नारी का अस्तित्व
नारी का अस्तित्व हां मैं भी चाहती हूँ अपनी पहचान बनाना! चाहती हूँ अपना अस्तित्व स्थापित करना! ढूंढती हूँ हर गली,हर मोड़ पर! अपने अतीत में, मैं कौन हूँ? मैं कौन हूँ? मैं कौन हूँ…..?? कभी बेटी,,,कभी बहन,… कभी बहु और कभी पत्नी,.. ना जाने कितने नामों से मैं पहचानी जाती हूँ! पर ढूंढती हूँ…
दुनिया की पहली नारीवादी कवयित्री: सप्पो
दुनिया की पहली नारीवादी कवयित्री: सप्पो वो झुकती रही दुनिया झुकाती रही उसने सहे हैं दर्द पर मुस्कुराती रही यही दस्तूर है तो परवाह न कर नाजुक फूल नही अब तू पाषाण बन कठोर रियायतें हैं ये दुनिया की सदा पार कर हौंसले से तू आगे तो बढ़ अब सरस्वती के संग संग दुर्गा का…
लता मंगेशकर: मानवता को उपहार
लता मंगेशकर: मानवता को उपहार लता मंगेशकर जैसी विभूतियाँ इस धरा पर कभी-कदा ही अवतरित होती हैं। वे मानवता को मिला दैवी उपहार हैं। स्वर साम्राज्ञी ने आम और खास सबके दिल पर राज किया। उन्हें कई पुरस्कार मिले पर वे किसी पुरस्कार की मोहताज नहीं रहीं। चार पीढ़ियों को अपने सुर से उपकृत करने…
PRESIDENTIAL ELECTION OF U.S.A : DEFINING MOMENT
PRESIDENTIAL ELECTION OF U.S.A : DEFINING MOMENT Battle for becoming 47th President of USA has entered it’s final round.A lot of water has flown down the rivers of this vast country ever since Kamala Harris,a black qualified woman of South Asian origin entered the fray in July. Donald Trump has a solid backing of…
करोगे याद तो हर बात याद आएगी
करोगे याद तो हर बात याद आएगी मैं, ऋचा वर्मा, माता स्वर्गीय प्रमिला वर्मा, पिता श्री सुरेन्द्र वर्मा की सबसे बड़ी संतान, एक लंबे, लगभग 10 वर्षों की प्रतीक्षा और बहुत मन्नतों के प्रतिफल के रूप में उनकी जिंदगी में आयी। संस्कृत भाषा में एम. ए. पास माता जिन्हें मैं मम्मी कहती ने मेरा नाम…
रमजीता पीपर
रमजीता पीपर रमजीता पीपर से गाँव की पहचान है या गाँव से इस पीपल के पेड़ की इसके बारे में दद्दा से ही पता लग सकता है। दद्दा की उम्र बहुत अधिक नही है, यही 70 के लगभग, पर लोग उन्हें दद्दा कहने लगे हैं, शायद उनके ददानुमा कहानियों और बातों के कारण हो, या…
काया की माया
काया की माया रामबाण से घायल होकर पड़ा भूमि पर जब दशकंधर, लक्ष्मण से बोले तब रघुवीर , शिक्षा लो रावण से जाकर रावण के समीप जा लक्ष्मण, रहा प्रतीक्षा करता कुछ क्षण , फिर रघुवर से जाकर बोला, वह तो कुछ भी नहीं बोलता, कहा राम ने खड़े थे कहाँ बोला सिर के पास…
राम और राजनीति
राम और राजनीति संस्कृत के रम् धातु से बने कण-कण में बसने वाले राम,शब्द और नीति दोनों ही दृष्टियों से राजनीति की हवा में रचे बसे नजर आते हैं।राम की राजनीति को दो प्रकार से देखा जा सकता है। ‘राम की राज-नीति’ और ‘राम की राजनीति’। राम के नाम पर की जाने वाली राजनीति आज…