भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- मनीराम दीवान

मनीराम दीवान अठारहवीं शताब्दी में अंग्रेज चाय चीन से खरीदते थे। मगर उनकी व्यापार में बेईमानी और लाभांश पर सौ प्रतिशत कब्जा चीन को नष्ट किये दे रहा था। अतः एक बड़ा युद्ध हुआ जिसमे चीन ने अंग्रेजों को चाय देने से इंकार कर दिया।जिससे उनका चीन की चाय पर से एकाधिकार जाता रहा।उधर अमेरिका…

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गणतंत्र का सबसे मजबूत अस्त्र शिक्षा

गणतंत्र का सबसे मजबूत अस्त्र शिक्षा 72 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर विशेष शुभकामनाएं। 21वीं सदी का पहला गणतंत्र, युवा भारत के सपनों का गणतंत्र, अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बनाता, राज करता भारतीय गणतंत्र, जन गण मन तक राष्ट्रीयता के संदेश पहुंचाता गणतंत्र । हमारी शैक्षणिक विरासत पर हमें गर्व है…. नालंदा तक्षशिला…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन   मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी…

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मेरी पीढ़ी का सच

मेरी पीढ़ी का सच कहा जाता है एक व्यक्ति अपने जीवन में पाँच जीवन जीता है,देखता है और समझता है।दादा-नाना से लेकर नाती- पोते तक पर सबसे अधिक लगाव मनुष्य को अपनी पीढ़ी से ही होता है। देश की स्वतंत्रता के वे प्रारंभिक दिन थे।बचपन उसका भी था और मेरा भी।उत्साह और उमंग से भरे…

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फूलों की वर्षा

फूलों की वर्षा सुबह-सुबह प्रधानमंत्री की घोषणा सुनाई दी- “कल हैलीकाप्टर से सिंगापुर का झंडा फहराया जाएगा और नर्सों-डाक्टरों पर फूलों की वर्षा की जाएगी।” घोषणा सुनकर “टियन” तिलमिला उठी…अभी तो उसे देश भर के अस्पतालों और क्मयूनिटी केयर सेंटरस के लिए कितनी सारी चीजों की ज़रूरत है! यह क्या नौटंकी सूझी है सरकार को?…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- सावित्रीबाई फुले

सावित्रीबाई फुले महाराष्ट्र के सतारा जिले के नयागांव में एक दलित परिवार में 3 जनवरी 1831 को जन्‍मी सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका थी। इनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे और माता का नाम लक्ष्मी था। सावित्रीबाई फुले शिक्षक होने के साथ भारत के नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता, समाज सुधारक और…

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सपनों का भारत

सपनों का भारत भारत अथवा हिंदुस्तान का नाम सामने आते ही ऐसे देश की कल्पना साकार हो उठती है जो अपनी प्राकृतिक संपदा, नैसर्गिक सौन्दर्य एवम अथाह धन धान्य से परिपूर्ण है। अपनी सांस्कृतिक विरासत एवम ज्ञान के अकूत भंडार से मालामाल है । अपनी शांतिप्रियता एवम वसुदेव कुटुम्बकम की अति प्राचीन धरोहर का पालन…

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नया सूरज

नया सूरज चारों तरफ है फैला अनजानी आशंकाओं का घना कोहरा रुक गया जीवन बंदिशों के घेरे में आओ गढ़ें एक नया सूरज जिसकी रश्मियों के तेज में हो जाए भस्म सभी डर न रहे कोई बेटी अजन्मी रात के अंधेरे में कुचलने से बच जाए सुनहरी धूप न मसल पाए कोई उभरती कली को…

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एक सशक्त कथा ‘पंच परमेश्वर ‘ : आज भी सामयिक

एक सशक्त कथा ‘पंच परमेश्वर ‘ : आज भी सामयिक ” हमारी सभ्यता, साहित्य पर आधारित है और आज हम जो कुछ भी हैं, अपने साहित्य के बदौलत ही हैं।”- यह उद्गार है महान साहित्यकार प्रेमचंद का, जो उनकी रचनात्मक सजगता और संवेदनशील साहित्यिक प्रेम को दर्शाता है। प्रेमचंद हिंदी साहित्य का एक ऐसा नाम…

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