विषाणु कोरोना

विषाणु कोरोना कोरोना वायरस की आपदा विश्वव्यापी थी। इस संकट से निपटने में हमारे सक्षम प्रधानमंत्री मोदी जी की दूरदर्शिता और कर्मठता का ही परिणाम था कि हमारे देश में कोरोना वायरस उतनी तेजी से नहीं फैला जैसा अन्य देश में फैला था। मोदी जी ने देश के फस्टफ्रंट पर काम करने वाले सभी डाक्टर,…

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संप्रभु भारत में गणतंत्र दिवस

संप्रभु भारत में गणतंत्र दिवस प्रत्येक भारतीय के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण दिन हैं: १५ अगस्त को मनाए जाने वाला स्वतंत्रता दिवस और २६ जनवरी को मनाए जाना वाला गणतंत्र दिवस। दोनों के बीच बुनियादी अंतर यह है कि १५ अगस्त १९४७ को भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की, लेकिन १९५० में देश के संविधान को…

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फिर नयी सुबह तो आयेगी ‌

फिर नयी सुबह तो आयेगी ‌ दिसंबर की शीत लहर और एक वायरस ने चीन के वुहान शहर को अपने आलिंगन में ले लिया और फिर उसका आगोश कसता गया,बढ़ता गया।सुना गया कि वुहान की प्रयोग शाला में किसी छीना झपटी में यह वायरस लाखों लाख की संख्या में ज़मीन पर गिरा तो आदमी के…

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मातु विनत वंदना हमारी

मातु विनत वंदना हमारी तुम्हे समर्पित ह्रुदयांतर से ,मातु विनत वंदना हमारी, अक्षर अक्षर बांध लिया है ,भाव- सुमन मुक्ताहारों से, स्वर वैभव के गीत रचाकर ,सरगम के स्नेहिल तारों से विश्वासों का दीप जलाये ,मातु सहज प्रार्थना हमारी . मातु विनत वंदना हमारी पाँव भटकतेजग-अरण्य में,मन बोझिल और पथ दुर्गम है, लक्ष्य शिखर को…

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उम्मीदों का नया दशक

उम्मीदों का नया दशक 2021से 2030 का समय एक नए दशक का आरंभ कितनी नई जिंदगियों की शुरुआत कितनों की सेवानिवृत्ति कितनों के नए कर्तव्य होंगी कितनी नई किलकारियाँ कितनी नई गृहस्थियाँ जो पालने में हैं, नए आयाम गढ़ेंगे जो पा चुके हैं पंख, वृहद आसमान छूयेंगे नये जहान का विस्तार होगा नयी तकनीक का…

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प्रेम की पराकाष्ठा

प्रेम की पराकाष्ठा प्रेम सत्य है,सर्वव्यापी है प्रेम की पराकाष्ठा भला कब किसने नापी है!! प्रेम विश्वास है प्रेम आस है, प्रेम प्यास है एहसास है!! प्रेम पूजा है,प्रेम निष्ठा है, प्रेम नाता है ,प्रेम विरह है!! प्रेम को कब किसने बांधा है प्रेम को कब किसने मापा है, प्रेम अनछुआ है अनदेखा है प्रेम…

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मेरी पीढ़ी का सच

मेरी पीढ़ी का सच कहा जाता है एक व्यक्ति अपने जीवन में पाँच जीवन जीता है,देखता है और समझता है।दादा-नाना से लेकर नाती- पोते तक पर सबसे अधिक लगाव मनुष्य को अपनी पीढ़ी से ही होता है। देश की स्वतंत्रता के वे प्रारंभिक दिन थे।बचपन उसका भी था और मेरा भी।उत्साह और उमंग से भरे…

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यू आर माई वेलेंटाइन…..

यू आर माई वेलेंटाइन….. चाय के कप के साथ रखे अखबार पर छपी तारीख और फेसबुक ने याद दिलाया आज का दिन। चाय कड़क और मीठी लगने लगी, एक तमन्ना मन ही मन भाप सी ऊपर उठने लगी। ‘सुनिये जरा…’ पुकारा हमने। ‘क्या है जी… बच्चों को दूध-चाय देना है। नाश्ते की भी तैयारी करना…

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पहली कविता

पहली कविता बचपन के भावाें को सहेज अपने नन्हें हाथाें से लिखी मैने तितलियाें पर एक कविता । खुशी से थिरकती ,उछलती पहुॅंची पिता के पास कहा- पिता देखाे मैंने की है रचना लिखी है मैने कविता , पिता ने हॅंसकर माथा चूम लिया कहा,मेरी लाड़ली है यह मेरी प्यारी सुन्दर कविता । यह सुन…

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