नारी अबला नहीं है
नारी अबला नहीं है 1908 ई. में अमेरिका की कामकाजी महिलाएं अपने शोषण के विरुद्ध और अपने अधिकारों की मांग को लेकर सडकों पर उतर आईं। उनका मुख्य मुद्दा महिला और पुरुष के तनख्वाह की समानता का था । 1909 ई. में अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने उनकी मांगों के साथ राष्ट्रीय महिला दिवस की…
प्रतिबंध
प्रतिबंध बेटियां खिलखिलाती रहनी चाहिए बेटियों के खिलखिलाने से बसते हैं घर बेटियां मुस्कुराती रहनी चाहिए बेटियों के मुस्कुराने से बसते हैं घर.. पर बेटियों को खुलकर मुस्कुराने या फिर खिलखिलाने की इजाज़त ही कब थी? लड़कियां यू़ँ बिना बात के खीं खीं करती अच्छी नहीं लगती यहीं तो कहते रहे मां बापू चुनिया और…
शहादत के खुले -अधखुले पन्ने
शहादत के खुले -अधखुले पन्ने विद्रोह ,गदर, क्रांति-इन शब्दों के अर्थ कभी भी बहुत स्पष्ट नहीं रहे। जुल्म के खिलाफ समय-समय पर फूटे जन असंतोष को यदि शासकों , शासितों ने अलग- अलग नाम दिए तो इसका कारण स्पष्ट है-दोनों की मंशा अलग होती है, उद्देश्य अलग। जिस विद्रोह को विप्लव, गदर, राजद्रोह कहकर जुल्मी…
Would You Be My Valentine
Would You Be My Valentine When I saw you standing over there… with moonlight shining through your hair… My heart stood still… I could hardly breathe … I wanted to kiss you… showing you how deeply I care! You’re the personification of Grace and Elegance… all wrapped up with a divine glow on your face!…
हिन्दी-दिवस
हिन्दी-दिवस तुम प्राण देश की हो “हिन्दी “पर हो तुम किस तरह उजड़ी? किसने उजाड़ा है तुमको? किसने संहारा है तुमको? विलुप्त सी हो चली हो तुम भारत धरा से विस्मृत हो कर तुमही तो भारत मनु की सतरूपा थीं जिसने किया था समर्पण एक दिन भारत मनु को अपना सर्वस्य देकर पर परतंत्रता के…
ऑनलाइन खाना
ऑनलाइन खाना पिताजी के इस दुनिया से जाने के बाद माँ का आना-जाना लगा ही रहता था। प्रिया उनकी इकलौती संतान थी,पिताजी के जाने के बाद माँ एकदम अकेली पड़ गई थी।घर का कोना-कोना पिता जी के साथ बिताए मधुर पल की याद दिलाता रहता,जब माँ घर के अकेलेपन से डरने लगती तो…
Alicja Maria Kuberska’s poems
Alicja Maria Kuberska’s poems 1.The Beginning of Spring The Earth like a mother is so kind and caring. In spring, she brings flowers to life She kisses bulbs, seeds and rootstocks and invites them to peek out from under the turves. She lets trees dress up in buds and juices circulate on branches. She summons…
भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- धीरूभाई अंबानी
धीरूभाई अंबानी अगर आपको परीकथाओं पर विश्वास नहीं है तो आप इस कहानी को जरूर पढ़िए. यह किसी परीकथा से कम नहीं है. एक आदमी जो हाईस्कूल की शिक्षा भी पूरी नहीं कर पाया. वह इतने गरीब परिवार से था कि खर्चा चलाने के लिए उसे अपनी किशोरावस्था से ही नाश्ते की रेहड़ी लगाने से…