जय माँ सरस्वती

जय माँ सरस्वती क्या लिखूँ , कैसे लिख दूँ वो भाव कहाँ से लाऊँ रच दूँ माँ तुझ पे कविता वो शब्दार्थ कहाँ से लाऊँ … भटक रही जग की तृष्णा में मोह माया का भंवर सा फैला अंतर्मन को निश्छल कर लूँ वो परमार्थ.. कहाँ से लाऊँ … निज स्वार्थ भरा औ द्वेष भरा…

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नारी अधिकारियों का मजबूत कंधा-एलिस पाॅल

नारी अधिकारियों का मजबूत कंधा-एलिस पाॅल एलिस स्ट्रोक्स पाॅल का जन्म 11 जनवरी 1885 को न्यूजर्सी के माऊंट लार्रेल टाउन में हुआ। इनके पिता विलियम मिल पाॅल एक सफल व्यवसाई थे तथा विंथ्रोब परिवार के वंशज थे।इनकी मांँ टेसी पेरी पॉल सोसाइटी ऑफ फ्रेंड्स के आंदोलन में सक्रिय सदस्य थीं। एलिस दो बहन एवं दो…

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दिव्या माथुर का रचना संसार

दिव्या माथुर का रचना संसार दिनांक 19 दिसम्बर 2021 को केन्द्रीय हिंदी संस्थान, विश्व हिंदी सचिवालय, वैश्विक हिंदी परिवार एवं अन्य सहयोगी संस्थाओं के संयुक्त ऑनलाइन आयोजन में प्रवासी साहित्यकार दिव्या माथुर का रचना संसार विषय पर एक साहित्यिक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता प्रवासी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर प्रो. कमल किशोर…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- डाॅ बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर

डॉ भीमराव अम्बेडकर के अनुप्रयोग भीमराव रामजी अम्बेडकर (14 अप्रैल 1891 – 6 दिसंबर 1956) एक भारतीय विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री , समाज सुधारक और राजनीतिक नेता थे, जिन्होंने संविधान सभा की बहसों से भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति का नेतृत्व किया, जिसने पहले कैबिनेट में कानून और न्याय मंत्री के रूप में…

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कड़ियाँ

कड़ियाँ सात वर्षों के बाद इस जगह से मेरी विदाई हो रही थी। हिन्‍दी टीचर के रूप में यह मेरी पहली पोस्टिंग थी। जिन बच्‍चों को मैंने नौ-दस साल में देखा था, अब वो बड़ी हो गई थीं। आभा और करूणा ने विदाई पर कुछ कहा नहीं, एक लिफाफा पकड़ा दिया, पहले की यादें ताजा…

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रिश्ता

रिश्ता एक तेज हवा के झोंके की तरह उनके जीवन में आई थी अनुष्का | एकदम अल्लढ मदमस्त नवयौवना | चार्वाक दर्शन को जीवन का आधार मनाने वाली | सीधे-साधे उत्कर्ष के जीवन में एक तूफान बनकर कुछ तीनों के लिए आई और उसके सम्पूर्ण जीवन को है बदलकर रख दिया | उत्कर्ष उठो! कितना…

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नयी दिशा

नयी दिशा धूप-गुगुल के सुगंध से सुवासित और स्त्रियों के शुभ मंगल गान से गुंजायमान था हरिपुर गांव का वातावरण। लाल-पीली साड़ियों में स्त्रियाँ, धोती-कुर्ते में पुरुष और रंग-बिरंगे परिधानों में सजे बच्चे-बच्चियाँ उत्सव सा माहौल बना रहे थे,उनके परिधान सुख-समृद्धि की गवाही दे रहे थे।सब के चेहरे से संतुष्टि और खुशी झलक रही थी।अवसर…

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गृहस्वामिनी कपल

गृहस्वामिनी कपल अग्नि के फेरे हुए सात साक्षी मान ध्रुव तारा को जो मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व आस्तिव परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे ऐसे समाहित हुए मेरा सब कुछ तेरा हुआ तेरा सब कुछ मेरा हुआ तेरा मान सम्मान-स्वभिमान सुख-दुःख , सफलता,…

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बंद किताबें और खुलती पहचान

बंद किताबें और खुलती पहचान इंग्लैंड के सितंबर की गुलाबी सर्दियों की मीठी ठंडक के साथ एक खास सुबह की शुरुआत हुई। हल्की धुंध में ढकी सड़कें और पेड़ों से झरते सुनहरे, नारंगी और लाल रंग के पत्ते मानो प्रकृति का कोई जादुई कैनवास तैयार कर रहे थे। आसमान में उड़ते पक्षियों की चहचहाहट, पेड़ों…

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