मेरी माँ

मेरी माँ ऐसी मेरी माँ , ऐसी मेरी माँ नहीं किसी के जैसी मेरी माँ गुणों की खदान, मेरे परिवार की पहचान, जीवन के मूल्यों का पाठ पढ़ाती, शिक्षक होने का सही अर्थ दर्शाती ऐसी मेरी माँ, ऐसी मेरी माँ नहीं किसी के जैसी मेरी माँ।। इसका जीवन संघर्षों की कहानी, हँस हँस कर सुनाती,…

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अम्फन के बाद की शाम

अम्फन के बाद की शाम आज शाम आकाश , उजले-नीले बादलों से आच्छादित। यूँ प्रतीत हो रहा जैसे मानो, प्रकृति अपने आलय के छत को, सजा रही अनेक गुब्बारों से। जो हवा के साथ गतियमान हैं, कभी बदलते आकार, रंग कभी। सजावट की गुणवत्ता नाप रहे हो जैसे , किसी गृहस्वामिनी के गृह -सज्जा के…

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निर्मला

निर्मला मुंशी प्रेमचंद की रचनाएं आम जनता से जुड़ी हुई है।आम आदमी क्या सोचता है,वह कैसे अपने जीवन को संभालते हुये एक एक कदम वह अपनी मंजिल की ओर बढ़ता है,इसका सुंदर चित्रण प्रेमचंद ने अपने सभी कथाओ में किया है। मैं प्रेम चंद की सारी पुस्तके पढ़ी हूँ, आज से करीब 35 साल पहले…

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न्याय

न्याय शहर के पॉश इलाके में पौश, बड़ी सी कोठी, गेट पर खड़े चौकीदार, घर में नौकर- चाकर शान- शौकत, फूलो से सजा हुआ बगीचा,रईसी में किसी चीज की कमी नहीं, हो भी क्यों ना। यहां के ‘डीएम’ का जो घर है। कहने की जरूरत नहीं दरवाजे पर बड़ा सा नेम प्लेट लगा था। सुनहरे…

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रमजीता पीपर

रमजीता पीपर रमजीता पीपर से गाँव की पहचान है या गाँव से इस पीपल के पेड़ की इसके बारे में दद्दा से ही पता लग सकता है। दद्दा की उम्र बहुत अधिक नही है, यही 70 के लगभग, पर लोग उन्हें दद्दा कहने लगे हैं, शायद उनके ददानुमा कहानियों और बातों के कारण हो, या…

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हिंदी है भारत की कला व संस्कृति की पहचान

हिंदी है भारत की कला व संस्कृति की पहचान विश्व करे इसका सम्मान । संस्कृत की बेटी हिंदीभाषियों की है शान। भारतीय कला व संस्कृति की यही है पहचान । तभी तो भारतेंदु ने लिखा था। – निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति कौमूल, बिनु निज भाषा ज्ञान के मिटै न हिय कौ सूल ।…

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मुंशी प्रेमचंद भी कोई लेखक है

मुंशी प्रेमचंद भी कोई लेखक है बात उन दिनों की है जब मैं स्कूली छात्र था। गांव में सरकारी स्कूल की पढ़ाई का स्तर बहुत अच्छा था । हमारे सभी शिक्षक बेहद कुशल और ज्ञानवान थे। मुझे हिंदी अध्यापक ज्यादा पसंद थे क्योंकि उनका समझाने का ढंग बेहद सरल और रोचक था। एक दिन उन्होंने…

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माँ है तो संसार है

माँ है तो संसार है माँ है तो संसार है बिन उसके न प्यार है। माँ की ममता तो ईश्वर का दिया उपहार है।। स्नेह अपार प्यार क्या न दिया माँ ने हमे। माँ की ममता में ही तो जीवन का सार है।। दूर होकर भी जो सदा दिल मे बसती है । एक जरा…

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राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर रामधारी सिंह दिनकर जिन्हें हम ‘जनकवि’ और ‘राष्ट्रकवि’ के नाम से भी जानतें हैं और जो बिहार ही नहीं वरन् पूरे भारत के साहित्यिक आकाश में सूर्य के समान दैदिप्यमान नक्षत्र थें, हैं और रहेंगे… यथा नाम तथा गुण…. । यूं तो दिनकर की ख्याति एक वीर रस के कवि के…

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प्राण का संबंध

प्राण का संबंध “सुनो तुम्हारी माँ का क्या नाम है?” स्कूल के प्रांगण में एक छात्रा को रोकते हुए प्रीति ने पूछा। लड़की हतप्रभ होकर प्रीति को देखने लगी। प्रीति मुस्कुराई। लड़की से कहा- “मैं समझ रही हूँ तुम्हारे दिल की बात। लोग अमूमन पिता का नाम पूछते हैं और मैंने तुमसे तुम्हारी माँ का…

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