सुभागी

सुभागी महान कथा सम्राट, क़लम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद जी की कहानी “सुभागी” पर समीक्षात्मक आलेख। कहा जाता है। जितना कहा जाना था। जितना लिखा जाना था, वो सब कहा और लिखा जा चुका है। प्रकृति प्रदत्त पंच तत्वों के नैसर्गिक एवम भौतिक प्रतिमान शाश्वत हैं। जिनकी विद्यमानता अनादिकाल से अनवरत स्थापित है। समय काल…

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बेचारी शिक्षा

बेचारी शिक्षा पुस्तकों की गलियों में भटकते – भटकते, मुलाकात हो गई शिक्षा से, मैंने पूछ लिया उससे, यूंही हाल उसका। रूआंसी होकर बोली वह, मत पूछो क्या हाल है मेरा, पहले रहती थी गुरुकुलों में, सादगी और संस्कारों के संग, पर अब हो गईं हूँ बाजारू, कभी पैसों के बल पर बेची और खरीदी…

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नमक सत्याग्रह और गांधी जी

   नमक सत्याग्रह और गांधी जी   अपने जीवन के शुरुआती कुछ साल पढ़ाई व् काम के सिलसिले में इंगलैंड व् दक्षिण अफ्रीका में बिताने के बाद जब १९१५ में गांधी जी भारत लौटे तो वे एक बदले हुए इंसान थे. वहां अंग्रेजों का दुर्व्यवहार झेलने के कारण उन्हें भारतवर्ष  की आजादी सर्वोपरि लगी. वे…

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कहानी ‘मेला’ एक वैचारिक दृष्टिकोण

कहानी ‘मेला’ एक वैचारिक दृष्टिकोण साहित्य संसार की प्रतिष्ठित कथाकर, जो, केवल कहानियों में ही नहीं, नाटक, उपन्यास, कविता, निबंध, पत्रकारिता,लगभग साहित्य की अधिकांश विधाओं में अपना हस्तक्षेप रखतीं हैं और अपने लेखन के लिये अनेक साहित्य सम्मान से नवाज़ी गईं हैं। प्रबुद्ध, सरल -सहज, सौम्य, चेहरे पर,निर्बाध, निश्छल हँसी ऐसे दिखती है,जैसे पूस में…

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ऐ वतन

ऐ वतन ऐ वतन! मेरे भारत! तेरी माटी से बनी हूँ मैं तेरी आबो हवा में ही मैं जिंदा हूँ मेरी साँसों में बसी है तेरी खुशबू रूह में इश्क हकीकी ख़ुदाया तेरा है नहीं दरकार मुझे मौसमों की तरहा प्यार के इज़हार की मेरा हर दिन मुबारक है तेरी आगोश में हर पल महफूज़…

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आह्वान

आह्वान नारी अबला नहीं , तुम हो सबल। शक्ति से भरपूर। सृजन करती हो, सृष्टि करती हो, रचनाकार हो इस धरती की। जीवन नहीं है एक अंतहीन अंधेरी सुरंग, उसे तुम आलोकित करो अंत:तिमिर का नाश करो। अपने अंदर का विश्वास जगाओ। रश्मि किरणों का अहसास करो, विधु की शीतलता का भी तुम विस्तार करो।…

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इश्क करो ख़ुद से और ख़ुदा से ….

  इश्क करो ख़ुद से और ख़ुदा से ….   इश्क, प्रेम का वह रूप है जिसमें कोई किसी में लीन हो जाना चाहता है …. फिर चाहे वह अपनी अंतरात्मा हो या अपना ईश्वर ! इश्क यानी प्रेम भक्ति का भी एक प्यारा रूप है जो समर्पण माँगता है तभी तो उसका सफर रूमानियत…

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संवाद

संवाद “अरि ओ पिंकी,सुना है तेरे पड़ोस में एक नई फैमली रहने आई है,कैसा है वह परिवार?” रिंकी ने घर मे घुसते ही अपनी सहेली पिंकी से पूछा। पिंकी अपनी प्यारी सहेली को देख बहुत खुश हुई,और बोली” मैं सोंच ही रही थी तुम्हें इस नये पड़ोसी के विषय में बताऊँ, जैसा कि तुम्हें पता…

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माँ

माँ मुझे याद है आपको अक्सर तीज त्योहार पर पूछती थी कि क्या चाहिए आपको और आपका हमेशा एक ही जवाब होता था…. मुझे मेरे सभी बच्चों की खुशहाली चाहिए। सच में माँ कभी अपने लिए कुछ नहीं चाहती, वो ख़ुश होती है, बच्चों को उनके मन पसंद खाना खिलाकर, वो ख़ुश होती बच्चों के…

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क्लारा बार्टन- नर्सिंग की प्रणेता

क्लारा बार्टन- नर्सिंग की प्रणेता जीवन काल-दिनांक: 25 दिसंबर, 1821 – 12 अप्रैल, 1912 (क्रिसमस दिवस और गुड फ्राइडे) व्यवसाय- नर्स, मानवतावादी, शिक्षक पारिवारिक पृष्ठभूमि- पिता: स्टीफन बार्टन, किसान, चयनकर्ता और विधायक (मैसाचुसेट्स), माता : सारा (सैली) स्टोन बार्टन, चार बड़े भाई-बहन: दो भाई, दो बहनें शिक्षा- लिबरल इंस्टीट्यूट, क्लिंटन, एनवाई (1851), क्लारा बार्टन ने…

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