राम तुम्हारा चरित स्वयम् ही काव्य है

राम तुम्हारा चरित स्वयम् ही काव्य है अयोध्या की यात्रा एक चिर प्रतीक्षित अविस्मरणीय यात्रा थी, वर्षों की कामना पूर्ण हो रही थी और अपनी कल्पना के साकार हो पाने की अनुभूति हो रही थी,,, इतिहास के पन्नों पर बिखरी अयोध्या नगरी की अनगिनत कहानियाँ, उनके सच, और उस यथार्थ का मुखर मौन और उनके…

Read More

मेरे राम

मेरे राम  राम मेरे तुम हो रागी -अनुरागी जिनसे मिले बने संगी साथी जीवन भर के रहे सहारे बिन धन -धान- साधन के योग – संयोग तुमसे सब बनते सुख दुःख के पल आते जाते जन्म- मृत्यु के चक्र सुधरते राम नाम के सुभाग अनन्ते   सूर्य वंश का तेज झलके कर्मों में कभी न…

Read More

एमिली डिकेंसन – नई धारा की कवयित्री

एमिली डिकेंसन – नई धारा की कवयित्री “मै कोई भी नहीं, तुम कौन हो क्या तुम भी, कोई नहीं हो ? एमिली डिकेंसन की इस कविता से आशय निकाल सकते हैं कि एमिली बहुत ही अकेली और अपने जमाने में अलग किस्म की कवयित्री रही होंगी । अकेलेपन को उन्होंने अपना साथी बनाया और बहुत…

Read More

क्रांतिवीरों का तीर्थ स्थल : सेल्युलर जेल

क्रांतिवीरों का तीर्थ स्थल : सेल्युलर जेल   यह तीर्थ महातीर्थों का है.. मत कहो इसे काला पानी.. तुम सुनो यहाँ की धरती के.. कण कण से गाथा बलिदानी. प्रखर राष्ट्रभक्ति की ये पंक्तियां भारत वर्ष के स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी श्री गणेश दामोदर सावरकर जी के होठों पर तब भी सजी हुई थी…

Read More

दहलीज

‘दहलीज’ लगभग बाइस-तेईस बरस की कमली घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन धोने का काम करती है। पति मजदूर है और सात बरस से कम उम्र के चार बच्चे थे दोनों के। उनमें से दो बड़े बच्चे स्कूल जाते हैं। तीसरी और चौथी बच्चियां अभी बहुत छोटी हैं। उन्हें घर पर अकेला छोड़ना सहज न था…

Read More

TEN COMMANDMENTS

TEN COMMANDMENTS On the eve of WORLD HEALTH DAY(7th April) My TEN COMMANDMENTS of COVID from PUBLIC’s perspective!!(कुछ महत्वपूर्ण पहलू सबके लिए) Rampaging COVID( Second of so many impending WAVES) makes a few things crystal clear.. 1)MASK is the only realistic protection. 2) Vaccine is NO protection except, perhaps less mortality & severity, but We…

Read More

दिव्या माथुर: मेमेन्तो मोरी

दिव्या माथुर: मेमेन्तो मोरी ब्रिटेन में रहने वाली प्रवासी भारतीय हिन्दी लेखक सुश्री दिव्या माथुर से हमारी पहली मुलाक़ात सितम्बर 1999 में हुई थी, जब मैं मास्को विश्वविद्यालय में संस्कृत के प्रोफ़ेसर बोरिस जाखारयिन के साथ छठे विश्व हिन्दी सम्मेलन में भाग लेने के लिए लन्दन गई थी। दिव्या जी ने बड़ी हार्दिकता के साथ…

Read More

जय जवान

जय जवान वतन के लिए ऐसा प्यार देखिए हमारे जवानों का अरमान देखिए सीमा पर सालों से हैं अड़े हुए है अपने कर्म पर विश्वास देखिए अनोखे जोश से हैं फड़कती बाहें हैं अलबेले उनकी पहचान देखिए भीड़ जाते हैं वो दुश्मन से बेखौफ शेर हमारे देशके वीरजवान देखिए कुर्बानी के हैं बनाते वो इतिहास…

Read More

आगमन

आगमन जिस वक्त द्वार खटखटाया गया भीतर उसके एक मद्धिम दिया जल रहा था द्वार खोल कर देखा तो बाहर विस्मय का धुंआ जोर से उठ रहा था वह भीतर घुस आया और दृढ़ता से अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया वह फटी आंखों से देखती रह गई ऐसे,जैसे डूबता हुआ आदमी बोलने का प्रयत्न तो…

Read More