जाना है बहुत दूर

जाना है बहुत दूर आज उम्र के इस पड़ाव पर आकर अपने बारे में कुछ सोचने की कोशिश करती हो तो मेरा बचपन सबसे पहले मुझे याद आता है । मेरा जन्म कलकत्ता में हुआ था। मेरे माता पिता शिक्षित और बहुत संस्कारवान थे । परिवार में कोई चीज की कमी नहीं थी और हमें…

Read More

मां के सपने

मां के सपने कितने सपने संजोए थे तूने, हम सबके संग, कितने सपने थे तुम्हारी आंखों में, कितनी कल्पनाएं थी, तुम्हारे आंखों में चमक, जिन्दगी जीने की ललक, एक उल्लास मन में लिए, सबको संवारा बड़ी लगन से, अपनी सजग नयन से, कई सपने भी टूटे, फिर भी !! तुम मुस्कुराती रही, हम-बच्चों के संग,…

Read More

Father’s Day

मेरे आदर्श और मैं उनकी छाया पापा के बारे में मैं क्या कहूं। दुनिया के सबसे अच्छे पिता थे। मेरे सबसे अच्छे मित्र सबसे अच्छे सलाहकार और सबसे अच्छे मार्गदर्शक थे। मैं जो कुछ भी हूं उन्हीं के कारण हूँ।पिता जी की सबसे अच्छी बात थी कि वह अपने बच्चों के साथ समय बिताते थे…

Read More

यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

Read More

गुदड़ी के लाल – शास्त्री जी

गुदड़ी के लाल – शास्त्री जी उस छोटे से शहर में लाल बहादुर की स्कूली शिक्षा कुछ खास नहीं रही। लेकिन गरीबी की मार पड़ने के बावजूद उनका बचपन पर्याप्त रूप से खुशहाल बीता। उन्हें वाराणसी में चाचा के साथ रहने के लिए भेज दिया गया था ताकि वे उच्च विद्यालय की शिक्षा प्राप्त कर…

Read More

निर्बाध प्रेम

निर्बाध प्रेम भादों की नदी-सी बहती .. हृदय की प्यास है प्रेम . भावना का उफान मात्र नहीं! अनुभूति की सच्चाई से भरी… पानी में नमक के एकाकार -सा … स्वाति के बूंदों की बेकली से प्रतीक्षा चातक का हठ है प्रेम ! विरह के बिना उपजता नहीं यह सभी विकारों को भस्म कर देने…

Read More

यह कैसी आज़ादी

यह कैसी आज़ादी *********************** देश की आजादी को आज पूरे हुए बहत्तर बरस लेकिन आज भी आधी आबादी आजादी को रही तरस मंदिर हो या रेलवे स्टेशन लगा भिखारियों का तांता मौलिक सुविधाओं से जिनका दूर दूर तक नहीं है नाता दिहाड़ी मजदूरी, आधी तनखाह काम कर रहे मेहनतकश हालात देखकर इनके लगता गुलाम है…

Read More

आदित्यपुर में बदलता पर्यावरण और हम

आदित्यपुर में बदलता पर्यावरण और हम झारखंड के सरायकेला खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड में आदित्यपुर क्षेत्र आता है l बीसवीं सदी तक आदित्यपुर में गाँव का वजूद मौजूद था l पेड़-पौधे थे, हरियाली थी और साफ-सुथरे जल स्त्रोत मौजूद थेl वर्तमान समय में आधुनिकीकरण और औद्योगिकीकरण की अंधी दौड़ में यह सब कुछ धूमिल…

Read More