डाॅ रजनी झा की कविताएं

डाॅ रजनी झा की कविताएं 1.प्रेम (सीता) सीता चकित हो गयी थी विवश व्यथित हो गयी थी सजल नयन लक्षमण को देख खता अपनी पुछ रही थी। आर्यपुत्र ने क्यों सजा दिया अपने से क्यों दूजा किया चौदह वर्ष वन मे संग रखा अब क्यों अपने से दूर किया? निरूत्तर लक्षमण सर झुका खड़े रहे…

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भजन

    भजन हर शाम की तरह इस शाम भी पार्क में काफी चहल-पहल थी ।पार्क के बीचोंबीच एक गोलाकार छज्जेदार चबूतरा सा बना था।प्रत्येक शुक्रवार को शाम छः से सात बजे तक वहां पर भजनों का कार्यक्रम चलता था। आस-पास रहने वाली औरतें जमा हो कर भजन गाती थीं । आज भी भजन चल…

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बिना धड़ की भूतनी

बिना धड़ की भूतनी पिछले दस साल से मेरा एक ही मकसद था, आते जाते लोगों को तंग करना। रात को और गर्मियों की दोपहर में जब सड़कें सुनसान हो जातीं थीं तो मैं इसी तलाश में रहती थी कि कोई मेरे पास से गुज़रे और मैं उसे परेशान करूँ। जब लोग हैरान होते थे,…

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समा जाये तेरे हर गुण मुझ में

समा जाये तेरे हर गुण मुझ में माँ जीवन का सार हो तुम मेरी ताल लय मीठी धुन हो मेरी तेरे जैसे बनना है, सदा रहूँ कदमों में तेरी। सदा नयन में बसती हो मेरी हृदय में विराजती मेरी जीवन से और कोई चाहत नहीं परछाई बनना है तेरी। हो धरा सी क्षमाशीला जानकी सदृश…

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माँ

“माँ” अक्षर में सिमट पूरा संसार हर खुशी हर आस हर विश्वास से बुना ये रिश्ता प्यारा।। न कोई छल इस में न कोई मिलावट न कोई बनावट बस निश्छल स्नेह से बुना ये रिश्ता प्यारा।। माँ क्या होती है कितना दर्द वो सहती है कितनी जान वो लगाती है खुद को भूल ही जाती…

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एक खत

एक खत एक पाती माँ के नाम माँ,कहते है इस बेहद खूबसूरत शब्द की सरचना ईश्वर ने तब की जब उन्हें लगा की वह सब जगह नही पहुँच सकते,और फिर उन्होंने हम सब के लिए माँ बनाई!! सम्पूर्ण सृष्टि आकाश गंगा तारा मण्डल और ब्रह्माण्ड की सृजनकर्ता #माँ,वह ध्वनि है #ॐ सी, ओंकार सा वक्त…

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हिंदी का आधुनिक इतिहास

हिंदी का आधुनिक इतिहास हे मातृरुपेण हिंदी!! हमारी मातृभाषा, हम सब की ज्ञान की दाता हो, जब से हमने होश संभाला, तूने ही ज्ञान के सागर से, संस्कारों का दीप जलाया, भाषा से परिचय कराया, आन ,बान और शान हमारी, देश का अभिमान जगाती, हर गुरुजनों की शान हो तुम, उनकी कर्मभूमि हो तुम, जिसने…

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अंकुरण

        अंकुरण रिंगटोन के बजते ही फोन के स्क्रीन पर अल्फाबेट के जिन सदस्यों ने एक परिचित नाम को उकेरा, वैसे ही भय और उत्साह दोनों की ही बेमेल संगति ने हृदय के धड़कने की गति को मानो बेलगाम कर दिया। मेरी आशंकाओं के विरुद्ध फोन के दूसरी तरफ आश्वस्तिपूर्ण ध्वनितरंगें पृथ्क…

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Biography Of Elisa Mascia

Biography of Elisa Mascia Elisa Mascia was born in Santa Croce di Magliano (Cb), on 13/04/1956, she lives and works in San Giuliano di Puglia (Cb). Retired teacher. Writing is a real need for life and draws inspiration from anything or any surrounding event. She has participated in various national and international poetry competitions obtaining…

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Christmas

Christmas I dream of crucifixes tonight. And each one is painfully inspired. And Bread of Joy rises at dough bowls. The time has come for the Limit. The stars are coming down in a golden halo. And the mystery embraces us from above. The past was once. And today heavenly bread sends us The Throne….

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