अयोध्या केस

अयोध्या केस (1528 विवादित ढांचा के निर्माण से लेकर 2024 भव्य राम मंदिर तक…) अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। 22 जनवरी को भव्य राम मंदिर में रामलला को विराजमान कराया जाएगा। इस कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के कई दिग्गज नेता, अभिनेता, कलाकार व उद्योगपतियों…

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Food In Train

जाने क्या है IRCTC की यत्रीयों के लिए खाने की ऑनलाइन बुकिंग की नयी योजना

ट्रेन मेंअपनी सीट पर मंगवाना चाहते हैं फ़ूड , IRCTC एप्रूव्ड के इस ऐप से करें ऑनलाइन ऑर्डर। लंबी दूरी की यात्रा में IRCTC ट्रेन में भी भोजन मंगवाने की सुविधा देता है।  इसके लिए इसने देशभर में बहुत से रेस्टोरेंट्स के साथ पार्टनरशिप की है।  यात्रा शुरू करने या यात्रा के दौरान आप Food…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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सतरंगी संस्कृति के रंग

सतरंगी संस्कृति के रंग होली की फगुनाहट हवा में घुल रही है घुलनी भी चाहिए…… साल भर बाद होली आ रही है । पर क्या इस बार भी केवल बचपन की मधुर स्मृतियों के रंगो से ही होली खेली जाएगी या यादों के झरोखों से बाहर गली में भी झाँकना ताकना होगा? क्या सिर्फ़ गुज़रे…

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जी ले कुछ पल अपने लिए

जी ले कुछ पल अपने लिए थम चुका वक़्त की बर्फीली हवाओं का दौर पिघल चुकी संघर्षों की बदली भागमभाग की चट्टानें शोर था विकट, घनघोर निकट, एक सूक्ष्मतम तंतु ने भेद डाले, असमंजसों के जाल अर्श से पाताल? मनुष्य! कुछ थमो तुम, करो आत्ममंथन मथा ज्यूं समुद्र को, पाया अमृत समुद्रमंथन असुर है! यह…

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गृह दाह

गृह दाह हिंदी साहित्य के एक आधार स्तभं और अभिन्न अंग के रूप में मुंशी प्रेमचंद की ख्याति केवल भारत ही नहीं अपितु विश्व भर में फैली है। अपने सरल, सहज और स्वाभाविक लेखन से उन्होंने जनमानस के हृदय पर भारत के समाज ,उसके संस्कार , रिवाजों , आदर्शों के साथ – साथ भावपूर्ण कथाओं…

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अब नहीं, तो कब ?

अब नहीं, तो कब ? बस के बगल वाली सीट बहुत देर से खाली थी। बस खुलने में अभी सात-आठ मिनट और रहे होंगे। खिड़की से बाहर की गहमा गहमी देख रही थी मृदुला। ऐसे हमारे यहाँ जैसा शोर वहाँ नहीं है। हमारे यहां तो चीखते खोमचे वाले, व्यस्त कुली, शोर करते बच्चे, झगड़ते परिवार…

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अरमान

अरमान वो इंजीनियर थी, घर वालों ने कभी पढ़ने से मना नहीं किया। और वह मैट्रिक पास। वो अंग्रेजी बोल – पढ़ – लिख लेती थी और वह केवल टूटी-फूटी हिन्दी और तेलगू बोल लेता था। वो बिजनेस समझती थी, कहाँ क्या बोलना है, किससे क्‍या फायदा हो सकता है। वह सीधा था, सब पर…

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इस बार यूँ होली

इस बार यूँ होली कुछ सतरंगी सी चाहत यूँ आज मचल रही है जैसे इस फागुन होली अनकही भी कह रही है मेरी हसरतों को यूँ निखार देना तुम ले सूरज की धूप सूनहरी मेरी गालों पे लगा देना तुम सजा देना माँग मेरी पलाश के सूर्ख लाली से जो चूनर ओढ़ लूँ मैं धानी…

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