” माँ बेटी – रिश्ता एक अनन्य शक्ति का  “

” माँ बेटी – रिश्ता एक अनन्य शक्ति का  “ ब्रिटेन के खूबसूरत पहाड़ी गांव में आज  प्राकृतिक रोष तो एक  जोरदार तूफान और बारिश के रूप में कहर ढा ही रहा था लेकिन राडु के घर में भी भूचाल और जलजले से कम वातावरण नहीं था। नन्ही बालिका जिया की जन्म से परिवार में…

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पूर्ण स्वराज के प्रणेता

पूर्ण स्वराज के प्रणेता “मरण” और “स्मरण”- इन दो शब्दों में यों तो “स्” अक्षर का ही अंतर है, परन्तु, इस छोटे से शब्द को कमाने के लिए जीवनपर्यंत लोकहित और आदर्शवादी विचारधाराओं पर चलना पड़ता है,जिसके महत्वपूर्ण उदाहरण हैं, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक।1अगस्त,2020 को उनके पुण्यतिथि की शताब्दी मनायी गयी।बहुआयामी प्रतिभा के धनी लोकमान्य…

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अहमियत

अहमियत नाजों से पली मधु को शादी से पहले इस बात की भनक तक न थी कि शादी के बाद जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा l संयुक्त परिवार की बेटी मधु के आँखों में आँसू देख उसके बड़े ताऊ आसमान सिर पर उठा लेते थे l इसलिए परिवार के सभी बच्चे मधु…

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यह कहानी है विषाणु और विज्ञान की

यह कहानी है विषाणु और विज्ञान की इस समय सम्पूर्ण विश्व एक अदृश्य मौत के खौफ़ के साये में जी रहा है। दुनिया भर में 4,820,959 से अधिक लोग संक्रमित हैं व एक अनुमान है कि 3,188,765 से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है एक वायरस जिसे नाम दिया गया है कोविड-19 या कोरोना।…

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मेरे प्रिय तुम गुलाब हो!

मेरे प्रिय तुम गुलाब हो! नेहरू के कोट से चलकर, प्रियतमा के जूड़े में अठखेले, रंग बिरंगे चाहे जितने हो, पर, सुर्ख लाल में हो अलबेले, मादकता की तुम हो परिभाषा, तुम सुहाग सेज की अभिलाषा, मेरे प्रिय तुम गुलाब हो! हो न ! सुधा गोयल ‘नवीन’ 0

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एक अलग सा सावन

एक अलग सा सावन अब के सावन बारिश कुछ अलग सी फुहार लेे आई है बिरह से सींची बूंदों को बहने से अखियां न रोक पाई है न खिल रही इन हाथो में मेहंदी की लाली न दील के बगीचे में सजती कदंब की डाली हरी चूड़ियां आजकल गुमसुम सी है रहती न जाने उसकी…

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दिव्या माथुर की रचनाओं पर प्रतिष्ठित लेखकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

दिव्या माथुर की रचनाओं पर प्रतिष्ठित लेखकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं दिव्या की कहानियों में एक तरफ़ औरत की परजीविता और यथस्थिति का यथार्थ है तो दूसरी तरफ़ संस्कार जनित संवेदनाएं। उनके लेखन में कहीं भी कथ्य या भाषा का आडम्बर नहीं है। अपने देश से दूर रहते हुए भी उनके पास भारतीय यथार्थ और संस्कार…

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मानवता की देवी-डोरोथिया डिक्स

मानवता की देवी-डोरोथिया डिक्स डोरोथिया डिक्स एक ऐसी महिला थी जिसने अपने समय में मानसिक बीमारों के सुधार के लिए बहुत कुछ किया। उन्होंने अपने जीवन के लम्बे समय में लोगों की मदद करने के लिए अपनी ताकत और सामाजिक संवेदनशीलता का उपयोग किया। उन्होंने एक समय में बताया था कि वे किसी भी व्यक्ति…

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सौम चन्द्रिका

सौम चन्द्रिका गरल गरल हुआ वदन सुधाविहीन सिंधु मन। जल रहा नयन नयन धुआं धुआं धरा गगन।। स्वार्थ छद्म से यहाँ चिनी गई इमारतें मूक प्राणियों के कत्ल से सजी इबादतें नाम पर विकास के हरा भरा भी कट रहा वक्ष भूमि का लहूलुहान जैसे फट रहा कर्णभेदती बिगाड़ती रही ध्वनि: पवन मूल से उखड़…

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