ज़हरमोहरा: उर्दू में अनुवादित दिव्या माथुर का कहानी संग्रह

ज़हरमोहरा: उर्दू में अनुवादित दिव्या माथुर का कहानी संग्रह दिव्या माथुर से तआरुफ़ गुज़िश्ता मई, 2015 में डॉ ज़ियाउद्दीन शकेब के माध्यम से हुआ। किसी हिन्दी कहानीकार को पढ़ने का यह पहला मौक़ा था; मुझे ये फ़ैसला करने में वक़्त नहीं लगा कि ये कहानियाँ उर्दू दुनिया तक भी पहुँचनी चाहिएँ। मुझे दिव्या जी की…

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शिक्षा – क्या और क्यों

शिक्षा – क्या और क्यों इसी वर्ष जनवरी के महीने में एक अन्तरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस के दौरान नागालैंड के राज्यपाल पी बी आचार्य को सुनने का मौका मिला । अपने संभाषण के दौरान उन्होंने जो एक बहुत गूढ बात कही वो ये थी कि ” शिक्षित वो नहीं जिसके हाथ में सर्टिफिकेट का भंडार हो बल्कि…

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ऑटिज्म

ऑटिज्म यह एक तरह का मानसिक रोग है। इस रोग के लक्षण बचपन में ही दिखाई देने लगते हैं। जन्म से लेकर 3 साल की आयु तक विकसित होने वाला ऐसा रोग है, जिससे बच्चे का मानसिक विकास रुक जाता है। ऐसे बच्चों का दिमागी विकास सामान्य बच्चे की तुलना में बहुत ही धीमी गति…

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विद्या भंडारी की कविताएं

विद्या भंडारी की कविताएं 1.अनबोला लड़की जब तब्दील होती है स्त्री में जाने कहाँ खो जाता है समय । निगल लिए जाते हैं जुबान पर आए शब्द । गुम हो जाती हैं परिंदो सी खिलती आवाजें ।। उड़ते पंख बदल जाते है फड़फड़ाते पंखों में । आंखो में अनचाहे ख्वाब लगते है तैरने । ऐसे…

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ये चाय की प्याली

ये चाय की प्याली हो लबालब ये चाय की प्याली, छलके जबतब ये चाय की प्याली । जन्नतों का सुकून हो हासिल, छू ले जो लब ये चाय की प्याली । पाँच बजते ही बस तलब उट्ठे , माँगे साहब ये चाय की प्याली । हसरतों से वो जब मुझे देखे, इसका मतलब ये चाय…

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सुभागी

सुभागी महान कथा सम्राट, क़लम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद जी की कहानी “सुभागी” पर समीक्षात्मक आलेख। कहा जाता है। जितना कहा जाना था। जितना लिखा जाना था, वो सब कहा और लिखा जा चुका है। प्रकृति प्रदत्त पंच तत्वों के नैसर्गिक एवम भौतिक प्रतिमान शाश्वत हैं। जिनकी विद्यमानता अनादिकाल से अनवरत स्थापित है। समय काल…

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पहली कविता

पहली कविता बचपन के भावाें को सहेज अपने नन्हें हाथाें से लिखी मैने तितलियाें पर एक कविता । खुशी से थिरकती ,उछलती पहुॅंची पिता के पास कहा- पिता देखाे मैंने की है रचना लिखी है मैने कविता , पिता ने हॅंसकर माथा चूम लिया कहा,मेरी लाड़ली है यह मेरी प्यारी सुन्दर कविता । यह सुन…

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माँ

मां मां तो मां होती है, जननी जीवन देने वाली, बच्चों को वो सेने वाली। कठिन विकट पथपर भी, बच्चों के हित चलने वाली। मां तो मां होती है, मां तो बस मां होती है। बिना स्वार्थ सब कुछ करती, नयन नेह से दुख वो हरती। सबसे सुन्दर छवि है उसकी, खुशियों से दामन है…

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गुरु वंदना

गुरु वंदना गुरुजनों के ज्ञान को , तू देना सदा सम्मान । दुख संताप वे हर लेगें , ऐसे वे इंसान ।। लोभ दौलत का तुझको है तो,विद्या धन एकत्र कर। चोर न चोरी कर सके , तू चाहे सर्वत्र भर।। विद्या और कल्याण की दौलत, लूट सके तो लूट। कोई न जाने किस पल…

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