विजयी भारत

विजयी भारत आप में से बहुतों ने १९६२ का युद्ध देखा होगा व उसकी कहानियां भी सुनी होंगी।मेरे भी ज़हन में आज कई दिनों से वो १९७५ का पाकिस्तान व भारत के युद्ध जिसके “सायरन” की गूंज,वो मेरे घर की छत से जहाजों की फर्राटेदार उड़ानें और उस पर हम दोनों बहनों को मां और…

Read More

तुम आओगे या मैं जाऊं

तुम आओगे या मैं जाऊं तुम आओगे या मैं आ जाऊं कि, अब तो पतझड़ के बाद की नंगी शाखाओं पर नए पत्ते आ चुके हैं और प्रकृति भी अपने पुराने लिबास उतार कर नए आवरण में इठला रही है दिन लंबे और उदासी भरे हो गए हैं बहुत सारी उदासी इकट्ठी हो गई है…

Read More

प्रेरणादायक महात्मा गाँधी

प्रेरणादायक महात्मा गाँधी गुलामी की जंजीर से जकड़ी हुई भारतमाता को मुक्ति दिलाने वाले गाँधी जी युग पुरुष थे. शान्ति से क्रान्ति के सिद्धान्त का पालन कर विश्व में वे अमर हो गये ।अभिमन्यु जैसे हो सकोगे तुम तुम्हारा दर्द सारा खींच लूँगा मैं यही उनका सन्देश था , गांधीजी केवल एक देश के ही…

Read More

मुक्ति

मुक्ति नन्हीं के गांव में एक घर के आगे बड़ा-सा खलिहान था । शाम के समय उसके सारे संगी-साथी वहां जमा होकर खेलते थे। खलिहान वाले घर की लड़की भी उन बच्चों में शामिल थी। नाम था गंगा। गंगा उम्र में सब बच्चों से बड़ी थी। रिश्ते में वह किसी की बुआ लगती थी तो…

Read More

शहादत के खुले -अधखुले पन्ने

शहादत के खुले -अधखुले पन्ने विद्रोह ,गदर, क्रांति-इन शब्दों के अर्थ कभी भी बहुत स्पष्ट नहीं रहे। जुल्म के खिलाफ समय-समय पर फूटे जन असंतोष को यदि शासकों , शासितों ने अलग- अलग नाम दिए तो इसका कारण स्पष्ट है-दोनों की मंशा अलग होती है, उद्देश्य अलग। जिस विद्रोह को विप्लव, गदर, राजद्रोह कहकर जुल्मी…

Read More

गढ़ा हमारे जीवन को ऐसे

गढ़ा हमारे जीवन को ऐसे , जैसे गढ़े कोई सुनार या कलाकार शब्द नहीं हैं मेरे पास कि रूप दे सकूँ उनको साकार मजबूत इरादों वाली,गंभीर, सहनशील,गुणी ,सुशीला, सौम्या। जिसने हम भाई-बहनों के जीवन को गढ़कर आकार दिया । पिता के साथ मजबूती से हर वक्त उनको हमने देखा खड़ी । हमारी हर परेशानी में…

Read More

हिन्दी : कल, आज और कल

हिन्दी : कल, आज और कल हिन्दी हमारी मातृभाषा और हमारी राष्ट्रभाषा है। हमारे राष्ट्र के माथे की बिन्दी है। भाषा संप्रेषण का सशक्त साधन होता है। जीवंतता, स्वायत्तता तथा लचीलापन भाषा के प्रमुख लक्षण हैं। इसलिये देश में हिन्दी बोली जाने के आधार पर 14 सितंबर 1949 को संविधान की भाषा समिति ने हिंदी…

Read More

सुन लें

सुन लें आज ‘ऑटिज्म डे ‘है।यह भयंकर बीमारी है।सजग नहीं होने पर विकराल रूप ले लेता है।यह मानसिक रोग है।इससे ग्रसित बच्चे का मानसिक विकार के कारण विकास रूक जाता है। सामान्य बच्चों की अपेक्षा इन बच्चों का विकास बहुत धीमे गति से होता है। ऑटिज्म के बहुत कारण होते हैं।गर्भ काल में माँ की…

Read More

सिर्फ पूजा नहीं स्वच्छता भी जरूरी

सिर्फ पूजा नहीं स्वच्छता भी जरूरी आज गुरु पूर्णिमा है। गुरु यानी आध्यात्मिक गुरु, फिजिक्स या अलजबरा सिखाने वाला गुरु नहीं। भारतीय अध्यात्म में दर्शन का बहुत महत्व है। दर्शन का अर्थ है दिव्यत्व की एक झलक पाना। कहते हैं गुरु या मंदिर की मूर्ति का एक दर्शन भी शिष्य को पवित्र कर देता है।…

Read More

बस इतना सा

बस इतना सा नाम – सीमा भाटिया जन्मतिथि – 5 फरवरी, 1969 शिक्षा – स्नातकोत्तर (हिन्दी) लेखन की विधाएँ – गद्य और पद्य दोनों में प्रकाशित पुस्तकें – सांझा संग्रह_ संदल सुगंध, लम्हों से लफ्ज़ों तक, सहोदरी सोपान, अल्फाज़ ए एहसास (काव्य संग्रह) सफर संवेदनाओं का,आसपास से गुजरते हुए, लघुतम-महत्तम, सहोदरी लघुकथा २, लघुकथा कलश,…

Read More