Preserve Environment, Getting Threats On A Daily Basis
Preserve Environment, Getting Threats On A Daily Basis Protection and upkeep of free gift of nature has been a matter of collective responsibility for all of us.Needless to say, threats of varied nature keep emerging in the shape of global warming, sudden volcanic eruptions, drying of river basins, melting of glaciers & ice bergs,landslides, flash…
महिला दिवस के बहाने..
महिला दिवस के बहाने.. तू जिन्दगी का कोमल अहसास है, छुएँ तुझे तो सारा आकाश है, लगती किसी कविता सी, मन के बहुत पास कोई ,अधूरी प्यास हो तुम घर, अंगना दौड़ती ममता की छाँव बनी तुम, माँ हो, प्रिया, बहन, पत्नी, बेटी मेरी, जिन्दगी के टूटते संबंधों में , संजीवनी सी रिश्तों की सांस…
स्त्रीयोचित गुण ही सशक्तिकरण
स्त्रीयोचित गुण ही सशक्तिकरण अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष की तरह 8 मार्च को आ गया | पिछले दिनों भारतीय महिलाओं ने शारीरिक मानसिक ,राजनैतिक आर्थिक सभी दंश झेले हैं | यौन उत्पीड़न का मानसिक त्रास , बलात्कार और घरेलु हिंसा के शारीरिक घाव ,महंगाई की आर्थिक मार , शाहीन बाग़ और दंगों के राजनीतिक…
Life is not easy
Life is not easy As I look at the array of awards and certificates arranged on a table -36 till now with Almighty ‘s Grace , I know deep down that the accolades that come my way are the result of the churning ad battering that my heart underwent after the sudden passing away…
गुरू की महिमा
गुरू की महिमा गुरू हैं ज्ञान के सागर गुरू हैं ध्यान के गागर गुरू में लीन हों मन से तो निखरे सद्बुद्धि का आखर गुरू हैं सरस्वती उपासक गुरू हैं देश के सुधारक गुरू से दीक्षा लें सच्ची तो बनते तम के ये उद्धारक गुरू हैं युग के प्रणेता गुरू हैं कर्म के अभिनेता गुरू…
यू आर माय वैलेंटाइन
यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…
वर दे, वीणा वादिनी वर दे !
वर दे, वीणा वादिनी वर दे ! अहं रुद्रेभिर्वसुभिश्चराम्यहमादित्यैरुत विश्वदेवैः। अहं मित्रावरुणोभा बिभर्म्यहमिन्द्राग्नी अहमश्विनोभा॥ (ऋग्वेद 10/ 125) मैं (वाग्देवी) रुद्रों (प्राणतत्त्व, एकादश रुद्र), वसुओं (पृथ्वी आदि आठ वसुओं), आदित्यों (बारह आदित्य सूर्य) तथा विश्वेदेवों (सभी देवों, सभी दिव्य विभूतियों) के रूपों में विचरण करती हूँ। मैं मित्र और वरुण (सौरतत्त्व और जलीय तत्त्व) तथा इन्द्र…
पर्यावरण में फिर से हरा रंग भरें
पर्यावरण में फिर से हरा रंग भरें आओ मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को हम हरित करें, इस बेरंग होते पर्यावरण में फिर से हरा रंग भरें। ग्लोबल वार्मिंग जो हो रहा भूमंडल नाशक है, पेड़ों के काटने से जो बनी स्तिथी नाजुक है. आओ मिलकर कोई उपाए हम त्वरित करें, इस बेरंग होते पर्यावरण में फिर…