मेरे इश्क का रंग है केसरिया

मेरे इश्क का रंग है केसरिया देश मेरे …. रंगरेज मेरे मेरे इश्क का रंग है केसरिया तेरी आन की खातिर मैं न मरा तो खाक यह जीवन मैंने जीया देश मेरे…… कायर ने छुप कर वार किया अस्मिता पर प्रहार किया किंचित न गम है मिटने का हाँ दुख है न योद्धा दिखने का…

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भारत और आत्मनिर्भरता

भारत और आत्मनिर्भरता जब विश्व कोरोना वैश्विक आपदा से लड़ रहा था भारत कोरोना को हराने के साथ साथ खुद को आत्मनिर्भर बनाने के सपने संजोए आगे बढ़ रहा था। इस महामारी से पूरी मनुष्य जाति प्रताड़ित थी और इस पर किसी तरह काबू पाने के लिए जूझ रही थी। कारखाने ,दफ्तर सभी निर्माण कार्य…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-सरोजिनी नायडू

विरासत: श्रीमती सरोजिनी नायडू भारतवर्ष के अमृतमहोत्सव पर यह कहना कदाचित अतिशयोक्ति नहीं होगा कि हर वर्तमान की नींव इतिहास में ही रखी जाती है, विशेषकर कला, संस्कृति, विज्ञान की। कृषि के क्षेत्र से लेकर औद्योगिकीकरण, तकनीकीकरण से डिजिटाइजेशन, मानवाधिकार के क्षेत्र में स्त्री पुरुष को सामाजिक, मानसिक एवं व्यवसायिक क्षेत्र में समान अधिकार का…

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काया की माया

काया की माया रामबाण से घायल होकर पड़ा भूमि पर जब दशकंधर, लक्ष्मण से बोले तब रघुवीर , शिक्षा लो रावण से जाकर रावण के समीप जा लक्ष्मण, रहा प्रतीक्षा करता कुछ क्षण , फिर रघुवर से जाकर बोला, वह तो कुछ भी नहीं बोलता, कहा राम ने खड़े थे कहाँ बोला सिर के पास…

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आजादी का अमृत महोत्सव :राष्ट्र प्रथम ,सर्वदा प्रथम

आजादी का अमृत महोत्सव :राष्ट्र प्रथम ,सर्वदा प्रथम   इस वर्ष,15 अगस्त 2023 को भारत ” राष्ट्र प्रथम, सर्वदा प्रथम ” की थीम के साथ 77वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहा है । इसके साथ ही यह खड़ा है-आजादी के अमृत महोत्सव की उत्सवभूमि पर।आज़ादी के अमृत महोत्सव की आधिकारिक यात्रा की शुरुआत 12 मार्च ,…

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जीवन के अस्मरणीय पल

जीवन के अस्मरणीय पल समकालीन हिंदी लेखन जगत के एक अग्रणी हस्ताक्षर ममता कालिया जी को कौन नहीं जानता। उनसे मेरा सम्बंध मेरी पहली कहानी ‘वे चार पराँठे‘ से जुड़ा है।यह कहानी जुलाई 2007 में ममता कलिया जी तथा रविंद्र कलिया जी की बिर्मिंघम के एक कहानी कार्यशाला से ऊपजी थी। कार्यशाला पूरे वीकेंड की…

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हिम्मत की ईंट

हिम्मत की ईंट इस वर्ष बारिश भी कितनी हो रही है । बूँदों के सारे खजाने लुटाने का इरादा लगता है मेघों का ,परन्तु बदले तेवर का क्या अर्थ। सौम्य के अलावा प्रचण्ड रूप का भी दिग्दर्शन हो रहा है -अविरल शक्तिप्रदर्शन , मानो जनजीवन के भयादोहन करने का विषम आनंद लूटना चाह रहे हों…

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