My life

MY LIFE VULNERABLE CONSCIOUSNESS As the moments are gone and the time is playing blindflies with the empty moments of the eternity the consciousness is speechless looking for a truth, an answer to the endless questions… (Collection of poems , Dreams of Oasis (Amphictyon of Hellenism, Department of Literature, Thessaloniki, 2014 . The collection was…

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माँ तो बस माँ ही होती है

माँ तो बस माँ ही होती है आज भी याद है माँ की वह तस्वीर बचपन में ,स्कूल जाते समय टीफिन लेकर पीछे दौड़ती माँ स्कूल से आते ही खाना खिलाने के लिए घंटों मशक्कत करती माँ लुकछिपी के खेल में जानबूझ कर शिकस्त खाती माँ मेरी चिंता में हर पल अपने आपको जलाती माँ…

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लॉकडाउन

लॉकडाउन कोरोना वैश्विक महामारी ने हम सब के जीवन को रोक सा दिया है । सब कुछ बंद है, आवागमन ,व्यापार , पर्यटन , उद्योग धन्धे , होटल रेस्टोरेंट , सिनेमा उद्योग , नौकरियां आदि । सब कुछ वर्क फ्रॉम होम हो गया है चाहे वह शिक्षा यो या सरकारी , प्राइवेट काम काज ।…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन   प्यार मोहब्बत आशिकी ये बस अल्फाज थे। मगर… जब तुम मिले तब इन अल्फाजोंं को मायने मिले बदलना आता नहीं हमें मौसम की तरह, हर इक रुत में तेरा इंतज़ार करते हैं, ना तुम समझ सकोगे जिसे क़यामत तक, कसम तुम्हारी तुम्हें इतना प्यार करते हैं।   0

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वर्तमान साहित्य में स्त्री उत्थान क्यों और कैसे ?

  वर्तमान साहित्य में स्त्री उत्थान क्यों और कैसे ? साहित्य के संदर्भ में चाहे अतीत हो या वर्तमान अथवा भविष्य। उत्पीड़ा की एक त्रासदी होती है। अतीत हमेशा भुक्तभोगी पीड़ाओं से गुज़रता है, तो वर्तमान आशादायी भविष्य की ओर संकेत करता है। पीड़ा और त्रासदी में कोई परिवर्तन नहीं होता, केवल समय गतिशील होता…

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योगेश

योगेश उसकी अक्सर याद आती रहती है। बल्कि शायद हमेशा ही वह मेरे जेहन में रहता है। मेरा चपरासी था। यूँ कहिये कि मेरा अभी-अभी चपरासी हुआ था। हुआ यूँ कि मैंने अपने स्थायी चपरासी को कई बार अचानक मेरे ऑफिस के सोफे पर लेटे देख लिया था और एक बार तो मेरे ही सोफे…

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मुझे नहीं मिले गुलाब

“मुझे नहीं मिले गुलाब” आँखों की पुतलियों का रंग कत्थई था होंठों की फ़लियाँ मूंगिया रंगीं थीं गालों पर चम्पई असर लिये मैं प्रेमिका बनी शब्दों की चाल ढाल भाषा मेरे लिए हमेशा शालीन रही सिंगार और श्रंगार हमेशा सौम्य रहा प्रथम पुरूष की तरफ आकर्षण प्रकृति की तरह हुआ और प्रेम में मैं पृथ्वी…

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बेटी और बैल

बेटी और बैल बिहार के बेगुसराय में एक गरीब किसान ने अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए अपने खेत और दो बैल बेच दिया- यह कल के राष्ट्रीय समाचार में था। उसे बाद उसके घर नेताओं की लाइन लग गयी, यह दिखने के लिए कि वो कितने सम्बद्ध हैं- उसकी गरीबी से और कितने प्रभावित…

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शहादत

शहादत क्या कहें कैसे कहें ,कहने को कुछ रहा नहीं । माँ की लंबी तपस्या , बक्से में बंद रहा नहीं । बक्से में तन टुकड़ों में , आत्मा ब्रह्म लीन है । साधना सिद्धि तपस्या , देश धरोहर रहा नहीं । बस तिरंगा देखतीं हूं , लाल मेरा दहाड़ा नहीं । आस थी विश्वास…

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बोनस

बोनस आज षष्ठी का दिन है। कीर्ति सुबह उठते ही खुशी से उछलने लगी है। कारण आज बाबा को बोनस मिलने वाला है। बाबा बोनस लेकर आएँगे और फिर दुर्गा पूजा के कपड़े आएँगे। उसके बाबा दार्जिलिंग के एक चाय बागान में नैकरी करते हैं। वह फुदकती हुई अपनी माँ कुमारी के पास पहुँची और…

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