सुंदर हाथ

सुंदर हाथ “मांँ दे ना अपनी हंसुली, उसे तोड़ कर तुम्हारी बहू के हाथ की चुड़ियां बनवा दूंगा…” सुनील ने गुटखा थूकते हुए कहा। “ऐसा कैसे चलेगा, कब तक तू मुझसे पैसे मांग – मांग कर अपने शौक पूरे करता रहेगा..” मालती देवी ने खीझते हुए कहा। “क्या करूं मांँ, नौकरी तो मिलने से रही,…

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गीता जयंती

गीता जयंती गीता जयंती के शुभ अवसर पर आयोजित भगवत् गीता के श्लोकों का चिंतन-मनन यह एक सार्थक पहल है, यह उपक्रम सतत चलता रहे तो सभी को बौद्धिक और आध्यात्मिक लाभ होगा । आज मैं “अवतारवाद” पर अपनी अल्प बुद्धि से कुछ विचार व्यक्त कर करना चाहती हूं । अवतार का अर्थ स्वयं परमात्मा…

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ठाकुर का कुआंँ–प्रेमचंद

ठाकुर का कुआंँ–प्रेमचंद मुझे प्रेमचंद की लिखी यह कहानी ‘ठाकुर का कुआँ’ अत्यंत पसंद है।इस कहानी में अछूत संदर्भ को ही संस्पर्श करती है तथा ऊँच-नीच के भेदभाव को बड़ी ही बारीकी के साथ प्रस्तुत किया गया है। हम सब जानते हैं कि प्रेमचंद आधुनिक युग के एक महत्वपूर्ण लेखक हैं जिन्होंने दलित समस्याओं पर…

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बदबूदार कमरे

बदबूदार कमरे —————— स्वतंत्रता का उत्सव क्या खाक मनायें हम, अनगिनत घावों से रिस रहा जब इस धरा का तन मन। नन्हीं कलियों के कुचले जाने के खबरों का है बाजार गरम, और फिर भी कहते रहतें हैं बहुत महान है अपना वतन। इधर सड़कें सजीं, मैदान सजें और तिरंगो से सजता रहा गगन, उधर…

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गुरुपूर्णिमा पर विशेष

गुरुपूर्णिमा पर विशेष अपने राष्ट्र और सामाजिक जीवन में गुरुपूर्णिमा-आषाढ़ पूर्णिमा अत्यंत महत्वपूर्ण उत्सव है। व्यास महर्षि आदिगुरु हैं। उन्होंने मानव जीवन को गुणों पर निर्धारित करते हुए उन महान आदर्शों को व्यवस्थित रूप में समाज के सामने रखा। हनुमान चालीसा हम सब को कंठस्थ है, प्रथम दोहे में ही कहा गया है “श्री गुरुचरण…

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तुम स्वयं उपमान हो

माँ! मेरे यह गीत सारे,आज तुझको हैं निवेदित मन के मेरे भाव निर्मल,तेरे चरणों में हैं प्रेषित शीत की ऊष्मा हो माते और हवा सा प्यार हो स्नेह का सागर समेटे, तुम दैवीय उपहार हो जो मेरा जीवन है गुंजाता,तुम वो अनहद गान हो क्या तुम्हें उपमा मै दूँ माँ,तुम स्वयं उपमान हो जीवनशाला का…

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महामारी में भी ओछी राजनीति

महामारी में भी ओछी राजनीति एक बड़े शायर का शेर है लू भी चलती थी तो बादे-शबा कहते थे, पांव फैलाये अंधेरो को दिया कहते थे। उनका अंजाम तुझे याद नही है शायद, और भी लोग थे जो खुद को खुदा कहते थे।। महाभारत काल में अखंड भारत के मुख्यत: 16 महाजनपदों कुरु, पंचाल, शूरसेन,…

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टिंगू

‘‘टिंगू’’ ‘‘मृदु….. देखो भई कौन है’’ इन्होंने मुझे नीचे के बरामदे से आवाज लगाई. सुबह का अखबार पढ़ते समय तनिक व्यवधान हो तो इनकी आवाज ऐसी ही रूखी हो जाती है. मैं सीढ़ियाँ फाँदती नीचे आई तो देखा कि एक बारह तेरह साल का लड़का साफ धुली हुई हाफ पैंट व टी-शर्ट पहने अपनी माँ…

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एक दूसरे के साथ जीना

एक दूसरे के साथ जीना प्रेम करने से पूर्व मैं तुम्हें जानती नहीं थी , मैं तुम्हें नहीं जान पाई प्रेम करने के बाद भी , पर इस जानने और न जानने के बीच , रास्ते में आई रिश्तों की पगडंडी ने, थक चुके मेरे मन को ये सिखा दिया है कि , प्रेम का…

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