तुम में ही खुद की तलाश है

तुम में ही खुद की तलाश है लोग कहते है तू मेरी परछाई है मैं कहती हूँ तू मुझमे है मैं तुझमे हूँ ये क्या एहसास है कि तुम में ही खुद की तलाश है ज़ब भी देखूँ तुम्हे मेरा अक्स नज़र आये आइना है मेरा तू ,तुझे देख ही श्रृंगार हो जाये ये क्या…

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माँ!!तुझ से ही तो…

माँ!!तुझ से ही तो… जीवन में उजाला था, तेरे बगैर खुद को… बड़ी मुश्किल से संभाला था। तुम अटूट बंधन…. एक मजबूत स्तंभ थी, झकझोरती हुई संवेदना… अनवरत बहती धारा थी। तेरी आँचल में ही तो… हंस के,रो के… सारा बचपन गुजारा था, तेरे बगैर खुद को… बड़ी मुश्किल से संभाला था। ना जाने कितने…

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होली जोगीरा

होली जोगीरा आयो है मधुमास, छायो है प्रभास, सुरभित है उपवन, अली करे रसपान, बजाकर बांसुरी सी तान, मैं कैसो करूं बखान, जोगीरा सा रा रा रा…. जोगीरा सा रा रा रा…. पधारे ब्रज में अनंग, देखन को रास रंग, गोपीयन के अंग, थिरकत हैं श्याम संग, हर्षित वृंदावन धाम, मैं कैसो करूं बखान, जोगीरा…

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मानव सभ्यता का अदृश्य दुश्मन कोविड 19

मानव सभ्यता का अदृश्य दुश्मन कोविड 19 कोरोना पर चिंतन ‌करने से पहले हम अपनी पुरानी सभ्यता संस्कृति पर एक नजर डाल लें । पृथ्वी , काल और समय के अनुरूप सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और भौगोलिक मांग के अनुसार अपना संतुलन बनातीं रही हैं । त्रेतायुग में एक युद्ध ,द्वापरयुग में एक युद्ध फिर अभी…

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अयोध्या:इतिहास के आईने में

अयोध्या:इतिहास के आईने में हे राम, जीवन एक कटु यथार्थ है और तुम एक महाकाव्य ! तुम्हारे बस की नहीं उस अविवेक पर विजय जिसके दस बीस नहीं अब लाखों सर – लाखों हाथ हैं, और विभीषण भी अब न जाने किसके साथ है. इससे बड़ा क्या हो सकता है हमारा दुर्भाग्य एक विवादित स्थल में…

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कोरोना के बाद की दुनिया

कोरोना के बाद की दुनिया पिछली सदी के दो विनाशक महायुद्धों ने हमारी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को बहुत हद तक बदला था। विश्व इतिहास में पहली बार कुछ ऐसा हुआ है जिसने राजनीति और अर्थतन्त्र के साथ लोगों का जीवन और जीने के तरीके भी बदल दिए हैं। महामारियां पहले भी आती रही…

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ज्ञान की बात

ज्ञान की बात टेलीविजन पर शंकराचार्य और मंडन मिश्र के शास्त्रार्थ का प्रसंग चल रहा था। जीत और हार के लिए जो मानक निर्धारित किए गए थे मुझे उस समय वह बड़े हास्यास्पद लग रहे थे। दोनों के गले में फूलों की एक-एक माला थी और जिस की माला मुरझा जाएगी उसी को हारा हुआ…

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लौहपुरुष

लौहपुरुष मेरा भारत बिखरने के लिए नहीं बना है – सरदार पटेल सरदार पटेल भारत के देशभक्तों में एक अमूल्य रत्न थे। वे आधुनिक भारत के शक्ति स्तम्भ थे। आत्म-त्याग, अनवरत सेवा तथा दूसरों को दिव्य-शक्ति की चेतना देने वाला उनका जीवन सदैव प्रकाश-स्तम्भ की अमर ज्योति रहेगा। वे मन, वचन तथा कर्म से एक…

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