“कुछ कही, कुछ अनकही”

“कुछ कही, कुछ अनकही” जीवन में अनेक पहलू ऐसे आते हैं जो अंतस में खलबली तो मचाते हैं पर उसको बाहर लाना सरल नहीं होता और यही बात कई बार अंदर घुटन उत्पन्न करती है तो अनेकों बार हम उसी में खुशी ढूंढ लेते हैं। ज़िन्दगी के यही चढ़ते-उतरते पड़ाव हमारे जीवन की कहानी बन…

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हम्पी – जहाँ हर पाषाण कुछ कहता है

हम्पी – जहाँ हर पाषाण कुछ कहता है आप सब ने इस वर्ष के गणतंत्र दिवस पर विभिन्न राज्यों की झाकियां टी वी पर अवश्य ही देखी होंगी | कर्नाटक राज्य की झांकी, विजयनगर – हम्पी पर बड़ी ही सुंदरता से बनाई गयी थी | उसे देख कर मेरे लिए, व्यक्तिगत रूप से, तो जैसे…

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क्या है गाँधीवाद ?

क्या है गाँधीवाद ? महात्मा गांधी के विचारों की समग्रता गांधीवाद के रूप में चर्चित है।उनके आदर्श, चिंतन, विश्वास और दर्शन से निकली विचारधारा स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बहुत सफल रही और उन्हीं के आधार पर देश को स्वतंत्रता भी मिली। बिना हिंसा किये 600 वर्षीय अंग्रेजों की हुकूमत को उखाड़ फेंकना और उनके प्रशासन…

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माँ तू अनमोल है

माँ तू अनमोल है न जाने कितनी ही बार लड़खडाते कदमो को संभाली होगी माँ न जाने कितनी ही बार गिरने से बचाई होगी माँ न जाने कितनी ही बार गोद में लेकर थपकी दी होगी माँ न जाने कितनी ही बार कितने जतन की होगी मेरी हंसी खुशी के लिए माँ न जाने कितनी…

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सुबह, दोपहर और शाम

सुबह, दोपहर और शाम दिसम्बर का अंतिम सप्ताह भारत के उत्तरी भाग में सिहरन, ठिठुरन, धूप की गर्मी, कम्बल और रजाई के मखमली अहसास और आग की तपन का होता है। और इसी महीने में आता है क्रिसमस का रंगीन त्यौहार। बाकी भारतीय पर्वों की तरह इसके दिन और महीने नहीं बदलते – यह हमेशा…

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मन और गुलाब

मन और गुलाब मन गुलाब सा कोमल सुरभित, आज कर रहा स्नेह निवेदित संग साथ का सुख चाहें हम मेरी कविता तुम्हें समर्पित मन वाणी और भाव हृदय के आज सभी तुमको को है अर्पित यह गुलाब सी रंजित कविता बने दोस्ती की मिसाल जब हम तुम बंधे एक बंधन में गुथे हुए फूलों से…

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प्रतिबंध

प्रतिबंध बेटियां खिलखिलाती रहनी चाहिए बेटियों के खिलखिलाने से बसते हैं घर बेटियां मुस्कुराती रहनी चाहिए बेटियों के मुस्कुराने से बसते हैं घर.. पर बेटियों को खुलकर मुस्कुराने या फिर खिलखिलाने की इजाज़त ही कब थी? लड़कियां यू़ँ बिना बात के खीं खीं करती अच्छी नहीं लगती यहीं तो कहते रहे मां बापू चुनिया और…

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तेरे मेरे सपने

तेरे मेरे सपने ज़मीन के उस छोटे से टुकड़े पर पूरा एक जहाँ फैला है…. बृज और गौरा की दुनिया जिसमें सपने रूप बदल तितली से उड़ा करते हैं। पानी के इंजन की धक-धक और काले धुएँ में, बहते पानी में, धरती में दबते बीज में, अंकुरण में और नवांकुर के ऊपर आने में अनगिनत…

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ज्ञान की बात

ज्ञान की बात टेलीविजन पर शंकराचार्य और मंडन मिश्र के शास्त्रार्थ का प्रसंग चल रहा था। जीत और हार के लिए जो मानक निर्धारित किए गए थे मुझे उस समय वह बड़े हास्यास्पद लग रहे थे। दोनों के गले में फूलों की एक-एक माला थी और जिस की माला मुरझा जाएगी उसी को हारा हुआ…

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संघर्ष ही मेरे जीवन की प्रेरणा है

  संघर्ष ही मेरे जीवन की प्रेरणा है।   क्या कहूँ, मैं कौन हूँ! कैसे करूँ, मैं स्वयं को परिभाषित! वर्षों की चिंगारियों की धुंध में, सुलगती आग, संवेदना की ज्वार हूँ। जटिल संघर्षों से उपजी, मौन अकुलाहट….! संभ्रांत, मर्यादित….. शब्दों की व्रिहद अभिव्यक्ति, “सरस व्यवहार हूँ मैं।” अपनी लिखी कविता की इन्हीं पंक्तियों के…

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