दुख के बादल

दुःख के बादल कोरोना काल चल रहा था।रीमा भी लॉकडाउन का बहुत अच्छी तरह से पालन कर रही थी। लॉकडाउन को चलते दो महीने हो चुके थे।रीमा ने बिल्कुल भी हार नहीं मानी थी।शुरु-शुरु में विचलित जरूर हुई थी,जब टेलीविजन मर मरने वालों को संख्या देखती थी। लॉकडाउन में रीमा ने वो सब काम किए…

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हिन्दी पर अन्य भाषा का प्रभाव

हिन्दी पर अन्य भाषा का प्रभाव अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की संख्या बढ़ती जा रही है, जहां दिन भर में सिर्फ एक हिंदी की कक्षा होती है स्वाभाविक है कि बच्चे अंग्रेजी ही ज्यादा सुनते हैं और बोलते हैं . . इन बच्चों की जुबान पर हिगलिंश हावी हो गई है। एक भी वाक्य बिल्ला…

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Invocation

Invocation To You, Our Lady of life The distinct You bridge the hearts of our world You deceive the sun not to set to offer a heavenly embrace Generously you endure the pain Wisely You dominate bright horizons Your tears become earth’s breath Your hands are solid rocks You scatter clouds in your passage Oh,…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-विश्वनाथ प्रताप सिंह

विश्वनाथ प्रताप सिंह विश्वनाथ प्रताप सिंह जी का जन्म इलाहाबाद के जमींदार परिवार में 25 जून 1931 को हुआ था। आपके असली पिता का नाम राजा भगवती प्रसाद सिंह था। मांडा के राजा बहादुर राय गोपाल सिंह निःसंतान होने के कारण उन्होंने 1936 में 5 वर्ष की आयु में आपको गोद ले लिया था। 1941…

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कड़ियाँ

कड़ियाँ सात वर्षों के बाद इस जगह से मेरी विदाई हो रही थी। हिन्‍दी टीचर के रूप में यह मेरी पहली पोस्टिंग थी। जिन बच्‍चों को मैंने नौ-दस साल में देखा था, अब वो बड़ी हो गई थीं। आभा और करूणा ने विदाई पर कुछ कहा नहीं, एक लिफाफा पकड़ा दिया, पहले की यादें ताजा…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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हिन्दी मेरी हिन्दी………हिन्दी से हिंदी तक।।।।।।

हिन्दी मेरी हिन्दी………हिन्दी से हिंदी तक।।।।।। देश स्वतंत्र नहीं था तो लोगों के हृदय में राष्ट्र जागरण की भावनाएं हिलोर मारती थी लोग हिन्दी के प्रति समर्पित थे केवल वे परिवार ही जो या तो अंग्रेजों के पिट्ठू थे या अंग्रेजों के द्वारा कराई गई कमाई से मोटे हुए जा रहे थे अंग्रेज़ी पढ़ते थे…

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मेरे प्रिय तुम गुलाब हो!

मेरे प्रिय तुम गुलाब हो! नेहरू के कोट से चलकर, प्रियतमा के जूड़े में अठखेले, रंग बिरंगे चाहे जितने हो, पर, सुर्ख लाल में हो अलबेले, मादकता की तुम हो परिभाषा, तुम सुहाग सेज की अभिलाषा, मेरे प्रिय तुम गुलाब हो! हो न ! सुधा गोयल ‘नवीन’ 0

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माँ का मातृत्व

माँ का मातृत्व नौ महीने गर्भ से हो जाता सफर शुरू माँ का फिर जन्म देते ही उसकी सारी दुनिया घूमती सिर्फ अपने बच्चे के ही इर्द गिर्द हर आँसू, हर दर्द, हर दुःख हर तकलीफ बन जाती उसकी छोटी अपने बच्चे की मुस्कान के आगे माँ का मातृत्व ही कुछ ऐसा है जिसका न…

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अब दिखे न कोई राहों पर

अब दिखे न कोई राहों पर है दिन दुपहरी यूँ सन्नाटा करती हैं सड़कें साँय साँय प्रकोप भारी कोरोना का अब दिखे न कोई राहों पर। मिल न सके अपनों से अपने विडंबना ऐसी विधना की पंख झरे मुरझाये सपने पलकें उनींदी कल्पना की लगी दरों पर लक्ष्मण रेखा, हर गली गली चौराहों पर। ये…

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