यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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” माँ बेटी – रिश्ता एक अनन्य शक्ति का  “

” माँ बेटी – रिश्ता एक अनन्य शक्ति का  “ ब्रिटेन के खूबसूरत पहाड़ी गांव में आज  प्राकृतिक रोष तो एक  जोरदार तूफान और बारिश के रूप में कहर ढा ही रहा था लेकिन राडु के घर में भी भूचाल और जलजले से कम वातावरण नहीं था। नन्ही बालिका जिया की जन्म से परिवार में…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन   प्यार मोहब्बत आशिकी ये बस अल्फाज थे। मगर… जब तुम मिले तब इन अल्फाजोंं को मायने मिले बदलना आता नहीं हमें मौसम की तरह, हर इक रुत में तेरा इंतज़ार करते हैं, ना तुम समझ सकोगे जिसे क़यामत तक, कसम तुम्हारी तुम्हें इतना प्यार करते हैं।   0

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अंतर्नाद

अंतर्नाद आप सबों की शुभकामनाओं से आज मुझे आंतरिक हर्षोल्लास है कि मेरा प्रथम काव्यसंग्रह”अंतर्नाद” जो मेरी १५१ कविताओं का संग्रह है,निकट भविष्य में प्रस्तुत होने वाला है। यह काव्य संग्रह मेरे पिता स्वर्गीय ‘श्री हरीश चंद्र सर्राफ’को समर्पित है।भले ही वो भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, पर दिल में आज भी जीवित…

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कैसा गणतंत्र कैसी आज़ादी

कैसा गणतंत्र कैसी आज़ादी सोने की चिड़िया कहलाये जाने वाला मेरे सपनों का भारत क्यों बदल गया जहां हर कोई बेहाल जहां हर कोई घायल लादे आज़ादी और गणतंत्र का बोझ बोझिल कांधों पर गणतंत्र कैसा ये गणतंत्र आज़ादी कैसी ये आज़ादी जहाँ आज भी धर्म पर होते बवाल कई न आज़ादी मंदिर की न…

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माता तुम अनुपम

माता तुम अनुपम प्रकृति का अनुपम उपहार मातृत्व से भरी कोमल नार जननी ममतायी अमृत रसी कोमलांगी माता शक्ति सार नित्य कष्ट सह जाये माते संतान की पीड़ा करती हरण ममता रोम रोम में बसता क्या व्याख्या कैसे हो उद्गार समर्पण माँ का अद्भुत भाव जिसको ना हो माप व् भार माँ तो होती सदा…

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कफ़न

कफ़न घीसू और माधव दो पात्र हैं। घीसू पिता है माधव पुत्र है। बुधिया माधव की पत्नी है जिसकी मृत्यु हो चुकी है। घीसू और माधव गांव से पैसे इकठ्ठे करके शहर में कफ़न और अंत्येष्टि का सामान खरीदने जाते हैं लेकिन उस पैसे से शराब और चिकन खा लेते हैं। उन्होंने उम्र भर भूख…

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माता और पिता

माता और पिता मैं अपने पिता की सबसे बड़ी आलोचक रहीं हूँ, मेरी अति सौम्य मृदुभाषिनी माता की तुलना में, वे काफी रूखे, सख्त, अहंकारी और अनुशासित इंसान दिखते रहें हैं। अगर प्रतीकों की भाषा में कहा जाए तो, माँ एक कोमल कविता सी हैं, तो पिता एक राष्ट्र गान जैसे, माँ के नर्म –…

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मेरी माँँ

मेरी माँँ माँ की ममता की छाँव है माँ की आवाज दिल का सुरुर है माँ की मौजूदगी दिल का सुकून है माँ की मुस्कुराहट फूलों की खुश्बू है माँ का दुख दिल का लहू है माँ की ममता प्यार का साया है माँ के पैरों के नीचे सारा जहाँ है माँ का साया सघन…

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