Be positive …The Gita

Be positive …The Gita Many pandemics have come and gone wreaking havoc on humanity. It is the choices we as civilizations have made that has brought on these calamities on ourselves. From 1918, the influenza type pandemics started. Remember the H1N1 pandemic in 1918 followed by years of pandemics in 1957,1968, 1977 the Spanish flue,…

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ईमानदार कोशिश करें

ईमानदार कोशिश करें आजादी के सत्तर साल बाद भी हम कई परेशानियों से जूझ रहे हैं ।सपने में भी जिसके बारे में हम सोचना नहीं चाहते, उस से दो -चार होना पड़ रहा है । दीमक की तरह चाट कर देश को खोखला करने वाली बुराइयाँ हमारे खून में रच-बस गयी हैं ।इनसे निजात पाना…

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नारी का अस्तित्व

नारी का अस्तित्व हां मैं भी चाहती हूँ अपनी पहचान बनाना! चाहती हूँ अपना अस्तित्व स्थापित करना! ढूंढती हूँ हर गली,हर मोड़ पर! अपने अतीत में, मैं कौन हूँ? मैं कौन हूँ? मैं कौन हूँ…..?? कभी बेटी,,,कभी बहन,… कभी बहु और कभी पत्नी,.. ना जाने कितने नामों से मैं पहचानी जाती हूँ! पर ढूंढती हूँ…

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तैयारी परीक्षा की 

तैयारी परीक्षा की आज केे इस प्रतिस्पर्धात्मक और महत्वकांक्षी युग में परीक्षा का महत्व और दबाव इस प्रकार बढ गया है कि बच्चे ही नहीं बल्कि पूरा घर परिवार भी परीक्षा की तैयारी में जुट जाता है। अगर बोर्ड की परीक्षा हो तब तो मानो पूरे घर मे ही कर्फ्यू लग जाती है। माँ पापा…

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खुसरो दरिया प्रेम का…

खुसरो दरिया प्रेम का… हर जानी-अनजानी, प्रेम कहानी, तुम जानो या मैं जानूँ की तर्ज पर एक निजी कहानी है। हर दार्शनिक, हर कवि, हर व्यक्ति ने इसे अपनी तरह से सुलझाने की कोशिश की है, समझना चाहा है। क्या है आखिर कई कई अहसासों से भरा यह सतरंगी प्रेम? महज एक आकर्षण जो ईर्षा,…

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मैट्रिमोनियल

    मैट्रिमोनियल ‘ हैलो जी, मैं अरवी का पिता चेतक अरोरा। आपके बेटे की प्रोफाइल देखी है। आप मेरी बेटी की प्रोफाइल देखी लीजिए।’ ‘जी! अभी देखती हूं।’ सरुना तुरंत अरवी की प्रोफाइल देखने लगी। जिसमें लड़की का नाम, जन्म तारीख, जन्म समय, जन्म स्थान के साथ-साथ लड़की की ऊंचाई, रंग-रूप, प्राप्त शिक्षा और…

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कटहल

कटहल राम प्रसाद जी का परिवार बनारस शहर के प्रसिद्ध रामघाट पर गंगा जी के किनारे स्थित पक्का महाल सिंधिया हाउस के पुरानी हवेली के दो कमरों में किराए पर रहते थे।उनके परिवार में पत्नी बेटा ,बहू तथा छोटा नाती कुल पांच लोगों का परिवार था।उस समय लोगों में बहुत एकता,प्रेम, भाईचारा व अपनापन हुआ…

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श्रम शक्ति

श्रम शक्ति मज़दूर हूँ, मजबूर नहीं मेहनत करता हूँ, क़सूर नहीं पेट मेरी भी भरे और सबकी.. फिर कहाँ शिकायत, किसी से हुज़ूर है… मज़दूर हूँ, मजबूर नहीं….. मेहनत करता हूँ, क़सूर नहीं…. भूख से लड़ता, प्यास से लड़ता सर्दी गर्मी और बरसात से लड़ता हालात से लड़ता, ज़ज़्बात से लड़ता लड़ता धूल, मिट्टी और…

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