महकता बसंत
महकता बसंत महक रहा है हलका – हलका , बालों में गूँथा जो गजरा । बहक रहा है छलका – छलका , नयनन में हँसता वो कजरा । बिजुरिया सम दमके बिंदिया आँचल में मुखड़ा रही छिपाय । सजी धजी थिरके है सजनी , आस दीप नैन में चमकाय ! 2 बोल रही है बहकी…
महकता बसंत महक रहा है हलका – हलका , बालों में गूँथा जो गजरा । बहक रहा है छलका – छलका , नयनन में हँसता वो कजरा । बिजुरिया सम दमके बिंदिया आँचल में मुखड़ा रही छिपाय । सजी धजी थिरके है सजनी , आस दीप नैन में चमकाय ! 2 बोल रही है बहकी…
वे सड़कें बना रहे हैं.. गर्म तपती भट्ठियों सी , तप्त सड़कों पर कोलतार की धार गिराते , मजदूरों के झुलस रहे हैं पाँव. पर तपती धरती पर, गिट्टियां बिछाते, मानो स्नेह का लेप लगा रहे हैं, वे सड़कें बना रहे हैं. गर्म जलाते टायरों का , फैलता है धुंआ ,आग उगलता, जला रहा है…
कलम के सिपाही हिंदी साहित्य के सम्राट, प्रगतिशील विचारों के पुरोधा,युगद्रष्टा और कलम के सच्चे सिपाही मुंशी प्रेमचंद जी को शत शत नमन।बेहद ही साधारण देखने वाले प्रेमचंद का व्यक्तित्व अत्यन्त अद्वितीय था।गृहस्वामिनी उनके 139वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करती है । साहित्य-गगन का चाँद साहित्य-गगन का चाँद विहंसता है अम्बर में, और धरा…
खोमचे वाली अपेक्षाकृत साफ सुथरे चेन्नई स्टेशन पर खड़ी लोकल ट्रेन की महिला बॉगी में फैले गजरों के फूलों और दक्षिण भारतीय व्यंजनों की मिली- जुली सुगंध ने मानो दो घंटो की एक सुखद यात्रा की भूमिका सी लिख दी थी। परंतु यह स्थिति ज्यादा देर तक नहीं रही। धीरे – धीरे डब्बे में…
एक नई सुबह माना गहरा है रात का अंधियारा, है घोर तमस, नहीं गगन में एक भी तारा, छुप गया चाँद भी, ग़मों की बदलियों में, सुबक पड़ी चांदनी, बादलों का लेकर सहारा। माना तूने खोया प्यार जीवन का, कहां गया वह हँसता चेहरा, वह मीठी बातें, वह साथ तुम्हारा। इस बेरहम महामारी ने, तोड़…
Would You Be My Valentine When I saw you standing over there… with moonlight shining through your hair… My heart stood still… I could hardly breathe … I wanted to kiss you… showing you how deeply I care! You’re the personification of Grace and Elegance… all wrapped up with a divine glow on your face!…
जीत जाएंगे हम सुबह-सुबह कोयल की मधुर धून सुनकर यूं लगा जैसे कह रही हो थोड़े दिन की ही तो है बात कुछ वक्त बितालो साथ माना हर वक्त है कीमती पर अभी घर पर रहने में ही है सबकी सलामती इन लम्हों को न भूलें हम सकारात्मक सोच के साथ ऐसा कुछ कर दिखाएं…
शाश्वत प्रेम मचलती-बलखाती नदियाँ, किनारों से टकराती नदिया, अपनी रवानगी में बहती चली जाती है मौन सागर में समाने को। खुद को खो कर कुछ पाना है, हार में ही जीत है यह कहती जाती है नदियाँ! गुलाब खिला है खुश्बूओं से सुवासित है। पर खो देता है अपनी सुगंध मुरझाने पर। आखिर वो खुश्बू…
एक मजबूत व्यक्तित्व -गोल्डा मीर दुनिया का इतिहास बहुविविध रहा है। सभ्यता -संस्कृति का विकास भी हर जगह अलग तरीके से हुआ है।आज की विकसित और समृद्ध दुनिया में अनेकानेक महापुरुषों ने हर क्षेत्र मे योगदान दिया है शिक्षा,स्वास्थ्य,सामाजिक और राजनैतिक जीवन में भी।गत 100 वर्ष के इतिहास में आधुनिक विश्व की अवधारणा विकसित…