हम जीतेंगे

हम जीतेंगे हम जीतेंगे, हम जीतेंगे लाज़िम है कि हम ही जीतेंगे वो दिन कि जिसका अरमां है हम सारे जनों का फ़रमां है जब ये भय, ये दहशत का आलम बन इक गुबार उड़ जाएंगे बेशक़ हम दिलों को जोड़ेंगे औऱ ज़ंजीरों को तोड़ेंगे लेकिन, लेकिन……. ना रखे दुश्मन कोई भरम नहीं है मुश्किल…

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भोर की प्रतीक्षा

भोर की प्रतीक्षा आज प्लेटफार्म पर कुछ ज्यादा ही भीड़ थी ,शायद कोई रैली जा रही थी ..पटना ,लोग दल के दल उमड़े चले आ रहे थे ,हाथों में झंडे ,छोटे बड़े झोले ,गठरियाँ लादे हुए …मुफ्त में यात्रा कर ,कुछ रूपये बचाने के लिए बेबस मजबूर लोग भी थे।तो कुछ ऐसे लोग भी थे…

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हिन्दी और हम

हिन्दी और हम हर देश की आबोहवा में रची होती है वहाँ की भाषा, ।साँस की तरह जिलाए रखती है, रीत, प्रीत, जन, मन, संस्कृति, संस्कारों को। अपनी माटी में जैसे पेड़ सिर उठाये खड़ा रहता है, बिल्कुल वैसा ही संबल मिलता है अपनी भाषा से…. क्या संसार में कहीं का एक दृष्टांत उद्धृत कर…

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मेरे दृष्टिकोण मेंः मेरे जीवन का एक अध्याय

मेरे दृष्टिकोण मेंः मेरे जीवन का एक अध्याय हममें से हर किसी का जीवन अनुभवों और संस्मरणों की एक किताब है,खजाना है बीते पलों का।जीवन की किताब में जिंदगानी के अलग-अलग पड़ावों से जुड़े अध्याय- कुछ पारिवारिक तो कुछ व्यवसायिक; कुछ संवेदनात्मक तो कुछ व्यवहारिकता के विषय से संबंधित।पर मैं जब अपने जीवन रूपी पुस्तक…

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गणतंत्र का सबसे मजबूत अस्त्र शिक्षा

गणतंत्र का सबसे मजबूत अस्त्र शिक्षा 72 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर विशेष शुभकामनाएं। 21वीं सदी का पहला गणतंत्र, युवा भारत के सपनों का गणतंत्र, अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बनाता, राज करता भारतीय गणतंत्र, जन गण मन तक राष्ट्रीयता के संदेश पहुंचाता गणतंत्र । हमारी शैक्षणिक विरासत पर हमें गर्व है…. नालंदा तक्षशिला…

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श्रेया

श्रेया   ऑफिस से लौटकर श्रेया कमरे में अपनी बैग रखने गई । अनायास ही उसकी नज़र दीवार पर टँगी नानी की तस्वीर पर गई।श्रेया के जीवन में नानी की अहमियत बहुत थी । या यूँ कहें कि नानी उसकी सब कुछ थी।तस्वीर को देख श्रेया की आँखों से अविरल आँसू बहने लगे ।  …

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संवैधानिक उपचारों की छत्रछाया में भारतीय महिलाएं

संवैधानिक उपचारों की छत्रछाया में भारतीय महिलाएं 26 जनवरी, 2021 को देश का 72 वां गणतंत्र दिवस हमने मनाया। वैश्विक महामारी के तहत बदले हुए परिवेश में इस राष्ट्रीय गौरव दिवस को हम सभी ने अपने-अपने दृष्टिकोण से मूल्यांकित किया, ह्रदय में राष्ट्र के प्रति स्थित अपने -अपने श्रद्धा के भाव के अनुपात में व्यवहार…

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आदर्श सास

आदर्श सास रविवार का दिन था। बच्चे पिक्चर चलने की ज़िद कर रहे थे पर आज मेरी कहीं जाने की इक्छा नहीं हो रही थी। दस दिनों से गाड़ी का पेपर खोज खोज कर घर मे सब परेशान हो गए थे। गाड़ी बेचनी थी औऱ पेपर मिल नही रहा था। दिमाग उसी में उलझा हुआ…

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देवी नहीं, नारी हूँ मैंं

देवी नहीं, नारी हूँ मैंं मुझे चाहत नहीं मैं कोई देवी बनूँ, शक्ति का पर्याय कहलाऊँ करुणा की वेदी बनूँ चाह मुझे बस इतनी कि मैं इंसान रहूँ खुलकर साँस लूँ अविरल धारा सी बहूँ, खुले आसमान में पँख फैलाकर उड़ूँ, खुश रहूँ,सपने देखूँ उसे निर्बाध पूरा करूँ अपने प्रेम को हँसता देखूँ अपनी ममता…

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