आया है मौसम प्यार का

आया है मौसम प्यार का   हरे-भरे पहाड़ों पर बर्फ का गिरना नदी का कल-कल प्रवाह चिड़ियों का चहचहाना सरसों की बालियों का खेत में इठलाना आम में मंजरियों का आना गेहूं और ज्वार का पकना रंग-बिरंगे फूलों से धरा का सजना तितलियों का मंडराना भौरों का गुनगुनाना मंद- मंद बहती बासंती बयार का गीत…

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निर्मला : एक औरत

निर्मला : एक औरत मुंशी प्रेमचंद, जो कि कलम के सिपाही, के नाम से भी जाने जाते हैं, ने हिन्दी साहित्य की अभूतपूर्व सेवा की है। उर्दू और हिन्दी में लिखी उनकी 300 कहानियों और करीब 45 उपन्यासों ने सौ वर्षों से अधिक समय से साहित्य प्रेमियों को गुदगुदाया है, उत्साहित किया है, प्रेरित किया…

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जन्मजात शासिका- कैथरीन द ग्रेट ऑफ़ रसिया

जन्मजात शासिका- कैथरीन द ग्रेट ऑफ़ रसिया “कैथरीन द ग्रेट” के नाम से जानी जाने वाली,रूस की सबसे अधिक प्रसिद्ध तथा सर्वाधिक समय तक शासन करने वाली साम्राज्ञी थी कैथरीन! उसने 9 जुलाई 1762 से लेकर मृत्यु पर्यन्त शासन किया। उसका शासनकाल “रूस का स्वर्णयुग” कहलाता है। कैथरीन द्वितीय का जन्म प्रुसिया में हुआ था।…

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स्त्री मूर्ति नहीं है

“स्त्री मूर्ति नहीं है “ हर रोज कई सवाल कई नजरों के बीच से गुजरती है निर्भयाएं । कहीं बचतीं हैं नजरों और सवालों से , कहीं लड़तीं हैं नजर और सवालों से , निर्भयाएं हर रोज लड़तीं हैं एक युद्ध अपनी पहचान के लिए । ऐसा युद्ध जहाँ सीधे रास्ते भी जाने क्यों बार-बार…

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पहली मुलाकात

पहली मुलाकात आंखों की शोखियां लरजते लब जाने क्या कह रहे थे चुपके से कुछ तो राज था गहरा उस शरारती मुस्कान के पीछे सुरमुई शाम की आगोश में कोई नूर सी जगमगाहट तेरे चेहरे पे पोशीदा सी थी मोगरे की खुशबू से लबरेज रेशमी घटाओं से टपकती शबनम की बूंदे अल्हड़ मस्त मंद मुस्कुराती…

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कोरोना बेचारगी और विडम्बनाएं

कोरोना बेचारगी और विडम्बनाएं कैसा खुलासा था हमारी बेचारगी का कि मिटाने के लिए स्थानीय श्रमिकों की भी भूख शुरू किया जा रहा था दुबारा भवन निर्माण जब तक इसकी चर्चा हो रही थी दूरस्थ भोपाल में ठीक था सब बहुत परेशान थीं शहर की एक अग्रणी कवयित्री अंतर राष्ट्रीय ख्याति की घूम रही थीं…

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गृहस्वामिनी दीपोत्सव

  गृहस्वामिनी दीपोत्सव गृहस्वामिनी परिवार के प्रत्येक सदस्य ने अपने परिवार के साथ साथ एक दूसरे से तस्वीरे शेयर कर मनाई दीपावली। एक दीप तुम प्यार का, रखना दिल के द्वार, यही दीप का अर्थ है, यही पर्व का सार।। दीप हृदय में कर गये, खुशियों का बौछार, आज प्रेम से हम करें, दीपों का…

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मेरे अंतस के बुद्ध

मेरे अंतस के बुद्ध बुद्ध ना सिर्फ कपिलवस्तु में थे और ना ही मात्र कुशीनारा में, बल्कि वो तो सदैव से ही साधनारत थे मेरे भी मन की सुप्त गुफाओं में, क्योंकि महसूस करती हूं मैंने भी अक्सर वो असहनीय वेदना जो बूढ़े , बीमार और लाचार को देख कर उमड़ती है, गरीबों की दयनीयता…

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एक पेड़ लगाएं

एक पेड़ लगाएं जीवन निर्भर जिस प्रकृति पर उसका ही किया अपमान देखो मानव तुमने कैसा किया अपना ही नुकसान विपदा का कारण तुम हो,तुम ही हो वह मनुष्य महान प्रकृति से किया छेड़छाड़ अब क्यों दे वो तुम्हें मान अब तो समझो प्रकृति का संदेश तुमने किया गलत है काम मानव अब तो बदलो…

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देश अपना

देश अपना देश हो चाहे जैसा भी, अपना देश होता है अपना l बहुतों जाते विदेश आजकल, ले आँखों में समृद्धि का सपना l है अवश्य पूर्ण अधिकार उनको, करने का अपने भाग्य की रचना l परन्तु, देश हो चाहे जैसा भी, अपना देश होता है अपना l हजारों अपने स्वार्थ के लिए, करते स्वीकार…

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