एक नई सुबह

एक नई सुबह माना गहरा है रात का अंधियारा, है घोर तमस, नहीं गगन में एक भी तारा, छुप गया चाँद भी, ग़मों की बदलियों में, सुबक पड़ी चांदनी, बादलों का लेकर सहारा। माना तूने खोया प्यार जीवन का, कहां गया वह हँसता चेहरा, वह मीठी बातें, वह साथ तुम्हारा। इस बेरहम महामारी ने, तोड़…

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कोरोना और मेडिकल साइंस

कोरोना और मेडिकल साइंस वर्तमान समय में विश्व भर को कोरोना महामारी ने विभिन्न तरह से ग्रसित किया है, और कर रहा है। इसके द्वारा लाखों संख्या में संक्रमण और मानव जीवन का ह्रास हो रहा है, और मानव से मानव का हर तरफ भय के वातावरण ने सबको विचलित कर रख दिया है। इस…

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चाय दिवस की बधाई

चाय दिवस की बधाई न मौसम न पहर न दुनिया की खबर ! ठहाकों की उधर उठती गिरती लहर इथर ठुनकना मुनिया का बिन बात पर.. वो बहाने से पसरना किसी का बिछावन किसी का जमीन पर! न खत्म होने वाले किस्से चौके में आज पकते पकवान औ सियासत की बहसबाजी पर.. फिल्मों की रूमानी…

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प्रजातंत्र में तंग प्रजा का हाथ है

प्रजातंत्र में तंग प्रजा का हाथ है बलि देहाती, कर्जा वामन लात है प्रजातंत्र में तंग प्रजा का हाथ है आंगुर-आंगुर दाम जोड़ता बीज उधारी कितनी आई ट्रेक्टर का भाड़ा कितना है डीज़ल की कितनी भरवाई गिरवी कटने से पहले उत्पाद है प्रजातंत्र में तंग प्रजा का हाथ है नए आंकड़े, नई रिपोर्टें भूख रेख…

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लॉकडाउन के दौरान

लॉकडाउन के दौरान ( डायरी के कुछ पन्ने ) बचपन में ऐसी फिल्में देखकर जिसमें बच्चे अपने माता -पिता से बिछड़ जाते हैं देखकर बहुत डर लगता था और सोचती थी अगर माता पिता को कुछ होना है तो मुझे भी उनके साथ हो …आज सोचती हूँ मुझे कुछ होना है तो मेरे साथ मेरे…

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डॉ रांगेय राघव

डॉ रांगेय राघव बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न डॉ रांगेय राघव का जन्म,आगरा में ,१७ जनवरी,१९२३ को हुआ।शिक्षा-दीक्षा भी वहीं हुई।पिता संस्कृत,तमिल,फ़ारसी और अंग्रेज़ी के विद्वान थे।मॉं कनकवल्ली बडी सरल, उदार व दयालु महिला थीं।वे हिंदी जानती थीं,तमिल,ब्रजभाषा बहुत सुंदर बोलती थीं। इनके पूर्वजों को धर्म व भारतीय संस्कृति में गहरी आस्था थी।वे बाइबिल और क़ुरान भी…

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Unexpected days

Unexpected days We are living in unexpected days, the whole world seized by a primary instinct of self-preservation has locked itself in and is trying to escape death. States are destitute, unprepared and obsessed with winning more and more, they behave without humanity. No cologne to put on our hands or disinfectant, not even simple…

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सुनो, कुछ तो करो

सुनो, कुछ तो करो सुनो… कुछ तो करो…! कि इससे पहले सब श्मशानों में तब्दील हो जाए…! कुछ तो करो…. कि इससे पहले घर… मकानों और खंडहरों में तब्दील हो जाए…! कुछ तो करो… इससे पहले कि दवाएँ जहरों में तब्दील हो जाएं…! कुछ तो करो…. इससे पहले कि भोजन खुद भूख में…. और भूख…

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पुनरावृति

पुनरावृति। चारों ओर लुढ़कते पासे हैं, दाँव पर लगी द्रोपदियाँ हैं, लहराते खुले केश हैं, दर्प भरा अट्टहास है, विवशता भरा आर्तनाद है, हरे कृष्ण की पुकार है… चारों ओर पत्थर की शिलाएँ हैं, मायावी छल है, लंपटता है, ना जाने कितनी ही अहिल्याओं की पाषाण देह है, नैनों में आत्म ग्लानि का नीर भरे,…

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गाड़ी के दो पहिए

गाड़ी के दो पहिए शोभा रसोई में से आवाज़ दे कर पीयू को बुला रही थी कि “बेटा, रसोई में आकर थोड़ी मेरी काम में मदद कर दे। थोड़ी सी बदाम काट कर दे दे।” पीयू रसोई में अपनी मस्ती में उछलते हुए पहुंची और बोली “क्या मां, आप क्या कर रही हो?” शोभा ने…

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