महामारी के दिनों में प्यार !

महामारी के दिनों में प्यार ! कुछ दिनों पहले एक खबर पढ़ी थी कि बिहार के सिवान के एक प्रेमी को मुंगेर में रहने वाली अपनी प्रेमिका याद आई तो वह लॉकडाउन को धत्ता बताते हुए पैदल ही निकल पड़ा मुंगेर की ओर। करीब तीन सौ किमी की पदयात्रा कर वह अपने गंतव्य तक तो…

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एक शब्द

एक शब्द माँ का प्यारा सा हथियार जब भी करते मस्ती हम माँ कि आवाज़ आती रूको अभी पापा को बुलाती हर समय इस छोटे से शब्द से हम को वो डराती “पापा” छोटा सा दो अक्षर का शब्द पर शक्तिशाली,संयम से भरा हुआ है ये शब्द डराते हैं ,कठोर है पर रक्षा से भरा…

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चलो, धरती को रहने योग्य बनाएँ

चलो, धरती को रहने योग्य बनाएँ प्रकृति और मनुष्य – दोनों जैसे न जाने कैसा लुका छिपी का खेल खेल रहे हैं। प्रकृति मनुष्य को बार-बार आगाह करती है और मनुष्य जैसे सब कुछ समझकर भी अनसुनी कर रहा है। पर्यावरण दिवस यानि कि 5 जून को हर वर्ष हम अपनी प्रतिज्ञा दोहराते हैं कि…

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सावन की हरीतिमा

सावन की हरीतिमा सावन की हरीतिमा धानी ये धरती, कजरारी मेघा बारिश की छम छम हरी बिंदिया हरी साड़ी, मह- मह महकती हरी मेहंदी की धमधम!! झूलों की उठान गोरी की तान, बलखाती नदियां मेघों का घम घम!! बौराया मन भरमाया तन, बूंदों की सरगम हवाओं का सन -सन! ये मौसम ये सावन धुला धुला…

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जागें फिर हम भारत वासी!

जागें फिर हम भारत वासी! जागें फिर हम भारतवासी, हे,महाकाल, पर्वतवासी। धर रुद्ररुप घट-घटवासी, जागें फिर हम भारतवासी। भारत पर संकट छाया है, फिर रक्तबीज बन आया है। अब रक्षक बन काशी वासी, जागें फिर हम भारत वासी। वोट बैंक के बीच भंवर में, जाति-धर्म हैं सब के प्यादे । अब भारत माँ इनकी दासी!…

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आखिर माँ है क्या ?

आखिर माँ है क्या ? भगवान!!! तुमने क्या खूब कमाल दिखया खुद सब जगह नहीं हो सकते इसलिये “”माँ ” बनाया। आखिर माँ है क्या??? क्या वो? जिसने जीव का दुनिया से परिचय कराया, इक मांस के लोथड़े को “जिंदगी” का जामा पहनाया या फिर वो जिसने हर कदम पर अपनी औलाद का हौसला बढाया,…

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अतीत के साये

अतीत के साये कहानियों के कितने पात्र सदियों से हमारे आसपास इर्दगिर्द घूमते रहते हैं और न जाने कितनी कहानियां, लघुकथाएं, कितने उपन्यास लिखे पढ़ें गए, सराहे गए। कुछ धूल धूसरित हुए पड़े रहे हैं, शेल्फों में। ऐसी ही असंख्य पुस्तकें उस लाइब्रेरी में मौजूद थीं, जिन्हें बरसों से झाड़ा तक नहीं गया था, खोलकर…

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महिला दिवस : पिंजड़े से उड़ान

महिला दिवस : पिंजड़े से उड़ान महिला और पुरुष – यही दो शाश्वत जातियाँ हैं। और एक अनवरत संघर्ष चलता रहता है दोनों के बीच, आर या पार की लड़ाई भी। शायद, जब मानव जीवन कदराओं में जी रहा था, तभी बंटवारा हो गया था – बाहर के काम, जंगली जानवरों के शिकार, आग जलाना…

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