दिवाली का घरौंदा

दिवाली का घरौंदा मान्यताओं के अनुसार दीपावली प्रभु राम के चौदह वर्ष के वनवास के बाद पुनः अयोध्या नगरी लौटने पर मनाया जाता है। घर घर मिट्टी के दिए, वंदनवार ,रंगोली की सजावट से उनके आगमन की खुशी का इजहार करना ही उद्देश्य होता है। उस वक़्त को आज भी कुछ नए तौर तरीकों से…

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आजादी

आजादी ———– मुस्कुराती हुई हवाऐं, घाटी कश्मीर से आ रही। मुक्त हुई हूँ ,आज, हो स्वच्छंद बह रही। नयी भोर में उदित, सूर्य ये कह रहा, खुलकर लो प्रकाश, ना कोई रोकने वाला। कई बेड़ियाँ टूट गई, जन्नते कश्मीर की। ना आतंक ना भय होगा। पावन पवित्र जन्नत होगा। शिक्षा,धन,दौलत से, ये शहर पूरित होगा।…

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Christmas

CHRISTMAS The happiest season is here again, shielded faces can’t stop us from recapturing, that brightest star that led to the three wise men, to find the Christ that was born in Bethlehem. Heaven and nature sing; Joy to the World the Lord has come! Christmas, it’s Christmas, time to love! Humanity is wanting for…

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मैं बोल रही हूँ

मैं बोल रही हूँ शाम के तीन बज चुके थे। सेमिनार खत्‍म होने में एक घंटा और था। स्‍मृति सामने बैठकर सुन रही थी। कमरे में अच्‍छी खासी भीड़ थी। ज्‍यादातर अभी अभी कॉलेज से निकले युवा थे। इस सेमिनार में डॉ.. त्‍यागी, मधुसूदन गुलाटी भाई अग्रवाल और न जाने कितने नामी गिरामी लोग थे।…

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सुन लें

सुन लें आज ‘ऑटिज्म डे ‘है।यह भयंकर बीमारी है।सजग नहीं होने पर विकराल रूप ले लेता है।यह मानसिक रोग है।इससे ग्रसित बच्चे का मानसिक विकार के कारण विकास रूक जाता है। सामान्य बच्चों की अपेक्षा इन बच्चों का विकास बहुत धीमे गति से होता है। ऑटिज्म के बहुत कारण होते हैं।गर्भ काल में माँ की…

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सम्पादकीय

सम्पादकीय सर्वप्रथम गृहस्वामिनी के सुधी पाठकों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं । ‘गतवर्ष के तजुर्बात हों ,उत्कर्ष में विश्वास हो , गतवर्ष तो एक अंत है,नव वर्ष शुभ शुरुआत हो।’ यह गृहस्वामिनी का आज़ादी विशेषांक है अतः आज़ादी पर ज्ञानवर्धक आलेख एवं सुन्दर कविताओं से यह अंक सुसज्जित है ,और हो भी क्यों न…

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“कलम आज उनकी जय बोल “

“कलम आज उनकी जय बोल “ प्राण हाथों मे हैं लेकर रहते निडर दुश्मन से भीड़ हैं जाते रक्षा थल वायु जल में करते देश पे जान न्यौछावर जय बोल कलम आज उनकी जय बोल दृढ़ संकल्प वीरता भाषा उनके त्याग तपस्या से वे ना मुख मोड़े निश्छल जीत उनके मन लुभाये माता भारती उनके…

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मेरी कहानी

मेरी कहानी शाम का धुंधलका और एक सोलह साल की लड़की अपनी किताबों की दुनिया में खोई अपने को रानी झाँसी समझ रही थी तभी उसके कानों में पिता के शब्द पड़े जो माँ से कह रहे थे की ऐसा रिश्ता जल्दी नहीं मिलेगा ।माँ का जवाब था अरे अभी वो छोटी हैं और फिर…

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तुम पास नही फिर भी पास हो

मेरी माँ, माँ तुम पास नही फिर भी पास हो, माँ तुम हमेशा उस जहां में भी जा कर मेरे पास हो, तुम्हे क्या लिखूं माँ आपने हमे लिखा है। मैं कभी सोची ही नही थी एक दिन मैं आपसे कभी दूर जाउंगी मुझे याद है वो दिन जब मेरी शादी ठीक हुई थी और…

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