आत्मकथा

आत्मकथा आत्मकथा लिखने का विचार जब भी आता अन्तर्मन में एक उथल- पुछल्ले सी मच जाती। बचपन बीता, जवानी बीती,चलते ही रहे, सदा चलते ही रहे, खट्टी-मीठी यादों को समेटे। समय जो मुट्ठी में बन्द रेत सा फिसल जाता है फिर कहाँ वापस आता है।जाने क्या क्या रंग दिखाता है … ज़िन्दगी कभी सहेली कभी…

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शाश्वत प्रेम

शाश्वत प्रेम मचलती-बलखाती नदियाँ, किनारों से टकराती नदिया, अपनी रवानगी में बहती चली जाती है मौन सागर में समाने को। खुद को खो कर कुछ पाना है, हार में ही जीत है यह कहती जाती है नदियाँ! गुलाब खिला है खुश्बूओं से सुवासित है। पर खो देता है अपनी सुगंध मुरझाने पर। आखिर वो खुश्बू…

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एक और स्वप्न

एक और स्वप्न बाहर तेज गर्जना के साथ बारिश हो रही थी, रात गहराने लगी थी। मैं भी रसोई और अन्य सारे कार्यों से निपट कर बस बिस्तर पर पड़ ही जाना चाह रही थी कि अचानक फोन की घंटी बज उठी। उधर नयना दीदी थी, भर्राई हुई आवाज में उन्होंने कहा-“प्रोफ़ेसर साहब नहीं रहें।”मैं…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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विस्थापित

विस्थापित इंसानों के भीतर एक अग्नि, जठराग्नि… बहुत तेज ताप वाली अग्नि का, धीमे – धीमे जलना, इसी जठराग्नि के वशीभूत हो, उसका चलायमान हो जाना, एक चकाचौंध भरी जादू नगरी की ओर, पर उसकी आत्मा तो वहीं रह जाती है, खेत के किसी कोने में, या गली के नुक्कड़ पर। आत्मा बहुत कम जगह…

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Christmas

CHRISTMAS The happiest season is here again, shielded faces can’t stop us from recapturing, that brightest star that led to the three wise men, to find the Christ that was born in Bethlehem. Heaven and nature sing; Joy to the World the Lord has come! Christmas, it’s Christmas, time to love! Humanity is wanting for…

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प्रवासी महिला साहित्यकार और स्त्री चेतना 

प्रवासी महिला साहित्यकार और स्त्री चेतना  हिन्दी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो मान्यता मिली है उसका एक मूल कारण है प्रवासी भारतीय लेखक, जो एक लम्बे समय से भारत की भाषा, कला और संस्कृति को विदेशों में फैलाने का महत्वपूर्ण प्रयास करते आ रहे हैं। समय तेज़ी से बदल रहा है, ज़ाहिर है कि हमारे…

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हिंदी दिवस के जन्मदाता

हिंदी दिवस के जन्मदाता गत वर्ष गृहस्वामिनी में मेरा एक संस्मरण प्रकाशित हुआ स्वर्गीय व्यौहार राजेंद्र सिंह से जुड़े , उनके साथ कुछ पल रेलवे प्लेटफॉर्म पर एक छोटी सी मुलाकात के रूप में । आज उनके ही पौत्र डॉ व्यौहार अनुपम सिन्हा , जो मेरी छोटी बुआ का मंझला बेटा काका जी( श्री राजेंद्र…

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THE SEA GETS TOGETHER ME

THE SEA GETS TOGETHER ME The sea gets together me with infinity. He untangles everyone heavy thoughts. They get dressed in my lunar room conceived destinies. And white sheets. I’m not looking for anyone’s consolation. Guardian of Fire send me One Creator. And the bright misfortune is house of my feelings vast. Rozalia Aleksandrova Writer…

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