अच्छा लगता है
अच्छा लगता है सुनो न , बहुत दिन से कुछ कहना है तुमसे! पर उस बात का ज़ायका मुँह में घुलता है कुछ इस तरह, वो बात कह ही नहीं पाती । सुनो तो….. तुम अच्छे लगते हो अब ये मत पूछना क्यों : इन फैक्ट मेरी बात पूरी होने दो पहले फिर कुछ भी…
अच्छा लगता है सुनो न , बहुत दिन से कुछ कहना है तुमसे! पर उस बात का ज़ायका मुँह में घुलता है कुछ इस तरह, वो बात कह ही नहीं पाती । सुनो तो….. तुम अच्छे लगते हो अब ये मत पूछना क्यों : इन फैक्ट मेरी बात पूरी होने दो पहले फिर कुछ भी…
करवा चौथ का चाँद आया देख सखी दूर हुआ तमस मन कमल खिला उद्गार संग घिरी थी कालिमा चहुँ ओर नभ दमके सखी चाँद आया खिल रहा था चाँद हर माह निराशा भय का जैसा प्रहर अद्भुत ज्योति है हटा धुंध करवा चौथ का चाँद आया चाँदनी की ओढ़नी लहराते नयन खिले स्निग्ध मुस्कान अमृत…
ममता कालिया- एक कवयित्री के रूप मे ममता कालिया का नाम यूं तो गद्य लेखन में अधिक है परंतु उन्होंने अपनी रचनाएंं कविताओं से ही आरंभ की थीं। ममता कालिया की पद्य रचनाएं भी उनकी गद्य रचना के समान ही विशिष्ट हैं। पेश हैं वाणी प्रकाशन की किताब ‘पचास कविताएं’ में छपीं उनकी कविताओं में…
स्वराज एवं एक भाषा के हिमायती – महर्षि दयानन्द सरस्वती महर्षि दयानन्द सरस्वती के बारे में जब चिन्तन करने लगते है तो सामान्य मनुष्य अथवा महापुरूषों के व्यक्तित्व व कृतित्व के समान चिन्तन तो करना ही होता है किन्तु यहां पर एक विशेष चिन्तन की गहनता दिखती है, जो उनका ‘ऋषित्व’ होता है। गुजरात के…
बिन पानी सब सून (जल संचय: एक परिचर्चा) “रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून’- पानी रोमांस भी है, रोमांच भी है। पानी के बिना जीवन की कोई कहानी संभव नही है। मंगल ग्रह पर जीवन ढूँढ़ने निकले वैज्ञानिक भी पानी की ही तलाश कर रहे हैं। पानी यानि जीवन की अमूल्य धरोहर और जीवन…
” कोरोना महामारी “ है डरा संसार महामारी कहे कोरोना निकृष्ट उपाय खोजे टीका विज्ञान है मुँह ढ़कना दूरी रख सुरक्षा कर स्वयं परिजन शत्रु बना कोरोना है रोग विकट संक्रमण ज्वर खाँसते हाँफते विकल कोरोना सावधान है विश्व चिंतित कैसे करें रक्षा इससे मानव जीवन हताशा ये कोरोना है कर्म सेवा ही चिकित्सक जुझ…
कैसे कहूं चहूं दिशा में गुणगान करु ममता तेरी भावों में मैं बांध नहीं पाती मां तुम मेरे लिए क्या हो कैसे बतलाऊ चाहकर भी मै शब्दों में ढाल नहीं पाती समय चक्र पर बैठे देखा है हरदम तुमको सबकी खुशियों को गढकर प्रेम ही भरते देखा खुद को मिटाकर हमे कामयाब बनाने जुनून तेरी…
सूरदास हिंदी – उर्दू साहित्य के विराट नभ पर दिवाकर सा दैदीप्यमान एक नाम – मुंशी प्रेमचंद । प्रेमचंद एक ऐसे कथाकार थे जिन्होंने साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाते हुए , अपनी कहानियों और उपन्यासों में किसानों, दलितों, श्रमिकों की दयनीय स्थिति का और स्त्री शोषण का मार्मिक चित्रण किया । उनकी…