आवाज़ दो हम एक हैं !

आवाज़ दो हम एक हैं ! भौगोलिक सीमाओं से घिरे ज़मीन के टुकड़ों से सिर्फ देश निर्मित होते हैं। देश कोई भी हो, स्थायी नहीं होता। समय के साथ उसकी सीमाएं,उसका स्वरुप बनता और बिगड़ता रहता है। अपने ही देश का इतिहास देखिए तो इसका आकार और इसकी सीमाएं लगातार परिवर्तित होती रही हैं। असंख्य…

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आतंक

आतंक घर के कोने में पड़ा मकड़े का जाला,देता है गवाही, कि वर्षों से यह मकान खाली पड़ा है, आस पास के दीवारों पर पड़े खुन के छींटे, धूल की मोटी परतों के बावजूद, उसे साफ़ – साफ़ दिख पा रहे हैं। नन्हीं गुड़िया सी वह, चैन की नींद सो रही थी, अपने नर्म गर्म…

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गैंग्रीन

गैंग्रीन सौम्या और केशवी – कॉलेज की दो घनिष्ट सहेलियां विवाह के करीब बीस वर्षों पश्चात एक दूसरे से टकरायीं । गले मिलीं, बड़ी खुश हुईं , अलग अलग शहरों में रहने की वजह से इतने वर्षों में मिलना ही नहीं हुआ । आज इतने वर्षों बाद अचानक मॉल में टकरा गयीं..दोनों ही चालीस पार…

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रंगों की बरसात

रंगों की बरसात होली के त्यौहार की, अजब निराली बात पिचकारी से हो रही, रंगों की बरसात फागुन आया साथ ले, रंगों का त्यौहार अंग अंग पड़ने लगी, पिचकारी की धार भोर सुंदरी गाल पर, मलने लगी गुलाल धरती दुल्हन सी सजी,अंबर हुआ निहाल पड़े ढोल पर थाप तो, गाये मेघ मल्हार हवा बाँचती पातियाँ…

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प्रेमचंद जयंती

कलम के सिपाही हिंदी साहित्य के सम्राट, प्रगतिशील विचारों के पुरोधा,युगद्रष्टा और कलम के सच्चे सिपाही मुंशी प्रेमचंद जी को शत शत नमन।बेहद ही साधारण देखने वाले प्रेमचंद का व्यक्तित्व अत्यन्त अद्वितीय था।गृहस्वामिनी उनके 139वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करती है ।   साहित्य-गगन का चाँद साहित्य-गगन का चाँद विहंसता है अम्बर में, और धरा…

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चाँद जाने कहाँ खो गया

चाँद जाने कहाँ खो गया ग़ुल खिले और कलियाँ हँसीं,बाग फिर ये जवां हो गया तितलियों की जो देखी अदा भँवरों को फ़िर नशा हो गया तेरे होठों ने कुछ न कहा , मुझसे भी तो कहा ना गया। क़िस्सा तेरे मेरे इश्क़ का ख़ुद ब ख़ुद ही बयां हो गया।। एक अहसान मुझ पे…

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तुम लौट आओ

तुम लौट आओ हे बुद्ध तुम लौट आओ क्योंकि तुमने कहा था “ईर्ष्या या घृणा को प्रेम से ही खत्म किया जा सकता है” पर असंवेदनशील आत्माओं के साथ जी रही मानव जाति भूल चुकी है किसी से भी निःस्वार्थ प्रेम करना लौटकर अब तुम प्रेम क्या है इन्हें फिर से याद दिलाओ हे बुद्ध…

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गृह दाह

गृह दाह हिंदी साहित्य के एक आधार स्तभं और अभिन्न अंग के रूप में मुंशी प्रेमचंद की ख्याति केवल भारत ही नहीं अपितु विश्व भर में फैली है। अपने सरल, सहज और स्वाभाविक लेखन से उन्होंने जनमानस के हृदय पर भारत के समाज ,उसके संस्कार , रिवाजों , आदर्शों के साथ – साथ भावपूर्ण कथाओं…

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उगादि : एक नई शुरुआत

उगादि : एक नई शुरुआत “उगादि’ या ‘युगादि’ कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं महाराष्ट्र का बहुत अनूठा त्यौहार है। महाराष्ट्र में इसे ‘गुड़ी पर्व के नाम से जाना जाता है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के सभी क्षेत्रों में मनाया जाने वाला यह त्यौहार चैत्र (चैत) माह के शुक्ल पक्ष के पहले दिन मनाया जाता…

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दिव्या माथुर: मेमेन्तो मोरी

दिव्या माथुर: मेमेन्तो मोरी ब्रिटेन में रहने वाली प्रवासी भारतीय हिन्दी लेखक सुश्री दिव्या माथुर से हमारी पहली मुलाक़ात सितम्बर 1999 में हुई थी, जब मैं मास्को विश्वविद्यालय में संस्कृत के प्रोफ़ेसर बोरिस जाखारयिन के साथ छठे विश्व हिन्दी सम्मेलन में भाग लेने के लिए लन्दन गई थी। दिव्या जी ने बड़ी हार्दिकता के साथ…

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