कुछ नया सा
कुछ नया सा अंजलि को जब भी घबराहट महसूस होती है, वह अपने नाखून चबाने लगती है। कितनी बार उसने यह आदत छोड़ने की कोशिश की, लेकिन जाने अनजाने यह हो जाता है। अविनाश ने कितनी बार टोका होगा – लेकिन आदत तो छूटती नहीं। अब यही देखो ना, अविनाश को भूलने की कोशिश भी…
फूल का इंतजार
फूल का इंतजार आज फूल के कदम जमीन पर नहीं पड़ रहे थे | मिट्टी और ईट के उसके कच्चे पक्के घर में खुशियाँ इस तरह उतर आईं थीं | मानो सितारों की जगमगाहट उतर कर जमीन पर आ गई हो | हमेशा चिढ़ी सी रहने वाली दादी ने भी आज उसके गाल को चूमकर…
Christmas Eve
Christmas Eve Long ago, in a far off land On a cool dark night A sudden music of choir grand A surprising wondrous sight! The angels delivered a message – A message to humankind A message in heavenly language From the heavenly Father kind: ‘Let there be Peace on earth Let humanity sing and rejoice…
ग्रामीण संवेदनाओं का कुशल चितेरा मुंशी प्रेमचंद !!
ग्रामीण संवेदनाओं का कुशल चितेरा मुंशी प्रेमचंद !! साहित्य का उद्देश्य केवल लोगों को संदेश देना नहीं होता है। बल्कि श्रेष्ठ साहित्य तो अपने युग का जीता-जागता दस्तावेज होता है। उसमें उस कालखंड की समस्याओं, विशेषताओं, राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक परिस्थितियों का विशद वर्णन होता है जिसे पढ़ कर पाठकों की अन्तःचेतना में एक नई…
हमारी मातृ भाषा हिंदी
हमारी मातृ भाषा हिंदी हिन्दी हमारी मातृभाषा सरल ,सुन्दर और प्रभावशाली। समृद्ध भी है, साहित्य अपार है। फिर भी उपेक्षित, निम्न, और कंगाल है।अपने बच्चों द्वारा ही तिरस्कार है। अभिवादन, प्रशंसा, धन्यवाद सभी पर, विदेशी का अधिकार है। धीरे-धीरे घरों मैं बढ़ रहा इसका व्यवहार है। लिखित कथन अंग्रेजी वर्णमाला पर निसार है। यही प्रगति…
मासिक धर्म को हीन दृष्टि से देखने वाले समाज में रोशनी के किरण बनते ये युवा
मासिक धर्म को हीन दृष्टि से देखने वाले समाज में रोशनी के किरण बनते ये युवा मासिक धर्म एक सामान्य प्रक्रिया है और प्रकृति की महिलाओं को देन है , महिलाओं को प्रकृति ने नव सृजन का जो वरदान दिया है वह मासिक धर्म के बग़ैर संभव नहीं है । परंतु उसी मासिक धर्म के…