लैंडलाइन प्रेम
लैंडलाइन प्रेम यह प्रेम कहानी उस ज़माने की है जिस वक़्त मोबाइल फोन नहीं थे और लैंड लाइन के फोन के तारों के इर्द-गिर्द घूमती थी यह दुनिया। लैंड लाइन का फोन भी हर किसी के घर में नहीं होता था और लैंड लाइन का फोन रखना एक रुतबे की बात मानी जाती थी।…
बदला हुआ आदमी
बदला हुआ आदमी गाड़ी स्कूल के मैदान में आकर रुक गई। गेट पर मौजूद लोगों ने अन्दर जाकर मुख्य अतिथि के आगमन की सूचना दी। यह सुनकर आयोजकों में खुशी की लहर दौड़ गई। स्कूल के प्रधानाचार्य गाँव के कुछ गणमान्य नागरिकों के साथ गेट पर आए। सबने माल्यार्पण कर मुख्य अतिथि का स्वागत किया…
हाजी मियां
हाजी मियां उनका नाम हाजी मियां था, पर उन्होंने कभी हज नहीं किया था । गरीबी की मिट्टी में पले उनके परिवार की एक ही तीर्थयात्रा थी ,रोटी का इंतजाम। शायद इसी स्थिति को भांप कर , उनकी दादी ने उनका नाम ‘हाजी’ रख दिया था , ताकि नाम सुनकर ही घर में काबा…
एक स्त्री की तीन आवाजें !
एक स्त्री की तीन आवाजें ! दोपहर की चाय जब तक उबलती, तब तक सीमा खिड़की के पास रखी कुर्सी पर बैठ जाती। सामने स्कूल से लौटते बच्चे, दूध वाला, दोपहर की सुस्ती में पसरे कुत्ते और बगल की अरोड़ा आंटी की आवाज़ें – सब रोज़ की तरह चल रहा होता, पर सीमा की…
एक खामोश घर की आवाज़
एक खामोश घर की आवाज़ घर को खड़ा करने के लिए जितनी ज़रूरत ईंट-पत्थर की होती है, उतनी ही ज़रूरत होती है चुप्पियों की। चुप्पियाँ अक्सर वह आवाज़ होती हैं, जो किसी भी तूफ़ान से अधिक गूंजती हैं। सावित्री ऐसी ही एक चुप्पी थी , गहराई से भरी, स्थिर और सहनशील। “चुप्पी एक…