भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-रानी लक्ष्मीबाई

मेरी महानायिका-झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई बुंदेलों हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वी तो झाँसी वाली रानी थी। आदरणीया स्वर्गीया सुभद्राकुमारी जी की रचना रानी लक्ष्मीबाई के साथ इतिहास में अंकित हो गई। यह काव्य कथा एक दर्पण की भाँति रानी जी की जीवनगाथा को अक्षरशः प्रतिबिंबित करती है। कविता पढ़ते…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- सरदार वल्लभ भाई पटेल

भारत के बिस्मार्क : लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल हम सभी को भारतवासी होने पर गर्व होता है पर यह स्वतंत्रता हमें हमारे पूर्वजों के बलिदान और त्याग से प्राप्त हुई है | लाखों स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सर्वस्व त्यागा है तब आज हम आज़ादी की इस खुली हवा में साँस ले पा रहे हैं|…

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खुसरो दरिया प्रेम का…

खुसरो दरिया प्रेम का… हर जानी-अनजानी, प्रेम कहानी, तुम जानो या मैं जानूँ की तर्ज पर एक निजी कहानी है। हर दार्शनिक, हर कवि, हर व्यक्ति ने इसे अपनी तरह से सुलझाने की कोशिश की है, समझना चाहा है। क्या है आखिर कई कई अहसासों से भरा यह सतरंगी प्रेम? महज एक आकर्षण जो ईर्षा,…

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विश्व हिन्दी दिवस

विश्व हिन्दी दिवस हिन्दी माँ का दूध है , और हमारा पूत । सदा हमारे साथ है , मन भावों का दूत ।। निज भाषा अभिमान है ‌, यह भगवन वरदान । अंतस से है फूटता , नहीं भाव व्यवधान ।। मात तात सम पोसता , है वटवृक्ष समान । निज निजता का भाव दे…

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सिर्फ एक देह नहीं है औरत

*सिर्फ एक देह नहीं है औरत* ================ ” *औरत काम पे निकली थीं* *बदन घर रख कर* *ज़िस्म खाली जो नज़र आए तो मर्द आ बैठे*  !! “ औरत की आजादी की बात जब भी की जाती है तो एक सवाल अब भी जेहन में कौंधता है कि क्या औरत का अस्तित्व सिर्फ एक शरीर…

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लोहड़ी

लोहड़ी आज से पचास या साठ वर्ष पहले उत्तर पूर्व के राज्यों में लोहड़ी के त्यौहार को कोई कोई जानता था। परन्तु अब पंजाब की ओर से अनेक रिवाज़ अन्य प्रांतों की जीवन शैली में घुल मिल गए हैं। इसका मुख्य कारण सिख समुदाय का परिवहन के क्षेत्र में योगदान है। भारत ही नहीं विश्व…

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लैंगिक समानता और सशक्तिकरण

लैंगिक समानता और सशक्तिकरण सभी महिलाओं को आवश्यक रूप से नारीवादी नहीं होना चाहिए और सभी नारीवादियों को जरूरी नहीं कि महिलाएं हों। पितृसत्तात्मक सामाजिक योजना में, यह वास्तव में बहस का मुद्दा है कि क्या नारीवाद एक महिला का अंतिम गढ़ है या अस्तित्व के लिए उसकी प्राथमिक स्थिति है। हालांकि, इस बात से…

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हम सुंदर दिखते हैं

हम सुंदर दिखते हैं ट्रिन ट्रिन ट्रिन… मेरी सुबह की शुरुआत ऐसी होती है। सुबह साढ़े छह बजे उठो, गैस पर चाय का पानी चढ़ाओ, उसके खौलने का इंतजार करो। परात में आटा निकालो, उसमें नमक मिलाओ और पानी डालो। फिर उसको धीरे-धीरे गूंथ डालो। चाय का पानी भभक रहा है। चाय की पत्ती डालो।…

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रोशनी : इधर-उधर से

रोशनी : इधर-उधर से हमारे देश भारत में इतनी विविधताएँ हैं कि सबको शब्दों में समेटना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। अब देश के ही कितने नाम हैं – जम्बूद्वीप, भारतवर्ष, इंडिया, हिन्दुस्तान, हिंद और सबके साथ ही कितनी कहानियाँ जुड़ी हैं। दरअसल भारत आस्था का देश है और किवदंतियों का भी। जितने पर्व –…

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सृष्टि करती कुछ सवाल

सृष्टि करती कुछ सवाल….. क्या होता गर बच जाती उसकी जान… आ जाती लौट कर घर,वह बेटी लहूलुहान। स्वीकार कर पाते तुम उसको….? देते उसको उसका स्थान…..? या भोगती वह ,अपने ही ऊपर हुए जुल्म की सज़ा दिन-रात? अनन्त तक खिंच जाती वेदना -व्यथा की रेखाएँ…. जब देखती वह माँ का करुण विलाप.. दिशाओं को…

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