पेड़ वाले बाबा

पेड़ वाले बाबा “मिस्टर विपिन चौरे” – रिटायर्ड आई एफएस अधिकारी।अपना नाम सुनकर विपिन अपनी जगह से उठा और सघे हुए कदमों से स्टेज की ओर बढ़ गया। प्रोटोकॉल के अन्तर्गत की गई रिहर्सल के अनुसार माननीय राष्ट्रपति को सबसे पहले उसने सादर नमस्कार करके हाथ मिलाया।राष्ट्र‌पति ने पुरस्कार प्रमाण पत्र और पद्मश्री पुरुस्कार उसे…

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आजादी

आजादी ———– मुस्कुराती हुई हवाऐं, घाटी कश्मीर से आ रही। मुक्त हुई हूँ ,आज, हो स्वच्छंद बह रही। नयी भोर में उदित, सूर्य ये कह रहा, खुलकर लो प्रकाश, ना कोई रोकने वाला। कई बेड़ियाँ टूट गई, जन्नते कश्मीर की। ना आतंक ना भय होगा। पावन पवित्र जन्नत होगा। शिक्षा,धन,दौलत से, ये शहर पूरित होगा।…

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डेटिंग द ऐरा ऑफ़ लार्ड राम

डेटिंग द ऐरा ऑफ़ लार्ड राम (Dating the Era Of Lord Ram) मुझे याद है अक्टूबर 1991 का वो दिन जब मुझे पता चला कि मै गुर्दे के कैंसर से पीड़ित हूँ।एक सप्ताह के अंदर ही मेरा दांया गुर्दा ऑपरेशन के जरिए निकाल दिया गया।अपेक्षाओं के विपरीत विषाद की यह केवल शुरुआत भर थी। पांच…

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मजदूर

मजदूर परेशानी हो या आँधी हो दिन रात श्रम करते हैं। बोझा सर पे लेकर चलते हम मजदूर नहीं थकते हैं।। फिर भी दो जून की रोटी को कभी कभी तरसते हैं। मैं मजदूर हूं हां बहुत मजबूर हूं बस यही कहते हैं।। ग़रीबी कहो या लाचारी , किस्मत की है मारी । तपते तन…

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कुछ ऐसा लिखूँ

कुछ ऐसा लिखूँ मेरा नाम डॉ.सरला सिंह है । मेरा जन्म पूर्वी उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में कादीपुर तहसील के बलुआ नामक गाँव में क्षत्रिय कुल में हुआ । प्रारम्भिक शिक्षा कानपुर तथा गाँव दोनों जगह हुई । पिताजी व बाबा जी दोनों ही कानपुर में सी.ओ.डी. में नौकरी करते थे । वहीं बाबूपुरवा…

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मिटेगा कोरोना

मिटेगा कोरोना कैसी हाहाकार मची है कैसा कहर ये ढाया है। पूरी दुनियाँ त्रस्त हुई कोरोना ने दहलाया है। अपने अपने घर में रहना बाहर नहीं निकलना है। जंग शुरू महामारी से है देश से बाहर करना है। दुश्मन ये कमज़ोर नहीं है मानवता का घातक है। जात पांत से दूर ये वायरस इंसानों का…

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आदर्श सास

आदर्श सास रविवार का दिन था। बच्चे पिक्चर चलने की ज़िद कर रहे थे पर आज मेरी कहीं जाने की इक्छा नहीं हो रही थी। दस दिनों से गाड़ी का पेपर खोज खोज कर घर मे सब परेशान हो गए थे। गाड़ी बेचनी थी औऱ पेपर मिल नही रहा था। दिमाग उसी में उलझा हुआ…

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बुझा नहीं हूँ!

बुझा नहीं हूँ! जीवन के इस मुकाम पर जब नौकरी-पेशा की उम्र का ३९ वर्षों का अनुभव और बच्चे-परिवार के प्रति कर्तव्य का इतिश्री हो चुका है,बयान करना कठिन है। फिर भी,दृष्टि बीते दिनों पर जाती है,तो कई घटनाएं और व्यक्तियों का चेहरा प्रत्यक्ष होता है मानस पटल पर।१९७० में बिहार बोर्ड की अंतिम परीक्षा…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- सावित्रीबाई फुले

सावित्रीबाई फुले महाराष्ट्र के सतारा जिले के नयागांव में एक दलित परिवार में 3 जनवरी 1831 को जन्‍मी सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका थी। इनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे और माता का नाम लक्ष्मी था। सावित्रीबाई फुले शिक्षक होने के साथ भारत के नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता, समाज सुधारक और…

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