हामिद के बहाने आज का विद्रूप समाज !

हामिद के बहाने आज का विद्रूप समाज !! जब भी टी वी पर मैं हवेल्स केबल का विज्ञापन देखता हूँ, जिसमे माँ का हाँथ रात का खाना(रोटी) बनाने के क्रम में जलने जैसा होता है, और पास ही खाने के लिए बैठा एक नन्हा सा बालक इसे देखता है….अनुभव करता है और अचानक उठ कर…

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श्रीकृष्ण सरल : शहीदों का चारण

श्रीकृष्ण सरल : शहीदों का चारण श्रीकृष्ण सरल के नाम से बहुत से पाठक भले ही परिचित न हों, लेकिन स्वाधीनता संग्राम और क्रांतिकारियों में रुचि रखने वाला हर व्यक्ति उनके नाम से भली-भांति परिचित है। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, भगतसिंह, चन्द्रशेखर आज़ाद, अशफाक़ उल्ला खाँ, राजगुरु और सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों और शहीदों के अतिरिक्त…

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नमक सत्याग्रह और गांधी जी

   नमक सत्याग्रह और गांधी जी   अपने जीवन के शुरुआती कुछ साल पढ़ाई व् काम के सिलसिले में इंगलैंड व् दक्षिण अफ्रीका में बिताने के बाद जब १९१५ में गांधी जी भारत लौटे तो वे एक बदले हुए इंसान थे. वहां अंग्रेजों का दुर्व्यवहार झेलने के कारण उन्हें भारतवर्ष  की आजादी सर्वोपरि लगी. वे…

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प्रकाशोत्सव

प्रकाशोत्सव ताल ठोक रहा तम का दानव लिए अँधेरा मन का दूर खड़ा मानव दिखावे के रोशनी सजती सबके घर – द्वारे मन का तम मिटा ना सका तू मानव, प्यारे ……….. ताल ठोक रहा ………. रात – रात पूरी चला मंज़िल ना पाया लौट बुद्धू घर को आया चला जिस डगर वह भी निकला…

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ममता कालिया- एक कवयित्री के रूप मे

ममता कालिया- एक कवयित्री के रूप मे ममता कालिया का नाम यूं तो गद्य लेखन में अधिक है परंतु उन्होंने अपनी रचनाएंं कविताओं से ही आरंभ की थीं। ममता कालिया की पद्य रचनाएं भी उनकी गद्य रचना के समान ही विशिष्ट हैं। पेश हैं वाणी प्रकाशन की किताब ‘पचास कविताएं’ में छपीं उनकी कविताओं में…

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एक खत

एक खत एक पाती माँ के नाम माँ,कहते है इस बेहद खूबसूरत शब्द की सरचना ईश्वर ने तब की जब उन्हें लगा की वह सब जगह नही पहुँच सकते,और फिर उन्होंने हम सब के लिए माँ बनाई!! सम्पूर्ण सृष्टि आकाश गंगा तारा मण्डल और ब्रह्माण्ड की सृजनकर्ता #माँ,वह ध्वनि है #ॐ सी, ओंकार सा वक्त…

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रोटी ,कपड़ा और मकान

रोटी ,कपड़ा और मकान कदम बढ़ चले कदम ना चिलचिलाती धुप ना भींगने का डर. सर्द हवाएं भी नही हिलाती दम नही चुभती मिलता जो भी हो दर्द लिंग से परे पत्थर तोड़े या चढ़ जाएँ ऊँची इमारते ना अँधेरे का भय बहुत कुछ को नकारते हमसब हैं निकलते हंसते खिलखिलाते अपने खोली से अपनी…

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मिथिला का लोक पर्व “सामा- चकेवा”

मिथिला का लोक पर्व “सामा- चकेवा” सामा-चकेवा एकमात्र मिथिला में मनाया जाने वाला लोक पर्व है. यह पर्व मिथिला की संस्कृति से जुड़े होने के साथ ही इसकी पौराणिक मान्यता भी है. बहनो द्वारा भाई के लिए मनाया जाने वाले इस त्यौहार का शुभारम्भ कार्तिक शुक्ल सप्तमी, छठ के पारण यानि सुबह के अर्घ के…

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माँ

माँ संस्कारों के दिव्य अलंकरण की शक्ति है माँ । स्नेह भरे संबल का सुखद स्पंदन है माँ । जीवन की ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों पर धैर्य से आगे बढ़ने की शिक्षा है माँ । जिन्दगी की कटु अनुभूतियों की मधुर अभिव्यक्ति है माँ । तुझ में है हम हममें हो तुम हमारे संपूर्ण व्यक्तित्व की पहचान…

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