घर से चलकर पूरी दुनिया तक की यात्रा हैं – दिव्या की कहानियाँ

घर से चलकर पूरी दुनिया तक की यात्रा हैं – दिव्या की कहानियाँ चुनिंदा कथाकार ऐसे होते हैं जो शून्य से शुरू तो होते हैं किन्तु वे किस हद तक चले जाएंगे, इस बारे में कयास लगा पाना बहुत मुश्किल होता है। हिंदी साहित्य की पहली और दूसरी पीढ़ियों के कथाकारों और यहाँ तक कि…

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FRAGRANCE OF LOVE

FRAGRANCE OF LOVE Fragrance of love with intoxicated intense, Showering blessings of caring in presence, Wonder of life is beautifully vagrant, Sprayed perfumes of exquisite experience. Genuine love is in unconditional surrender, Mystical magician an unknown wanderer, Unparalleled joy is always a wonder, Passionate petals opening splendour. Morning dawn brings golden bursts, Journey of discovery,meaningful…

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‘आज का होरी’ कौन लिखेगा ?

‘आज का होरी’ कौन लिखेगा ? किसान की फसल जब तबाह हो जाती है तब सियासत की फसल लहलहा उठती है। ‘भारत एक कृषि-प्रधान देश है’ जब यह पंक्ति हमारे नीति-निर्माता, योजनाकार जब मौके-मौके पर कहते हैं तो उनके मुँह से यह सुनकर न तो हँसी आती है और न ही गुस्सा, बल्कि यह सोचना…

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सोपान

सोपान  ऑफिस के एक बड़े से हॉल में गोविंद नारायण जी के सेवानिवृत्ति उपरांत विदाई समारोह का आयोजन किया गया था। वह आयुक्त के पद पर कार्यरत थे।साथ में उनकी धर्मपत्नी मालती जी भी आमंत्रित थी । गोविन्द जी अपने सेवाकाल में बेहद ईमानदार एवं कर्मठ ऑफिसर रहे थे । वे अपने से छोटे कर्मचारियों…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- राम प्रसाद बिस्मिल

राम प्रसाद बिस्मिल सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है जोर कितना बाजूए-कातिल में है इन पंक्तियों को आत्मा में उतार कर कोई जिया हो तो वे हैं राम प्रसाद बिस्मिल। भले ऐसा समझा जाता है इनके रचयिता वास्तव में बिस्मिल अजिमाबादी थे। ११जून १८९७ को शाहजहाँपुर गाँव में पंडित मुरलीधर और…

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होली में

होली में यही हसरत मेरे दिल में रही हर बार होली में, करूं रंगीन गोरी के कभी रुखसार होली में । नहीं हद से गुज़र जाना हदों में मयकशी करना हैं वरना नालियों में गिरने के आसार होली में। चलेंगे दौर गुंजियो के चलेंगे दौर खुशियों के चले आओ हमारे घर हैं हम तैयार होली…

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कोरोना दारुण व्याधि रचायो

कोरोना दारुण व्याधि रचायो कोरोना दारुण व्याधि रचायो, चीन देश वाहि पैदा कीन्हों, सब जग माहि पठायो, जर्मन, इटली, फ़्रांस, रूस, सारे जग को भरमायो, इंगलैंड और अमेरिका सोचें, सधै ना कोनु उपायो, जग पूछे बेशर्म चीन से, क्यों चमगादड़ खायो, हालैंड, पाकिस्तान, कनाडा, सब को सोच थकायो, भारत के तत्पर प्रयास लख सब जग…

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गढ़ा हमारे जीवन को ऐसे

गढ़ा हमारे जीवन को ऐसे , जैसे गढ़े कोई सुनार या कलाकार शब्द नहीं हैं मेरे पास कि रूप दे सकूँ उनको साकार मजबूत इरादों वाली,गंभीर, सहनशील,गुणी ,सुशीला, सौम्या। जिसने हम भाई-बहनों के जीवन को गढ़कर आकार दिया । पिता के साथ मजबूती से हर वक्त उनको हमने देखा खड़ी । हमारी हर परेशानी में…

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गांधी समझ नहीं आएंगे नोट मे

गांधी समझ नहीं आएंगे नोट मे.. अगर समझना चाहते हैं, गांधी को तो, झांकिए अपने अंतरात्मा के ओट मे… गांधी समझ नहीं आएंगे नोट मे… सत्य को अब और कब तक? पढ़ते -पढ़ाते रहेंगे पुस्तकों में… एक बार, सत्य को आने तो दीजिए, अपने आचरण व्यवहार मे.. मुस्कुराते दिखेंगे गांधी, अंतरात्मा की ओट मे …….

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शब्द सुमन : राष्ट्रकवि के चरणों में

शब्द सुमन : राष्ट्रकवि के चरणों में “मुझे क्या गर्व हो ,अपनी विभा का, चिता का धूलिकण हूँ, क्षार हूँ मैं। पता मेरा तुझे मिट्टी कहेगी, समा जिसमें चुका सौ बार हूँ मैं।” कौन है ऐसा स्वपरिचय देता हुआ? अरे वह तो ,सरस्वती का वरद पुत्र, रामधारी सिंह ‘दिनकर’ नाम जिसका हुआ। ‘राम’ को धारण…

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