श्रेया

श्रेया   ऑफिस से लौटकर श्रेया कमरे में अपनी बैग रखने गई । अनायास ही उसकी नज़र दीवार पर टँगी नानी की तस्वीर पर गई।श्रेया के जीवन में नानी की अहमियत बहुत थी । या यूँ कहें कि नानी उसकी सब कुछ थी।तस्वीर को देख श्रेया की आँखों से अविरल आँसू बहने लगे ।  …

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TEN COMMANDMENTS

TEN COMMANDMENTS On the eve of WORLD HEALTH DAY(7th April) My TEN COMMANDMENTS of COVID from PUBLIC’s perspective!!(कुछ महत्वपूर्ण पहलू सबके लिए) Rampaging COVID( Second of so many impending WAVES) makes a few things crystal clear.. 1)MASK is the only realistic protection. 2) Vaccine is NO protection except, perhaps less mortality & severity, but We…

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कील

कील बाहर खिली – खिली धूप को देखते ही उसका मन बाहर जाने को मचल उठा ।उसने अपने पैटीओ से बाहर गार्डन में देखा पेड़ भी शांत थे लगता था वह भी चमकती धूप का आनन्द ले रहे थे । धूप से घास पर पड़ी ओस भी यूँ चमक थी मानो प्रकृति ने चमकते हीरों…

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डैडी होम

  डैडी होम दिशांत दौड़ता हुआ अस्पताल में आया और खून में लथपथ नवजात को आगे कर बोला “प्लीज इसे जल्दी भर्ती करिए, इसकी हालत बहुत खराब है, प्लीज सिस्टर!” नर्स ने बच्ची को लिया और तुरंत एन.आई.सीयू. में भर्ती कर लिया। वहां बच्ची का इलाज शुरु हुआ। दिशांत वहीं चहलकदमी कर रहा था। नर्स…

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माता और पिता

माता और पिता मैं अपने पिता की सबसे बड़ी आलोचक रहीं हूँ, मेरी अति सौम्य मृदुभाषिनी माता की तुलना में, वे काफी रूखे, सख्त, अहंकारी और अनुशासित इंसान दिखते रहें हैं। अगर प्रतीकों की भाषा में कहा जाए तो, माँ एक कोमल कविता सी हैं, तो पिता एक राष्ट्र गान जैसे, माँ के नर्म –…

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धीरे धीरे रे मना

धीरे धीरे रे मना “अरे चुन्नू ! क्या सारा दिन खेलते रहोगे। आज तो सूरज उगते ही अपना क्रिकेट बल्ला सम्भाल लिया। पता है, बारह माही परीक्षा सर पर आ गई है।पढ़ाई के लिए स्कूल ने तुम्हें छुट्टी दे रखी है।और मैं भी तुम्हारे लिए घर पर हूँ, ऑफिस से छुट्टी लेकर। छः माही का…

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बापू की अमर कहानी

बापू की अमर कहानी आओ बच्चों तुम्हें दिखाये , स्वतंत्रता की अजब ग़ज़ब ये गाथायें हैं बापू की ये अमर कहानी हैं ! नोटो की हरियाली में आज भी छाये रहते हैं ! आओ बच्चों तुम्हें दिखाये , आज़ादी बलिदानो की ये सुंदर गाथा ! अपनी माता से बढ़ कर थी , मातृभूमि की रक्षा…

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Gandhi jayanti/kumud ranjan jha

गांधी समझ नहीं आएंगे नोट मे.. अगर समझना चाहते हैं, गांधी को तो, झांकिए अपने अंतरात्मा के ओट मे… गांधी समझ नहीं आएंगे नोट मे… सत्य को अब और कब तक? पढ़ते -पढ़ाते रहेंगे पुस्तकों में… एक बार, सत्य को आने तो दीजिए, अपने आचरण व्यवहार मे.. मुस्कुराते दिखेंगे गांधी, अंतरात्मा की ओट मे …….

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