अयोध्या की स्थापना

अयोध्या की स्थापना अयोध्या जिसे साकेत और राम नगरी भी कहा जाता है, भारत के उत्तर प्रदेश में स्थित है। इसका ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व अवर्णनीय है। इतिहास में इसे कौशल जनपद भी कहा जाता था। अयोध्या कौशल राज्य की प्रारंभिक राजधानी थी । गौतम बुद्ध के समय में कोशल के दो भाग हो गए…

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विस्मृति के गर्भ से: रानी रासमणि

विस्मृति के गर्भ से: रानी रासमणि याद कीजिए उन्नीसवीं सदी के मध्य को। भारत का गौरव विदेशी शक्तियों द्वारा रौंदा जा चुका था। समाज गरीबी और जहालत में डूबा हुआ था। समाज तमाम कुरीतियों, अंधविश्वास में आकंठ डूबा हुआ था। वर्ग, जाति और लिंग का विभाजन बहुत स्पष्ट और क्रूर था। समाज पूरी तरह पुरुषसत्ता…

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मां शारदे

मां शारदे जय मां शारदे,हे मां शारदे, हम सबको शुभ वर दे, विद्या का असीम भंडार भर दे, गागर में सागर भर दे, तू तो ज्ञान का रुप है, अज्ञानता का अंधकार मिटा दे, जीवन को सार्थक कर दे, हम सब सुंदर सृजन करें, संस्कारों से शोभित कर दे, विद्या का वरदान दे, तूने ही…

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उत्तराखंड की दिवाली

उत्तराखंड की दिवाली वर्षों तक उस बैलों की जोड़ी के कंधों पर हल रखकर खेत जोते गए। खेती में दिन-दूनी रात चौगुनी उन्नति होती गई। अपने साथी ग्वारा के साथ ही बुल्ला भी उस घर के लोगों की जान था। लेकिन एक दिन जंगल से घास चरकर लौटते समय बुल्ला की आंख में किसी पेड़…

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पंगा: जीवन का व्यर्थता बोध

पंगा: जीवन का व्यर्थता बोध ‘यह हीनता, अपर्याप्तता और असुरक्षा की भावनाएँ हैं जो व्यक्ति के अस्तित्व के लक्ष्य को निर्धारित करती हैं।’ – एल्फ़्रेड एडलर ‘नया ज्ञानोदय’ के जुलाई २००८ में प्रकाशित दिव्या माथुर की कहानी ‘पंगा’ पहले भी पढ़ी थी, अच्छी लगी थी। दोबारा पढ़ते हुए उसके कुछ अनछूए पहलुओं पर ध्यान गया।…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- धोंडो केशव कर्वे

महर्षि धोंडो केशव कर्वे आजादी की आकांक्षा लिए संपूर्ण हिंदुस्तान अपने जीवन और स्वप्नों की आहुति देने के लिए कृत संकल्प था। हालांकि भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की अगुवाई करने वाले राष्ट्र नायक यह भली-भांति जानते थे कि यह लक्ष्य न सिर्फ़ वृहद हैं अपितु तब तक अधूरा है जब तक जन-जन तक जागरूकता की लहर…

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माँ तू अनमोल है

माँ तू अनमोल है न जाने कितनी ही बार लड़खडाते कदमो को संभाली होगी माँ न जाने कितनी ही बार गिरने से बचाई होगी माँ न जाने कितनी ही बार गोद में लेकर थपकी दी होगी माँ न जाने कितनी ही बार कितने जतन की होगी मेरी हंसी खुशी के लिए माँ न जाने कितनी…

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लघुकथा- माँ के साथ फोटो

लघुकथा- माँ के साथ फोटो बड़ा ही अजीब आदमी है हमारा बॉस। अभी पिछले साल ही ट्रांसफर होकर आया था। उसका हर काम ही अलग निराला होता है, जाने कहाँ से उसे क्या विचार आ जाते हैं, बड़ी IIM से MBA करके आया हुआ है, उसकी नियुक्ति,ऑफिस में कर्मचारियों में बढ़ते हुए डिप्रेशन को कम…

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लैंगिक समानता और सशक्तिकरण

लैंगिक समानता और सशक्तिकरण सभी महिलाओं को आवश्यक रूप से नारीवादी नहीं होना चाहिए और सभी नारीवादियों को जरूरी नहीं कि महिलाएं हों। पितृसत्तात्मक सामाजिक योजना में, यह वास्तव में बहस का मुद्दा है कि क्या नारीवाद एक महिला का अंतिम गढ़ है या अस्तित्व के लिए उसकी प्राथमिक स्थिति है। हालांकि, इस बात से…

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छमहु नाथ अवगुण मोरे

छमहु नाथ अवगुण मोरे हर कहानी को कोई सुनने वाला होना चाहिए। मैं यह कहानी इसीलिए लिख रही हूँ क्योंकि मैं जबसे पूर्णिमा से मिली, मैं उसके जज्बे की कायल हो गई। उसकी कहानी में शक्ति है, संदेश है और एक सीख भी। नैतिकता के प्रश्न को मैंने छुआ ही नहीं। पूर्णिमा मुझे एक दुकान…

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