लॉकडाउन के पश्चात रोजगार और व्यवसाय के नये अवसर

“लॉकडाउन के पश्चात रोजगार और व्यवसाय के नये अवसर” “खेती न किसान को भिखारी को न भीख भली, वनिक को वनिज न चाकर को चाकरी। जीविकविहीन लोग सिद्यमान सोच बस, कहैं एक एकन सो ‘कहाँ जाइ का करी’।।” तुलसीदास ने भले ही ये पंक्तियां सोलहवीं शताब्दी के परिस्थितियों को देखते हुए रचा हो किन्तु ये…

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माँ की याद

माँ की याद ————— तुम याद बहुत आती हो माँ। खुद में तुमकों, तुममें खुद को पाती हूँ, माँ तुम याद बहुत आती हो माँ। आती हैं याद बचपन की। जब बच्चो को करती प्यार डांट और फटकार लगाती, तब तुझको खुद में पाती हूँ माँ। तुम याद———-। हम बच्चों के खातिर, दिन भर करती…

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स्त्री विमर्श के बहाने

स्त्री विमर्श के बहाने स्त्री विमर्श, महिला सशक्तिकरण और वीमेंस लिब यह सब कुछ ऐसे शब्द हैं जिनकी चर्चा आजकल जोरों पर है या दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि आधुनिक समय में सबसे ज्यादा ट्रेंड करने वाले शब्द हैं, जो कि बहुत आवश्यक भी है। महिलाओं पर पुरूषों के राज करने की…

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गुरु महिमा

गुरु महिमा गुरु जन के उपकार बहुत है । गिनती हम नहीं कर पाते ।। पूरा जीवन कम लगता है । उनकी महिमा गाते गाते ।। कोरे कागज जैसे मन पर । गुरु ज्ञान की बात सजाते ।। सच्चा मानव कैसे बनते । पाठ हमें यह रोज पढ़ाते ।। शिखर सफलता के पाने की। राह…

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मूक बलिदान

मूक बलिदान अंग्रेज सेनापति जनरल ‘हे’ आश्चर्य से भर उठे। महल को भस्म कर देने का आदेश उनके होठों तक आकर रुक गया था। महल के बरामदे में एक अत्यंत सुंदर अल्पवयस्क बालिका खड़ी थी। मुखमंडल पर तेज और गाम्भीर्य। अब तक कहाँ थी यह ?पूरा महल तो छान मारा था। कहीं कोई नजर नहीं…

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उमस में भी टिके रहें

  उमस में भी टिके रहें आप बरसात के मौसम को पसंद तो खूब करती हैं, लेकिन इस मौसम में पैदा होने वाली उमस आपको इसलिए पसंद नहीं, क्योंकि वह मेकअप को टिकने नहीं देती. उमस के मौसम में फाउंडेशन मेल्ट हो जाते हैं और आई लाइनर फैल जाता है, वहीं लिपस्टिक चिपचिपे हो जाते…

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बचपन और बारिश

बचपन और बारिश याद आता है मुझको अपना गुज़रा ज़माना वो बारिश का मौसम और बचपन सुहाना स्कूल में रेनी डे होने पर मेरा खुश हो जाना रास्ते में फिर छप छप करते हुए आना छींटे पड़ने पर लोगों का बड़बड़ाना फिर साॅरी बोल मेरा जल्दी से भाग जाना घर आकर बारिश के पानी से…

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महाशिव

महाशिव मेरे दोस्त यह कलयुग है, सतयुग नही आज… यदि शिव भी विषपान करें तो देवता इसे उनकी डिप्लोमेसी कहेंगे किसी गहरे षड्यन्त्र की कड़ी कहेंगे।। आज कौन किसके लिये विष पीता है?? कौन दूसरों का दुख जीता है?? पर तुम दूसरों के हिस्से का विषपान ही नही कर रहे अपने हिस्से का अमृत भी…

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