विश्व हिन्दी दिवस

विश्व हिन्दी दिवस हिन्दी माँ का दूध है , और हमारा पूत । सदा हमारे साथ है , मन भावों का दूत ।। निज भाषा अभिमान है ‌, यह भगवन वरदान । अंतस से है फूटता , नहीं भाव व्यवधान ।। मात तात सम पोसता , है वटवृक्ष समान । निज निजता का भाव दे…

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शतबार नमन! शतबार नमन!!

शतबार नमन! शतबार नमन!! हिमालय की ऊँचाई पा, जिसका जीवन रहा सफल; गतिक जीवन से यकायक, हो गया जो निष्पंद, निश्चल; रहा जीवन-पर्यंत जो- निन्छल, निर्विकार, निर्मल; शैलेन्द्र सा विराट, विमल- शैलेन्द्र-व्यक्तित्त्व था धवल! झंकृत-जीवन से हो मौन, टूट गये वीणा के तार; चलते-चलते ही मानो वे- ओझल हो गये क्षितिज पार; खोजते रहे हम…

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सवाल आप के और समाधान हमारा

सवाल आप के और समाधान हमारा आज हमारी पहली सवाल आप के और समाधान हमारा सत्र में कोरोना से संबंधित कुछ प्रश्नों का उत्तर या समाधान हल करने की कोशिश करेंगे डॉ राणा संजय प्रताप सिंह जी के साथ जोकि एक वरिष्ठ फिजीशियन, समाजसेवक और राजनीतिज्ञ भी हैं। भाजपा के वरिष्ठ सदस्य हैं तथा लॉयंस…

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नारी बिन संसार

नारी बिन संसार गर जग में नारी ना होती, चैन से सारी दुनिया सोती, ना बाजार, न दफ़्तर होते, लोग सिर्फ़ पेड़ों पर सोते, माल ना होटल कुछ न होते, घास-पूस के जंगल होते, ट्रेन न मोटर, बोट न रिक्शा, स्वयं लोग करते निज रक्षा, ना मकान, ना फ़्लैट न खोली, करवाचौथ, न ईद, न…

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शिक्षा बनाम साक्षरता

शिक्षा बनाम साक्षरता ‘शिक्षा ‘का संबंध ज्ञान से है और इसका क्षेत्र व्यापक है ।शिक्षा से तात्पर्य जीवन के लिए ज़रूरी सभी प्रकार के ज्ञान- अक्षर ज्ञान, व्यवहारिक, सामाजिक, नैतिक ,सांस्कारिक,चारित्रिक ज्ञान आदि से है। परंतु वर्तमान में शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित हो गया है ।शिक्षा का अर्थ साक्षरता समझा जाने लगा है…

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परदेशी

परदेशी प्यास के मारे राजन का गला सूखा जा रहा था। दूर-दूर तक देखा किसी मनुष्य की छाया तक नजर नहीं आ रही थी और ना ही आसपास कहीं पानी का अता पता था। वह थककर बैठ गया पर बैठने से भी आखिर कब तक काम चलने वाला था। उठकर फिर चलना शुरू किया पर…

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वीरता और विद्वत्ता का अद्भुत समन्वय

वीरता और विद्वत्ता का अद्भुत समन्वय मेरे जीवन की क्षुधा, नहीं मिटेगी जब तक मत आना हे मृत्यु, कभी तुम मुझ तक… भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन भारतीय इतिहास का स्वर्णिम युग है। भारत की धरती पर जितनी भक्ति और मातृभावना उस युग में थी, उतनी कभी नहीं रही। 1857 की क्रांति के बाद हिंदुस्तान की धरती…

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प्रकृति हमारी अस्तित्व

प्रकृति हमारी अस्तित्व प्रकृति को प्यार दें स्नेह और दुलार दें, पूजा करें इसकी और तन मन भी वार दें! जिसने केवल आजतक देना ही जाना है, हम सभी मानव को संतान सी माना है!! फिर क्यूं हम भी पीछे हों अपने उदगार में, प्रकृति सी सुंदरता नहीं कहीं संसार में! उसके ही आंचल में…

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वीरांगना बीना दास

वीरांगना बीना दास आज से ठीक 88 वर्ष पूर्व 6 फरवरी 1932 का दिन था, जब कलकत्ता विश्वविद्यालय के कनवोकेशन हाल में बैठे सैकड़ों लोग एक युवती द्वारा लगातार चलायी जा रही गोलियों से स्तब्ध रह गए, जिनका निशाना कोई और नहीं बल्कि बंगाल का तत्कालीन गवर्नर स्टेनले जैक्सन था। हालाँकि जैक्सन बच गया पर…

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