अच्छा लगता है

अच्छा लगता है लॉकडाउन में घर पर रहना। अच्छा लगता है। शांत अवनी, स्वच्छ आकाश। शुद्ध पवन करे प्रदूषण नाश। स्वच्छ समीर तन में भरना। अच्छा लगता है। शांत हुआ शोर वाहन का । चहचहाना चिड़ियों का। चिन्ता नही किसी काम का सुबह सबेरे योगा करना। अच्छा लगता है। शाकाहारी घर का खाना। ना होटल,ना…

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शुभेच्छा

शुभेच्छा संप्रेषित कीजै सब अभिव्यंजनाएं साकार होवें सब मधुर कल्पनाएं खंडित हो जाएं कलुषित वर्जनाएं नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ।। पल्लवित हों सम्यक संकल्पनाएं झेलनी न पड़े कभी अवहेलनाएं स्पर्श करे नहीं आपको प्रवंचनाएं नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ।। कलम से निर्गत हों अधिसूचनाएं नाम से जारी हों कई परियोजनाएं संयमित वाणी त्यागे…

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गाँधी का शिक्षा दर्शन : कितना प्रासंगिक

गाँधी का शिक्षा दर्शन : कितना प्रासंगिक महात्मा गाँधी के विराट् व्यक्तित्व का प्रभाव भारतीय मानस पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्श जीवन से कम नहीं है. अल्बर्ट आइंस्टीन ने सही कहा था कि आने वाली सदियां विश्वास नहीं करेंगी कि गांधी जैसा हाड़ मांस का कोई पुतला इस धरती पर चला होगा।राष्ट्र पिता मोहन…

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तुम स्वयं उपमान हो

माँ! मेरे यह गीत सारे,आज तुझको हैं निवेदित मन के मेरे भाव निर्मल,तेरे चरणों में हैं प्रेषित शीत की ऊष्मा हो माते और हवा सा प्यार हो स्नेह का सागर समेटे, तुम दैवीय उपहार हो जो मेरा जीवन है गुंजाता,तुम वो अनहद गान हो क्या तुम्हें उपमा मै दूँ माँ,तुम स्वयं उपमान हो जीवनशाला का…

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अयोध्या नगरी

अयोध्या नगरी अयोध्या भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक अति प्राचीन धार्मिक नगर है। यह नगर पवित्र सरयू नदी के किनारे पर बसा हुआ है। इसे ‘कौशल देश’ भी कहा जाता था। अयोध्या बौद्ध धर्म, हिन्दू धर्म का पवित्र और प्राचीन तीर्थ स्थल में से एक है जैन धर्म का शाश्वत तीर्थक्षेत्र है। यह…

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लॉकडाउन

लॉकडाउन कोरोना वैश्विक महामारी ने हम सब के जीवन को रोक सा दिया है । सब कुछ बंद है, आवागमन ,व्यापार , पर्यटन , उद्योग धन्धे , होटल रेस्टोरेंट , सिनेमा उद्योग , नौकरियां आदि । सब कुछ वर्क फ्रॉम होम हो गया है चाहे वह शिक्षा यो या सरकारी , प्राइवेट काम काज ।…

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नहान

नहान नहान…! ट्रैन के डब्बे की उमसभरी घुटन से जानकी बेहाल थी। रह रहकर पसीने और कडवे तेल का मिला जुला भभका आता और नथुनों में समा जाता। यह तो कहो उसे और विशम्भर जी को खिड़की के पास वाली सीट मिल गयी थी। बाहर से आती ताज़ी हवा से कुछ राहत थी। भीतर तो…

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एक पाती पिता के नाम

एक पाती पिता के नाम देखा है आपने कभी? फल-भार से युक्त किसी विटप को, मीठे बीज-कोशों को अपने, जो भूमि पर बिखेरकर, खुश होता है बच्चों को चखता देख। उसके पल्लव बयार संग डोल, दर्शा रहे हों मानो उसी आमोद को। उसी पुष्पद की तरह विशाल, छायादार छवि पिता की , जिसकी छाँँव तले…

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