लौट आया मधुमास

लौट आया मधुमास देविका कहीं शून्य में घूरे जा रही थी लेकिन मस्तिष्क में लगातार उथल-पुथल चल रही थी। आज हर हालत में उसे एक निर्णय पर पहुंचना था। पिछले कई दिनों से वह अनवरत दिल और दिमाग के संघर्ष में बुरी तरह फंसी थी,उलझी थी….पर अब…अब और नहीं।कहीं दूर से आती माँ की आवाज़…

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वास्तविक आजादी से दूर

  वास्तविक आजादी से दूर हम भारतवासी पिछले 70 वर्षों से आज़ादी की खुशफ़हमी में जरूर जी रहे हैं, परन्तु क्या वास्तव में हम स्वछन्द, स्वतन्त्र और निर्भीक जीवन बिता पा रहे हैं। आज भी देश का एक बड़ा वर्ग जीवन के मूलभूत आवश्यकताओं, जैसे, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्याप्त सन्तुलित आहार इत्यादि से भी वंचित है।…

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एंटी रेप एक्ट

एंटी रेप एक्ट नया एंटी रेप एक्ट पर राष्ट्रपति की मंजूरी की मोहर लगते ही महिलाओं के साथ होने वाले हर तरह के अपराधों के लिए कड़ी सजाएँ तय हो गई हैं। सुधार के बाद इस विधेयक को पारित किया गया है ।एंटी रेप कानून ने आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 2013 के रूप में अपनी…

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प्रेम रंग

प्रेम रंग तोड़ देंगें सभी दीवार नफ़रतों वाली होगी खुशियों की बौछार रंगों वाली रंग में अपने रंग लेंगे हम बहाने इसी तेरा चेहरा मेरा गुलाल होगा साथी नफ़रतों को जहाँ में और अब मत बांटो अपनी शाखों को तरू से अब मत काटो जीतना ही है तो जीत लो दिलों को तुम लहू से…

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बारिश

बारिश!! शनिचरी को बारिश पसंद नहीं है! ये बुड़बक बारिश जब -जब आता है। वह खेत खलिहान घूमने नहीं जा पाती है। शनिचरी को बारिश पसंद नहीं है! मे मे करती उसकी सभी..बकरियाँ घर वापस आ जाती हैं बस एक झोपड़ी है फूस की उसमें वह रहेगी या उसकी बकरियाँ शनिचरी को बारिश पसंद नहीं…

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पिता

पिता पिता एक शख्स नही संस्कार आदर्श मयार्दा धर्म सहनशीलता की परिभाषा है पिता रामायण कुरान बाइबिल गुरुग्रंथ गीता का ज्ञान भरा भंडार हैं पिता जीवन के संघर्ष में कभी न हारने का संदेश देते है अँधेरे तो क्या हुआ रौशनी को तु तलाश कर यही सिखलाते हैं पिता पिता होते हैं बरगद की छाँव…

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होली जोगीरा

होली जोगीरा आयो है मधुमास, छायो है प्रभास, सुरभित है उपवन, अली करे रसपान, बजाकर बांसुरी सी तान, मैं कैसो करूं बखान, जोगीरा सा रा रा रा…. जोगीरा सा रा रा रा…. पधारे ब्रज में अनंग, देखन को रास रंग, गोपीयन के अंग, थिरकत हैं श्याम संग, हर्षित वृंदावन धाम, मैं कैसो करूं बखान, जोगीरा…

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वजूद

वजूद सच में! आज का दिन ही खूबसूरत था, चमचमाता सूरज, ताज़ी हवा, चहकते पंछी, सुबह सुबह चाय पीकर, जल्दी से नहाने चल दी ‘किरण’। आज कुछ जल्दी भी उठ गई वह या यूं कहो की रात बस करवट बदल बदल कर काटी। आज उसके काम का पहला दिन था कितना कुछ चल रहा था…

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बाजीगर

बाजीगर बैठी हूं आसमान तले सामने लहरों का बाजार है , उन्मादीत लहरों के दिखते अच्छे नहीं आसार हैं । अब उफनाती लहरों से कह दो राह मेरी छोड़ दे, बैठी हूं चट्टान बनकर रुख अपना मोड़ ले । ज्वार भाटा से निकली प्रचंड अग्नि का सैलाब हूं, हैवानियत को जलाकर खाक करने वाली आग…

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