की अपनी-अपनी क्षेत्रीय संस्कृति, उस संस्कृति के अनुरूप मनाए जाने वाले…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- अरूणा आसफ़ अली

भारत रत्न अरूणा आसफ़ अली आज़ादी के पचहत्तरवें वर्ष में जब हम देश भर में ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मना रहे हैं । तब अपनी मातृभूमि को सौभाग्यशालिनी कहने से मन को असीम प्रशंसा होती है। भारत भूमि सदा विशेष रही है ।अपनी धन संपदा, वनसंपदा, खनिज भंडारों और प्राकृतिक सौंदर्य और विविधता के क्षेत्र…

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माता और पिता

माता और पिता मैं अपने पिता की सबसे बड़ी आलोचक रहीं हूँ, मेरी अति सौम्य मृदुभाषिनी माता की तुलना में, वे काफी रूखे, सख्त, अहंकारी और अनुशासित इंसान दिखते रहें हैं। अगर प्रतीकों की भाषा में कहा जाए तो, माँ एक कोमल कविता सी हैं, तो पिता एक राष्ट्र गान जैसे, माँ के नर्म –…

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जोखू जिन्दा है

जोखू जिन्दा है अभिजात्य वर्ग का एक युवक ट्रेन में यात्रा कर रहा था। मुंशी प्रेमचंद की कहानियों की किताब में रमा वह “ठाकुर का कुंआ” कहानी पर अटक गया। कहानी पढ़ते-पढ़ते वह असहज होने लगा। गंगी और जोखू उसके भीतर उतरते चले गए। गले मे खुश्की भरने लगी। उसने बैग में पानी की बोतल…

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