वीर स्थली का सिंह नाद

वीर स्थली का सिंह नाद 1 जुलाई, 2016 को भारतीय सेना की एक महत्वपूर्ण पलटन ‘9 पैरा स्पेशल फोर्सेस’ अपना 50वाँ स्थापना दिवस बड़े उत्साह और गर्व के साथ मना रही थी | सेना से सेवा निवृत हुए बहुत से अधिकारी भी सपरिवार इस महाकुम्भ में भाग लेने के लिए देश- देश से आए हुए…

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भारतीय वैज्ञानिक 

भारतीय वैज्ञानिक      मैं ऋषि कणाद का अनादि कण, हूँ सूक्ष्म किन्तु न मेरा कोई अंत,   मैं देता ज्ञानी आर्यभट्ट सा जगत को शून्य का तत्व, सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण क्यों होता है सुलझाता मेरा तत्त्व,   मैं रसायनशास्त्री नागार्जुन का रसरत्नाकर, अलग-अलग धातु से स्वर्ण बनाऊ ऐसा मैं जादूगर,   मैं योगाचार्य ऋषि पतंजलि…

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राष्ट्रभाषा हिन्दी का संघर्ष

राष्ट्रभाषा हिन्दी का संघर्ष आज हिंदी बहुत इतरा रही थी।सुबह से ही शुभकामनाओं का मानो तातां ही लगा हुआ था।व्हाट्सएप, फेसबुक, न्यूज चैनल आदि सभी जगह बस हिंदी की ही प्रशंसा।प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, बड़े-बड़े सेलिब्रिटी सभी आज हिंदी के महिमा मंडन में ही लगे थे।हिंदी ने तो आज कोरोना, रिया यहाँ तक कि कंगना को भी…

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मासिक धर्म को हीन दृष्टि से देखने वाले समाज में रोशनी के किरण बनते ये युवा

मासिक धर्म को हीन दृष्टि से देखने वाले समाज में रोशनी के किरण बनते ये युवा मासिक धर्म एक सामान्य प्रक्रिया है और प्रकृति की महिलाओं को देन है , महिलाओं को प्रकृति ने नव सृजन का जो वरदान दिया है वह मासिक धर्म के बग़ैर संभव नहीं है । परंतु उसी मासिक धर्म के…

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संस्मरण प्रेमचंद जी के परिवार का

संस्मरण प्रेमचंद जी के परिवार का बचपन में पांचवीं, छटी से ही पुस्तकों में दिनकर, महादेवी वर्मा,मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जिनके नाम का तिराहा आज भी है, डॉ राम कुमार वर्मा, हरिवंश राय बच्चन जी जो इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के “अंग्रेज़ी डिपार्टमेंट , फ़िराक़ गोरखपुरी जी भी अंग्रेज़ी डिपार्टमेंट के हेड रहे पर दोनों…

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भारतीय मुक्ति-संग्राम में प्रेमचंद साहित्य का योगदान !!

भारतीय मुक्ति-संग्राम में प्रेमचंद साहित्य का योगदान !! किसी काल-विशेष के साहित्य में उस युग की विशेषताएँ प्रतिबिंबित होती रहती है। उसमें मूल मानवीय प्रवृत्ति और जातीय सांस्कृतिक स्थितियों एवं सामाजिक-राजनीतिक संघर्षों के चित्र भी देखे जा सकते हैं। यदि साहित्य समाज का दर्पण है तो इसमें देश तथा समाज की राजनीतिक स्थिति का विवरण,…

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बेटियाँं

बेटियाँं बेटियाँ—उफ़!ये बेटियाँ क्यों इतनी प्यारी होती हैं बेटियां? पिता की लाडली मां की आंखों की नूर होती है बेटियां क्यों इतनी प्यारी होती हैं बेटियां? कभी पकड़कर आँचल माँ का चलती थी लड़खड़ाते कदमों से हो जाती हैं सयानी क्यों इतनी जल्दी ये बेटियाँ? सखियों सी माँ के साथ खिलखिलाती हैं बेटियाँ पिता की…

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क्या महिलाएँ जानती हैं अपने सुरक्षा कानून..?

क्या महिलाएँ जानती हैं अपने सुरक्षा कानून..? अजीब विडंबना है कि हमारे देश में जहां स्त्रियों को देवी का दर्जा दिया जाता है,वहीं स्त्रियों की सुरक्षा दिन प्रतिदिन खतरे में पड़ी दिखाई दे रही है। 21वीं सदी में जब महिलाएँ अपने अधिकारों को पाने की कोशिश में हैं और हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ…

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बड़ी बहू

बड़ी बहू “अरे सुनती हो अम्मा! सोनू मोनू के लिए बड़ा अच्छा रिश्ता मिल रहा है।” राम प्रसाद जी ने मां को बड़ी प्रसन्नता से बताया। उनका एक एक अंग उनकी प्रसन्नता को प्रकट कर रहा था। मां अपनी बहू को आंख के इशारे से पास में बुलाती हुई बोली,”अरे किसने बताया है रिश्ता और…

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हिंदी है भारत की कला व संस्कृति की पहचान

हिंदी है भारत की कला व संस्कृति की पहचान विश्व करे इसका सम्मान । संस्कृत की बेटी हिंदीभाषियों की है शान। भारतीय कला व संस्कृति की यही है पहचान । तभी तो भारतेंदु ने लिखा था। – निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति कौमूल, बिनु निज भाषा ज्ञान के मिटै न हिय कौ सूल ।…

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