धरा की व्यथा

धरा की व्यथा मैं धरा हूँ , यूं तो नाम हैं मेरे कई । भूमि, वसुधा, पृथ्वी, धरणी, हूँ लाड़ली उस रचयिता की । आठ भाइयों में बहन अकेली । बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस, वरुण और प्लूटो, पूरे आठ हैं मेरे भाई । मैं धरा हूँ , यूं तो नाम हैं मेरे कई…

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मजदूर

मजदूर जिसके सर पर छत है खुले आकाश का,होता रहता वज्रपात, फिर भी वह आत्मविश्वास से लबरेज है , वह है मजदूर। कंधों पर सपनों का बोझ ढो रहा, चला जा रहा मंजिल है दूर, अपने पसीने से भूमि सींचता,है श्रम से थक कर है वह चूर। अपने हथौड़े से करता एक-एक प्रहार,रखता जाता एक-…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- सर्वपल्ली राधाकृष्णन

सर्वपल्ली राधाकृष्णन 5 सितम्बर को जन्मे भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति डा.राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति के संवाहक,प्रख्यातशिक्षाविद् लेख़क,महान् दार्शनिक और एक आस्थावान हिन्दू विचारक थै।उनके इन्हीं गुणों के कारण 1954 में भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया था और उन्ही के सम्मान में उनके जन्म दिन 5 सितम्बर को…

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कुछ कही कुछ अनकही 

कुछ कही कुछ अनकही    एक थी केतकी ,पहाड़ों की खुशनुमा वादियों में अपने रूप रंग की खुशबू बिखेरती,हिरनी सी कुलांचें भरती, इस बुग्याल से उस बुग्याल तक दौड़ती चली जाती थी बस अपने आप में खोई हुई,अपने आप में मगन।दीन दुनिया से कोई वास्ता न था बस अपनी ही धुन में किसी भी टीले…

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एक और स्वप्न

एक और स्वप्न बाहर तेज गर्जना के साथ बारिश हो रही थी, रात गहराने लगी थी। मैं भी रसोई और अन्य सारे कार्यों से निपट कर बस बिस्तर पर पड़ ही जाना चाह रही थी कि अचानक फोन की घंटी बज उठी। उधर नयना दीदी थी, भर्राई हुई आवाज में उन्होंने कहा-“प्रोफ़ेसर साहब नहीं रहें।”मैं…

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फागुन की बयार

फागुन की बयार छाया है बसंत चहुंओर बही है फागुन की बयार धरती ने ओढ़ी पीली चुनरिया हुलसे है जियरा हमार पूरी धरती है लाल-लाल चारों ओर उड़ा गुलाल नीले,पीले, लाल हो रहे सभी के गाल और द्वार चढा नशा भाँग का कर रहे हम आज हुड़दंग आज तो खूब सखि रे मनवा में छाया…

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डॉ रांगेय राघव

डॉ रांगेय राघव बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न डॉ रांगेय राघव का जन्म,आगरा में ,१७ जनवरी,१९२३ को हुआ।शिक्षा-दीक्षा भी वहीं हुई।पिता संस्कृत,तमिल,फ़ारसी और अंग्रेज़ी के विद्वान थे।मॉं कनकवल्ली बडी सरल, उदार व दयालु महिला थीं।वे हिंदी जानती थीं,तमिल,ब्रजभाषा बहुत सुंदर बोलती थीं। इनके पूर्वजों को धर्म व भारतीय संस्कृति में गहरी आस्था थी।वे बाइबिल और क़ुरान भी…

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दुनिया की पहली नारीवादी कवयित्री: सप्पो

दुनिया की पहली नारीवादी कवयित्री: सप्पो वो झुकती रही दुनिया झुकाती रही उसने सहे हैं दर्द पर मुस्कुराती रही यही दस्तूर है तो परवाह न कर नाजुक फूल नही अब तू पाषाण बन कठोर रियायतें हैं ये दुनिया की सदा पार कर हौंसले से तू आगे तो बढ़ अब सरस्वती के संग संग दुर्गा का…

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छत से छाये पिता

छत से छाये पिता माँ के आशीष-फूल में तुम मनका से जड़ते रहे पिता मौसम की बौछारों में भी तुम छत से छाये रहे पिता रोके थे अपने दम-खम से दिन के सब झंझावातों को गिरने से बचा लिया हरदम तुमने सपनों के पातों को विपरीत दिशा से धूलों की रोकते रहते आँधियों को जगते…

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