आदमी आदमखोर हो गया।

आदमी आदमखोर हो गया। आदमी आदमी न रहा, आदमखोर हो गया। लग गई उसे खून की लत ये जहां में शोर हो गया। सब भूला ताई दादी, सब भूला बहना अम्मा। मर गई इंसानियत, हो गया आज निकम्मा। गली मुहल्ला चलना मुश्किल हुआ, शहर देहात का एक ही हाल हुआ। बोल उठा जिया ये क्या…

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नया सूरज

नया सूरज चारों तरफ है फैला अनजानी आशंकाओं का घना कोहरा रुक गया जीवन बंदिशों के घेरे में आओ गढ़ें एक नया सूरज जिसकी रश्मियों के तेज में हो जाए भस्म सभी डर न रहे कोई बेटी अजन्मी रात के अंधेरे में कुचलने से बच जाए सुनहरी धूप न मसल पाए कोई उभरती कली को…

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कलियों को सुरभित होने दो

कलियों को सुरभित होने दो बीत गए पचहत्तर वर्ष देश को आजाद हुए, आ गया आजादी का अमृत महोत्सव काल। पर क्या सच में आजाद हुई आधी आबादी, क्या उसका भी चल रहा है स्वर्णिम काल? किया विचार किसी ने इस पर भी कभी? क्या सच में उन्नत हो रहीं नारी सभी अभी? आए दिन…

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मेरी भूलों को कर दो माफ

मेरी भूलों को कर दो माफ तुम्हारे प्रेम में आकंठ डूबी थी मैं , कभी किसी बात पर रुठी न थी मैं, तुमने मेरे पंख काट कर सहेज दिये थे , बिना पंखों के भी खुश थी मैं तुमने कहा था कि पहले तुम गगन छू लोगे , अपने सपने पूरे कर लोगे , मैंने…

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हिन्दी

हिन्दी हिन्द के हिन्दोस्तां की बेटी है.हिन्दी। भारत के ललाट की शोभा बिन्दी है हिन्दी। देवभाषा संस्कृत की पुत्री बनकर उपजी हिन्दी। सभी भाषाओं की अग्रजा बनकर आई है हिन्दी। सभी बोलियाँ संग साथ ले हिल मिल संग चले । अपने और परायों बीच संवाद बनी हिन्दी। भाषा जोड़ रही है सबको एक छत्र के…

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“मातृभाषा हिंदी”

“मातृभाषा हिंदी” “वर्तमान समय में प्रायः सब हिंग्लिश बोलते हिंदी के एक वाक्य में तीन चार शब्द अंग्रेजी के होते हैं आपसी मिलाप तो संस्कृति हमारी हिंदी ने भी अंग्रेजी से मेलजोल स्वीकारी मुश्किल फिर भी आई भारी अंग्रेजी स्कूल और नेटफ्लिक्स ने और हालत बिगाड़ी बच्चे अब दादा दादी से नहीं बतियाते क्योंकि अब…

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हमारी हिन्दी

हमारी हिन्दी हिन्दी भारत की हर श्वास है, इक नवीन विश्व की आस है। तन में बहता अरुण रक्त है, हर भारतवासी इसका भक्त है। हिंदी प्रेम-विजय की बोली, मानवता पनपी इसकी झोली। यही ग्रीष्म-शीत ऋतु बसंती, माँ देवी के माथे की बिंदी। वर्ण से शब्द, शब्द से वाक्य, हर भाव में भाषा महान है।…

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हिंदी का परचम

हिंदी का परचम वैज्ञानिक आधार परखती निज बल सब सत्कार कमाया जोड़ चली सीमाएँ कुनबा हिंदी ने परचम फहराया सहज सरल उत्तम उच्चारण स्वर व्यंजन रस युक्त मनोहर अर्पित उन्नत पद सम्मानित छवि साहित्यिक मुक्त धरोहर शब्द मधुर संयोजित मुक्ता मायावी हिंदी की काया जोड़ चली ….. कोस कोस पर पानी बदले दशम कोस पर…

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हिन्दी दिवस और हिन्दी

हिन्दी दिवस और हिन्दी कहने को राजभाषा है हिन्दी, भारती के भाल की सच में बिन्दी । न मारो माँ को अपने हाथों से, साँसें टूटतीं पर अब तक जिन्दी । छंदों से करती अपना श्रृंगार, पहनकर अद्भुत-अनुपम अलंकार । संगम अगनित भाषा बोलियों का, नव रस से आप्लावित चमत्कार । पहचानो इसमें है अपार…

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मां-भारती का युवाओं से “आह्वान”

मां-भारती का युवाओं से “आह्वान” ये अमृत काल है ये अमृत काल है ये अमृत काल है कसम तुझे उन दिवानो की जो फंदा चूमकर झुले थे । कसम तुझे उन वीरों की जो होली ख़ून से खेले थे । कसम तुझे उन शहीदों की जो शहादत के लिये ही जन्मे थे । तू मुझको…

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