मंच हमारा विचार आपका

मंच हमारा विचार आपका भारतीय समाज आज शिक्षित ,स्वतंत्र और आधुनिक होने के बाद भी मध्यकालीन युगीन भारतीय समाज की तरह ही महिलाओं के प्रति संकीर्ण एवं विकृत मानसिकता का शिकार है जिसके कारण महिलाओं पर अपराध दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। आज महिलाओं के प्रति अपराध में तेजी से बढ़ोतरी हुई है…

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दिवाली का घरौंदा

दिवाली का घरौंदा मान्यताओं के अनुसार दीपावली प्रभु राम के चौदह वर्ष के वनवास के बाद पुनः अयोध्या नगरी लौटने पर मनाया जाता है। घर घर मिट्टी के दिए, वंदनवार ,रंगोली की सजावट से उनके आगमन की खुशी का इजहार करना ही उद्देश्य होता है। उस वक़्त को आज भी कुछ नए तौर तरीकों से…

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बस यूँ ही चलते जाना है

  बस यूँ ही चलते जाना है कौन कहता है आसमां में सुराग नही हो सकता एक पत्थर तो तबीयत से उछालो  यारों। मेरा जन्म महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में 29 सितंबर 1968 को हुआ,विविध पारिवारिक कारणों से या यूं कहें कि मां के देहावसान के कारण 1978 में जमशेदपुर आना हुआ। फिर स्कूली शिक्षा…

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मजबूरी का सौदा

मजबूरी का सौदा गौरीपुरा गाँव के ठीक बीचों-बीच, बरगद के पेड़ के नीचे, गिरधारी की छोटी-सी दुकान थी। दुकान क्या थी, एक फटी-पुरानी चारपाई, जिस पर कुछ लकड़ी के खिलौने रखे रहते थे। गिरधारी के हाथ में जादू था। उसकी छेनी और हथौड़ी से बेजान लकड़ी में जान आ जाती थी। वह सुबह सूरज निकलने…

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हिन्दी : कल, आज और कल

हिन्दी : कल, आज और कल हिन्दी हमारी मातृभाषा और हमारी राष्ट्रभाषा है। हमारे राष्ट्र के माथे की बिन्दी है। भाषा संप्रेषण का सशक्त साधन होता है। जीवंतता, स्वायत्तता तथा लचीलापन भाषा के प्रमुख लक्षण हैं। इसलिये देश में हिन्दी बोली जाने के आधार पर 14 सितंबर 1949 को संविधान की भाषा समिति ने हिंदी…

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बिन पिता के

बिन पिता के स्वाभिमान, सुरक्षा, स्नेह, समर्पण वटवृक्ष सी छाया जिसने की अर्पण चरणों में जिसके सब कर्म धर्म समझाया जिसने जीवन का मर्म माँ के जीवन के, जो थे परिभाषा मिली उन्हीं से अदम्य जिजीविषा निष्ठा, कर्त्तव्य, पोषण, अनुशासन मूल मंत्र सा जिसने, फूंका अंतर्मन बिन तुम्हारे अधूरा हर संकल्प तुम बिन दूजा न…

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सच्चा साथी

सच्चा साथी रीना मण्डल के घर से जोर जोर से लड़ने झगड़ने की आवाज़ आ रही थी । रात के सन्नाटे में तो आवाज़ और भी तेज सुनाई देती है।कुछ देर के बाद आवाजें बन्द हो गयी और रीना के रोने की हल्की-हल्की सी आवाजें आने लगीं । यह उनकेे घर की लगभग हर तीसरे-चौथे…

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कन्यादान एक विवशता

कन्यादान एक विवशता सामान्यतः मध्यमवर्गीय परिवारों मे लड़कियों के विवाह के लिए आदर्श उम्र स्नातक के बाद से ही मानी जाती है ।ज्यादातर मामलों मे उच्च शिक्षा और भविष्य संबंधी सभी निर्णय लड़की के भाग्य और ससुराल पक्ष के मिजाज पर निर्भर करता है!हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, बात उन दिनों की है,…

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