लॉकडाउन के पश्चात रोजगार और व्यवसाय के नये अवसर
“लॉकडाउन के पश्चात रोजगार और व्यवसाय के नये अवसर” “खेती न किसान को भिखारी को न भीख भली, वनिक को वनिज न चाकर को चाकरी। जीविकविहीन लोग सिद्यमान सोच बस, कहैं एक एकन सो ‘कहाँ जाइ का करी’।।” तुलसीदास ने भले ही ये पंक्तियां सोलहवीं शताब्दी के परिस्थितियों को देखते हुए रचा हो किन्तु ये…