A Nondescript Thought

A Nondescript Thought One of the noticeable and remarkable annual events,World Environment Day(WED) is being organised in all the Continents since1972.It is one of the Dream if Not Cream initiatives of the UNO.It aims at creating adequate awareness about importance of nature,the nature which surrounds us,the nature that comprises of Bio-diversity. The components thereof, are:…

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पुनः पर्यावरण चिंतन

पुनः पर्यावरण चिंतन ५ जून विश्व पर्यावरण दिवस के नाम समर्पित है। फिर वही पत्र-पत्रिकाओं में कुछ संबंधित चित्र, आलेख, संचार माध्यमों में कुछ चर्चा- परिचर्चा, कुछ सरकारी घोषणाएं और कार्यक्रम। आवश्यकता है हम आमजन पर्यावरण को इसके स्थूल रूप से पृथक इसके वास्तविक रूप में ग्रहण करें। पर्यावरण के जैविक संघटकों में सूक्ष्म जीवाणु से लेकर…

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कैसे रहा जाए बी पॉजिटिव?

कैसे रहा जाए बी पॉजिटिव? जब चारों तरफ मचा हो हाहाकार, पूरे विश्व में कोरोना नाम के इस मर्ज ने आफत मचा रखी है।वैज्ञानिकों की एक साल की मेहनत,वैक्सीन के रूप में मिली है लेकिन अभी भी पूर्णत संतुष्टि नहीं मिल पाई । लोग वैक्सीन लेने के बाद भी इस रोग की चपेट में आ…

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नवगीत की सशक्त हस्ताक्षर- शांति सुमन

नवगीत की सशक्त हस्ताक्षर- शांति सुमन जिनका व्यक्तित्व सुगंधित फूलों का बगीचा है, जिनकी शाब्दिक अभिव्यक्ति में शांति का संदेश है, जिनकी कलम किसी अदृश्य को सदृश्य से जोड़ती है, जिनकी भावाभिव्यक्ति में उन्मुक्त कंठ की जादूगरी है , जिनके शब्दों में खो जाता है सुनने वाले का मन ऐसे स्वनाम धन्य है आदरणीय शांति…

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ओ नरभक्षी

ओ नरभक्षी 1. ओ विषाणु, सुन, तुझे रक्त चाहिए आ, आकर मुझे ले चल मैं रावण-सी बन जाती हूँ हर एक साँस मिटने पर ढेरों बदन बन उग जाऊँगी तू अपनी क्षुधा मिटाते रहना पर विनती है जीवन वापस दे उन्हें जिन्हें तू ले गया छीनकर मैं तैयार हूँ आ मुझे ले चल। 2 ओ…

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मैं बुद्ध नहीं होना चाहती

मैं बुद्ध नहीं होना चाहती बुद्ध हो सकती थी मैं—- पर मैंने पति को भगवान मान लिया उसकी चाह, उसकी ख़ुशी को अपना सम्मान मान लिया छोड़ दूँ नवजात को ,रात सुनसान , है अंधेरा तू माँ कहलाने लायक़ नहीं , हृदय पाषाण है तेरा बूढ़े सास ससुर , जिनकी सेवा का मिला था उपदेश…

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मैं “बुद्ध” न बन पाई

मैं “बुद्ध” न बन पाई आसान था तुम्हारे लिए सब जिम्मेदारियों से मुहँ मोड़, बुद्ध हो जाना , क्यूंकि पुरुष थे तुम। एक स्त्री होकर बुद्ध बनते, तो जानती मैं । जिस दिन “मैं” के अन्तर्द्धन्द पर विजय मिल जाएगी निर्वाण की राह भी बेहद सुगम हो जाएगी। सब त्याग कर तुमने उस “मैं” पर…

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तुम लौट आओ

तुम लौट आओ हे बुद्ध तुम लौट आओ क्योंकि तुमने कहा था “ईर्ष्या या घृणा को प्रेम से ही खत्म किया जा सकता है” पर असंवेदनशील आत्माओं के साथ जी रही मानव जाति भूल चुकी है किसी से भी निःस्वार्थ प्रेम करना लौटकर अब तुम प्रेम क्या है इन्हें फिर से याद दिलाओ हे बुद्ध…

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मेरे अंतस के बुद्ध

मेरे अंतस के बुद्ध बुद्ध ना सिर्फ कपिलवस्तु में थे और ना ही मात्र कुशीनारा में, बल्कि वो तो सदैव से ही साधनारत थे मेरे भी मन की सुप्त गुफाओं में, क्योंकि महसूस करती हूं मैंने भी अक्सर वो असहनीय वेदना जो बूढ़े , बीमार और लाचार को देख कर उमड़ती है, गरीबों की दयनीयता…

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