गणेश कौन हैं ?

गणेश कौन हैं ? तमाम काल्पनिक देवी-देवताओं और अंधविश्वासों के बीच भी हमारे पुराणों में ऐसी कुछ चीजें हैं जो अपनी दृष्टिसम्पन्नता और सरोकारों से चकित करती हैं। शिव और पार्वती के पुत्र गणेश पुराणों की ऐसी ही एक देन हैं। अपने पिता की तरह गणेश प्रकृति की शक्तियों के विराट रूपक है। उनका मस्तक…

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लक्ष्मी 

    लक्ष्मी    बहुत प्यार करता था घनश्याम अपनी नई नवेली दुल्हन लक्ष्मी से और क्यों न करे, लक्ष्मी थी ही सर्वगुण – सम्पन्न। एक तरफ तो सास – ससुर का मान सम्मान रखती,मन भर सेवा करती तो दूसरी तरफ पूरे गांव में पहली मैट्रिक पास बहु थी ,पूरा गांव उसका आदर करता था।…

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लौट आया मधुमास

लौट आया मधुमास देविका कहीं शून्य में घूरे जा रही थी लेकिन मस्तिष्क में लगातार उथल-पुथल चल रही थी। आज हर हालत में उसे एक निर्णय पर पहुंचना था। पिछले कई दिनों से वह अनवरत दिल और दिमाग के संघर्ष में बुरी तरह फंसी थी,उलझी थी….पर अब…अब और नहीं।कहीं दूर से आती माँ की आवाज़…

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प्रेमचंद – कलम के महान सिपाही

प्रेमचंद – कलम के महान सिपाही प्रेमचंद (31 जुलाई 1880 – 8 अक्टूबर 1936) हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक थे । आनन्दी देवी तथा मुंशी अजायबराय के घर ३१ जुलाई १८८० को बालक धनपत राय का जन्म हुआ जो कालांतर में प्रेमचंद, नवाब राय और मुंशी प्रेमचंद के नाम से…

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मानवता की देवी-डोरोथिया डिक्स

मानवता की देवी-डोरोथिया डिक्स डोरोथिया डिक्स एक ऐसी महिला थी जिसने अपने समय में मानसिक बीमारों के सुधार के लिए बहुत कुछ किया। उन्होंने अपने जीवन के लम्बे समय में लोगों की मदद करने के लिए अपनी ताकत और सामाजिक संवेदनशीलता का उपयोग किया। उन्होंने एक समय में बताया था कि वे किसी भी व्यक्ति…

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सच में ‘दुर्गा’ थी इंदिरा !!

सच में ‘दुर्गा’ थी इंदिरा !! वो पर्वत राजा की बेटी ऊंची हो गयी हिमालय से जिसने भारत ऊंचा माना सब धर्मों के देवालय से भूगोल बदलने वाली इतिहास बदलकर चली गई जिससे हर दुश्मन हार गया अपनों के हाथों वो ‘इंदिरा’ छली गई… -हरिओम पंवार इंदिरा गांधी दृष्टिसम्पन्न, ऊजार्वान,तेजस्वी, आत्मविश्वासी और प्रगतिगामी नेता थीं।…

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अमीना का चूल्हा

अमीना का चूल्हा बंगाल की खाड़ी के तटवर्ती इलाके का एक छोटा सा गांव है गोलाखाली। नारियल, सुपारी और सुंदरी वृक्ष से सजे इस गांव में कुल मिलाकर छत्तिस घर बसा है । यहां के ज्यादातर लोग मछुआरे हैं जो निम्न वित्तीय श्रेणी में आते हैं। गांव के पश्चिम छोर के अंत में एक झोपड़ी…

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कविता का साधक हो जाना

कविता का साधक हो जाना “जीवन का सुख-दुःख, यश-अपयश, सहज धीर होकर अपनाना, सबसे दुष्कर है जीवन में, कविता का साधक हो जाना..!! कौन भला झेले जीवन में, चिंताओं की अनहद ढ़ेरी, कौन भला चाहे आँखों में, सपनों के शव, पीर घनेरी, लेन देन के वणिक जगत में, कौन भला स्वीकार करेगा, जनमानस की तनिक…

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