स्त्री विमर्श के बहाने

स्त्री विमर्श के बहाने स्त्री विमर्श, महिला सशक्तिकरण और वीमेंस लिब यह सब कुछ ऐसे शब्द हैं जिनकी चर्चा आजकल जोरों पर है या दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि आधुनिक समय में सबसे ज्यादा ट्रेंड करने वाले शब्द हैं, जो कि बहुत आवश्यक भी है। महिलाओं पर पुरूषों के राज करने की…

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इन्तजार

इन्तजार गत चार सालों से उर्मि रांची के मानसिक चिकित्सालय में जिन्दगी के मनहूस दिन काट रही है । हर शाम उसे किसी न किसी का इन्तजार रहता है । आँखें दरवाजे पर लगी रहती हैं शायद कोई आ जाय । किसी मरीज के घरवाले आते हैं किसी के रिश्तेदार मिलकर जाते हैं , पर…

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मुर्दा खामोशी

” मुर्दा खामोशी “ तेरे जग में भीड़ बहुत है आगे बढ़ने की होड़ बहुत है मंज़िल की मुर्दा खामोशी रस्तों का पर शोर बहुत है ख़्वाबों के साये को थामे जीने की घुड़दौड़ बहुत है बुत से दिखते चलते फिरते मरे हुओं की फ़ौज बहुत है पीठों में खंजर…भोंकते प्यार जताते यार बहुत है…

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धरा की व्यथा

धरा की व्यथा मैं धरा हूँ , यूं तो नाम हैं मेरे कई । भूमि, वसुधा, पृथ्वी, धरणी, हूँ लाड़ली उस रचयिता की । आठ भाइयों में बहन अकेली । बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस, वरुण और प्लूटो, पूरे आठ हैं मेरे भाई । मैं धरा हूँ , यूं तो नाम हैं मेरे कई…

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Alicia Minjarez Ramírez’s poems

Alicia Minjarez Ramírez’s poems 1.NOCTURNAL SUN There, where the wind fades away The sky waves its own branches Retouching icy mornings In the shades, Blackbirds and pigeons flapping And disturbing the sky. I aimlessly wander through. Every corner evokes Spiral lines of perpetually Ever written sonnets, Unveiled brides Blur the color lines Upon vacant altars….

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यह कैसी आज़ादी

यह कैसी आज़ादी *********************** देश की आजादी को आज पूरे हुए बहत्तर बरस लेकिन आज भी आधी आबादी आजादी को रही तरस मंदिर हो या रेलवे स्टेशन लगा भिखारियों का तांता मौलिक सुविधाओं से जिनका दूर दूर तक नहीं है नाता दिहाड़ी मजदूरी, आधी तनखाह काम कर रहे मेहनतकश हालात देखकर इनके लगता गुलाम है…

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लैंगिक समानता और सशक्तिकरण

लैंगिक समानता और सशक्तिकरण सभी महिलाओं को आवश्यक रूप से नारीवादी नहीं होना चाहिए और सभी नारीवादियों को जरूरी नहीं कि महिलाएं हों। पितृसत्तात्मक सामाजिक योजना में, यह वास्तव में बहस का मुद्दा है कि क्या नारीवाद एक महिला का अंतिम गढ़ है या अस्तित्व के लिए उसकी प्राथमिक स्थिति है। हालांकि, इस बात से…

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होली में

होली में जाहिर हम जज़्बात करेंगे होली में तुमसे खुल कर बात करेंगे होली में ।। तुम उसको आंखों आंखों में पढ लेना हम जो इजहारात करेंगे होली में ।। खोल के दिल के दरवाजों को तुम रखना पेश तुम्हे सौगात करेंगे होली में ।। खुशबू से भर देंगे तेरे दामन को फूलों की बरसात…

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द्विचाली

द्विचाली उठ जाग मुसाफिर भोर भयो अब रैन कहाँ जो सोवत है………खर्र खरर्र इसी गाने को गुनगुनाते हुए शिक्षिका सावित्री शीक के झाड़ू से झाड़ू लगा रही थी जहाँ उसके साथ संगत कर रहे थे शीक के झाड़ू की खरर्र खर्र चिड़ये चुनमुन की चहचहाहट और खेतों की ओर जाते गोधन की टनर् टनर् घंटी।…

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