गणिका

गणिका ‘चरित्रहीन हो, बेगैरत हो, हो निर्लज्ज और कुल्टा’ ऐसे कितने तीर चला कर कहते हो मुझको गणिका ! शफ्फाक वस्त्र में सजे हुये, पर अंदर से उतने मटमैले, रुतबे वाले ,रँगे सियार, इस समाज में हैं फैले ! भूल के अपनी मर्यादा औ’ भूल के पत्नी का वह प्यार , काम पिपासा के कामातुर,…

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खिडक़ी से धूप

खिडक़ी से धूप जीवन हार्टबीट की तरह है, जब तक उतार चढ़ाव न हो सार्थकता नही रहती। भावनाओं को आकार देना स्कूली जीवन से ही हो गया था। लिखने से ज्यादा पढ़ने के शौक ने जुगसलाई सेवा सदन पुस्तकालय से बाधें रखा । मेरी कविता यूं ही गुमनामी के अंधेरों मे गुम हो गई होती…

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COVID AND HEALTH

COVID AND HEALTH As the world continues to deal with the COVID-19 pandemic at least a third of the global population continues to find itself under a so-called ‘lockdown’, while others are having to follow some form of social distancing. While many countries are considering plans to lift restrictions in the coming months, this will…

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति

राष्ट्रीय शिक्षा नीति आज भारत बहुत ही मजबूत ज़मीन पर खड़ा है क्यों कि अगले दशक में भारत विश्व के गिने चुने राष्ट्रों में शामिल हो जायेगा जिसकी जनसंख्या में युवाओं का प्रतिशत अधिक होगा। ऐसे राष्ट्र के विकास के लिए एक सुदृढ़ शिक्षा नीति का होना आवश्यक है।अभी से ही अगले दशक की योजना…

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होली में

होली में जाहिर हम जज़्बात करेंगे होली में तुमसे खुल कर बात करेंगे होली में ।। तुम उसको आंखों आंखों में पढ लेना हम जो इजहारात करेंगे होली में ।। खोल के दिल के दरवाजों को तुम रखना पेश तुम्हे सौगात करेंगे होली में ।। खुशबू से भर देंगे तेरे दामन को फूलों की बरसात…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- जेआरडी टाटा

जेआरडी टाटा  जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा का जन्म 29 जुलाई उन्नीस सौ चार को पेरिस, फ्रांस में हुआ । वे रतनजी दादाभाई टाटा और उनकी फ्रांसीसी पत्नी सुजैन ब्रीएयर की दूसरे संतान थे। उनके माता-पिता की कुल 5 संतानें थीं। जिसमें जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा दूसरे नंबर पर थे। उन्होने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कैथेडरल और…

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संस्कार

संस्कार वैष्णव जन तो तेने कहिये जे, पीर पराई जाने रे.. नरसी मेहता का भजन नेपथ्य में कहीं चल रहा था । ” पर दु:खे उपकार करे तोये, मन अभिमान न आणे रे..” सरला बेन भी साथ में गुनगुनाने लगीं । मिहिका सामने बैठी अपनी वृद्धा विधवा माँ के चेहरे की रुहानियत और मासूमियत को…

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जय माँ सरस्वती

जय माँ सरस्वती क्या लिखूँ , कैसे लिख दूँ वो भाव कहाँ से लाऊँ रच दूँ माँ तुझ पे कविता वो शब्दार्थ कहाँ से लाऊँ … भटक रही जग की तृष्णा में मोह माया का भंवर सा फैला अंतर्मन को निश्छल कर लूँ वो परमार्थ.. कहाँ से लाऊँ … निज स्वार्थ भरा औ द्वेष भरा…

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