मिट्टी की मूरतों में देवी की खोज

‘मिट्टी की मूरतों में देवी की खोज’ इंसान की विनम्रता है कि पंचतत्त्वों से निर्मित अपने शरीर को वह मिट्टी मानता है,अपने आराध्यों की कल्पना भी वह मिट्टी से ही साकार करता है,किंतु इन मूर्तियों के लिए मिट्टी एकत्रित करना खासा मुश्किल भरा काम है। नवरात्र में जगतजननी मां दुर्गा की मूर्ति के लिए दस…

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Holy lamentation- PIETA

Holy lamentation- PIETA The heavy and embarrassed look imprisons the sadness of the moment The mourning of life The Holy Virginity captivates and invites The inanimate Divine Body completely surrendered looks eternally youthful perpetually moving The pain of the soul overflows and the Heavenly Kingdom receives the only truth crowning with glory our passions and…

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माँ.. ममत्व और मातृत्व

माँ.. ममत्व और मातृत्व परमपिता ने हर रूह में बसाया मातृत्व भाव… अहो, पर जगत में आज बंधु ममता का देखो कैसा है अभाव.. कि मानव मानव के ही खून का बन बैठा है प्यासा देखो देखो तो जाकर के पाओगे हर मां का कलेजा दिन रात है फटता, आत्मा से निकलती चित्कार, आह चेहरा…

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छठ पर्व

छठ पर्व ये छठ पूजा जरुरी है धर्म के लिए नहीं, अपितु.. हम-आप सभी के लिए जो अपनी जड़ों से कट रहे हैं। अपनी परंपरा, सभ्यता, संस्कृति, परिवार से दूर होते जा रहे हैं। ये छठ जरुरी है उन बेटों के लिए जिनके घर आने का ये बहाना है। ये छठ जरुरी है उस माँ…

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World environment day/nachiket parmar

  इस  चित्र को बारह वर्षीय  नचिकेत परमार ने बनाया है जिस में उन्होंने बेहद खूबसूरत, स्पष्ट और  सार्थक संदेश के साथ  चेतावनी भी दिया हैं। नचिकेत परमार विश्व पर्यावरण दिवस विध्वंसक नही संरक्षक बने समस्त ब्रह्माण्ड मे खरबो खरबो मिलों तक फैले आकाशगंगा मे जीवन का नमोनिशान नहीं न उपस्थित प्राणवायु न ही जल…

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सावन महोत्सव

विजया गार्डन में वीमेंस ग्रुप द्वारा 2 अगस्त को विजया गार्डन क्लब हाउस में सावन महोत्सव का प्रोग्राम रखा गया जिसमें सावन क्वीन प्रतियोगिता एवं विभिन्न प्रकार के गेम, गीत-संगीत का आयोजन किया गया ।कार्यक्रम का संचालन अंजली और श्वेता पटनायक ने किया।वहीं जज की भूमिका में जिला परिषद अध्यक्ष बुलू रानी सिंह,  संपादक अर्पणा…

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श्रद्धांजलि

वह कैसे नवयुवक थे जिन्हें चाहिए थी आजादी हर हाल में हर कीमत पर उन्हें चाहिये थी आजादी वह दूसरो युवकों से थे अलग नायको में नायक थे जिन्हें चाहिए थी हर हाल में हर कीमत पर आजादी उनकी चाहत न कोई हीर थी न लैला उनकी चाहत थी हर हाल में हर कीमत पर…

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समय

समय आदिकाल से भविष्य का चक्र। हर होने से, न होने का नियम, जो है उसके ख़त्म होने का संयम । अदि, अंत, अनंत। देव, मानव,पाताल लोक का विभाजन, सागर मंथन भेद से सर्व लोक समीकरण ।। युग निर्माण, समाज परिवर्तन । सत्य,त्रेता, द्वापर से कलि का बदलाव, रामराज्य में सीताहरण, कलि में सती का…

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उम्मीदें अभी बाकी हैं

उम्मीदें अभी बाकी हैं जितनी तेजी से मानव सभ्यता का विकास हुआ है, उतनी ही तेजी से प्रकृति और प्रदत प्राकृतिक संसाधनों का दोहन। शोध और अध्ययन भी अनवरत जारी हैं और सामने आने वाले निष्कर्ष कई बार चिंता और डर से युक्त परिस्थिति पैदा कर रहे हैैं। वैश्विक तापमान में वृद्धि एक बड़ी समस्या…

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