आधुनिक भारत के निर्माता
आधुनिक भारत के निर्माता करोड़ों लोग जो दोज़ख से निकल आए हैं उनके क़द है जो आदमी जैसे ख्वाब आंखों में जो उभरे हैं अभी अब जो मुमकिन है हौसलों का सफ़र अब जो राहें ज़रा-सी रोशन हैं बेसबब तो नहीं हुआ होगा किसी ने ख़ुद को जलाया है ज़रूर ! मानवता, न्याय और समानता…