मोटेराम जी शास्त्री

मोटेराम जी शास्त्री कौआ चला हँस की चाल, अपनी भी भूल गया, प्रस्तुत पंक्ति ही जैसे आधार है मुंशी प्रेमचंद जी की हास्य कथा पंड़ित मोटेराम जी शास्त्री का। बड़े ही सरल एवं सहज भाव से इस पूरी कहानी को आकार दिया है मुंशी जी ने। बहुत ही कम पात्रों के साथ इस कहानी का…

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पीली कोठी

पीली कोठी आज सुबह से पीली कोठी के पिछले भाग में खूब सारी हलचल मची थी। पीली कोठी का पिछला हिस्सा अब पीला भी कहाँ रहा। हल्के गुलाबी और हरे रंगों में सराबोर वह अब इस पीली कोठी का हिस्सा ही नहीं लगता। शायद कोई ब्याह शादी होगी। प्रतिभा का मन हुआ कि उधर जाए…

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भाग्यरेखा ने उकेरा

भाग्यरेखा ने उकेरा भाग्य रेखा ने उकेरा स्वप्न रेशम रूप तेरा ले रहा आकार अंतर में सलोना रूप तेरा।। मांगती रहती विधाता से सुमन रस राग भीगे। दे रहा प्रारब्ध ही यूं हो सदय उपहार मेरा।। पलक के आह्लाद पर है वाणियों का मूक पहरा। खिलखिलाती आ गयीं खुशियां, ह्रदय का मार फेरा।। अधर कोपल…

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शहीदों के नाम

शहीदों के नाम आज मौन हैं मेरे शब्द नहीं लिखनी मुझे कोई कविता क्या सचमुच इतने समर्थ हैं मेरे शब्द ? इतनी सार्थक है मेरी अभिव्यक्ति / कि रच दूँ आपके बलिदानों को सिर्फ एक कविता में…… हाँ, नहीं लिखना मुझे अपने जज्वात अपने अंदर उपजे असीम वेदना की लहर…. कैसे व्यक्त कर दूँ कुछ…

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Fast Forward To Our Ancient Vedic Past: ‘Developing Environmental Conscience’

Fast Forward To Our Ancient Vedic Past:‘Developing Environmental Conscience’ – Past, Present and Future Anyone who has been on this planet even for a few decades has seen devastating natural disasters; eruptions of volcanoes, tsunamis, hurricanes, earthquakes, glacier avalanches, flash floods and forest fires. Every time any of these happens, we watch helplessly as living…

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सिमोन द बोउवार

  सिमोन द बोउवार 20वीं सदी की महान् दार्शनिकों में से एक, स्त्रीवादी विमर्शों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सिमोन द बोउवार । वैश्विक नारीवादी आंदोलन की एक महत्वपूर्ण किरदार हैं। सिमोन द बोउआर इनका जन्म जनवरी 1908 में एक अमीर घराने में,फ़्रांस के पेरिस में हुआ था। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद उनके घर…

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दो शब्द प्रेम के नाम

दो शब्द प्रेम के नाम नई दुनिया की नई रंगत, कब फरवरी का माह प्रेम को अर्पित हो गया और वह भी एक विशिष्ट खोल में लिपटा हुआ, पता नहीं, पर प्रेम तो शाश्वत है, इतना व्यापक कि एक पल भी जीवन का धड़कना प्रेम के बगैर संभव नहीं। सृष्टि अगर सृजन से जुड़ी है…

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मेरे प्रिय कथाकार और उनकी एक कहानी

एक उत्सव हिंदी कथा सम्राट प्रेमचंद एवं कथा, कथाकार और कथा प्रशंसकों के नाम।जुलाई माह प्रतिदिन संध्या सात बजे गृहस्वामिनी के यू ट्यूब चैनल पर । अंतरराष्ट्रीय कथा महोत्सव में 5 जुलाई संध्या सात बजे प्रसिद्ध और वरिष्ठ कथाकार  डॉ सी भास्कर राव जी की कहानी लेकर आ रही हैं कथाकार डॉ जूही समर्पिता और…

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रीता रानी की कविताएं

रीता रानी की कविताएं 1.अनुपात – समानुपात किसी भी शोक को सभी ने अपने-अपने पाव में नापा , प्रविष्ट हुए सब अपनी- अपनी खोह में , दुख की कालिमा को देखने के लिए । थोड़ी देर के लिए शोक समानुपातिक हो गया , इस तरह व्यक्तिगत होकर भी वह सार्वजनीन हो गया ।   समाज…

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