यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन  मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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अंतरिक्ष की धरोहर .. कल्पना चावला

अंतरिक्ष की धरोहर .. कल्पना चावला   कुछ कर गुजरने की तमन्ना थी , कुछ जीने का नया तराना था । चांद सितारों से मिलने भरी उड़ान, किसे पता था जिंदगी खत्म करने आ जायेगा तूफान ।। भारत की वह बेटी जिसने प्रथम बार अंतरिक्ष पर अपने पाँव रखे, जिसने अपने मन की कल्पना को…

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एक मां हूँ मैं

एक मां हूँ मैं एक मां हूँ मैं, अपने बच्चों के लिए, कोमल भावनाएं रखतीं हूँ। दुनिया की सारी खुशियां, निछावर करना चाहती हूँ। चाहतीं हूँ.. मेरे बच्चे… तू जिन राहों से गुजरे, फूल बिछे हों,उन राहों पर। पर मेरे बच्चे… जान ले कई बार, यह जिंदगी फूलों की सेज है, तो कई बार कांटों…

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भूख

भूख मुझे बेशक गुनहगार लिखना साथ लिखना मेरे गुनाह, हक की रोटी छीनना । मैंने मांगा था, किंतु, मिला तो बस, अपमान, संदेश, उपदेश, उपहास, और बहुत कुछ । जिद भूख की थी, वह मरती मेरे मरने के बाद । इन, अपमानों, संदेशों, उपदेशों, उपहासों, से पेट न भरा, गुनाह न करता तो मर जाता…

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अंकुरण

        अंकुरण रिंगटोन के बजते ही फोन के स्क्रीन पर अल्फाबेट के जिन सदस्यों ने एक परिचित नाम को उकेरा, वैसे ही भय और उत्साह दोनों की ही बेमेल संगति ने हृदय के धड़कने की गति को मानो बेलगाम कर दिया। मेरी आशंकाओं के विरुद्ध फोन के दूसरी तरफ आश्वस्तिपूर्ण ध्वनितरंगें पृथ्क…

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Online Food Order In Train

घर पर ही नहीं अब ट्रेन में भी मंगवायें खाना ऑनलाइन – जानें आसान तरीका

क्या आपने कभी पहियों पर रहते हुए अपने पसंदीदा भोजन का एक टुकड़ा ऑर्डर किया ? क्या आप अगली ट्रेन यात्रा में ऑर्डर फूड डिलीवरी करने की योजना बना रहे हैं ? एक विश्वसनीय और अच्छी तरह से मान्यता प्राप्त ई-खानपान सेवा प्रदाता को देखना चाहते है जो भोजन की समृद्धि और स्वाद सहित सभी…

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घर से चलकर पूरी दुनिया तक की यात्रा हैं – दिव्या की कहानियाँ

घर से चलकर पूरी दुनिया तक की यात्रा हैं – दिव्या की कहानियाँ चुनिंदा कथाकार ऐसे होते हैं जो शून्य से शुरू तो होते हैं किन्तु वे किस हद तक चले जाएंगे, इस बारे में कयास लगा पाना बहुत मुश्किल होता है। हिंदी साहित्य की पहली और दूसरी पीढ़ियों के कथाकारों और यहाँ तक कि…

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संस्मरण प्रेमचंद जी के परिवार का

संस्मरण प्रेमचंद जी के परिवार का बचपन में पांचवीं, छटी से ही पुस्तकों में दिनकर, महादेवी वर्मा,मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जिनके नाम का तिराहा आज भी है, डॉ राम कुमार वर्मा, हरिवंश राय बच्चन जी जो इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के “अंग्रेज़ी डिपार्टमेंट , फ़िराक़ गोरखपुरी जी भी अंग्रेज़ी डिपार्टमेंट के हेड रहे पर दोनों…

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My Christ

My Christ Turn your gaze to the world, to every living being in the Universe. Merciful to your children who, while asking for your help, Oh Christ, they continue to scourge You every day. Pitiful, suffering eyes, they beg man to change. My brother, listen: open your heart, it is my Christ who speaks to…

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