भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- प्रोफेसर यशपाल
प्रोफेसर यशपाल- स्काई लैब अंकल किसी भी देश अथवा जाति के लिए आजादी बहुत महत्वपूर्ण होती है। एक आजाद देश ही अपना विकास, अपने नागरिकों का सही अर्थों में उन्नयन उनकी आवश्यकताओं तथा अपेक्षाओं के अनुरूप कर सकता है। लगभग 200 वर्षों तक गुलाम रहने के बाद हम आजाद हुए थे। यह आजादी कठिन संघर्षों…
महिलाओं में क्यों होती है आयरन डेफिशिएंसी
महिलाओं में क्यों होती है आयरन डेफिशिएंसी 1. पीरियड्स के दौरान ब्लड लॉस पीरियड्स में सामान्य तौर पर आपका 80 मिलीलीटर खून निकलता है।अच्छी डाइट से इस लॉस को रिकवर किया जा सकता है। लेकिन अगर आपको ज्यादा ब्लीडिंग होती है, पीरियड्स 5 से 7 दिन के होते हैं या डाइट में आयरन युक्त भोजन…
रत्न बड़े अनमोल
रत्न बड़े अनमोल- ————————- औषधि मणि मंत्राणाम्, ग्रह-नक्षत्र तारिका। भाग्यकाले भवेत् सिद्धिः , अभाग्यं निष्फलं भवेत ।। अर्थात, औषधि, मणि(रत्न) एवं मन्त्र, ग्रह-नक्षत्र जनित रोगों को दूर करते हैं। यदि समय सही है तो शुभ फल प्राप्त होते है, जबकि विपरीत समय में ये…
वन्दें मातरम्
वन्दें मातरम् _____________________________________ आओ बच्चों तुम्हें सिखाएं जीवन है श्रमदान की माँ भारती की मिट्टी है मिट्टी है बलिदान की वन्दें मातरम् वन्दें मातरम् पावन पुण्य प्रेम धरा है अन्न धन से पूर्ण भरा है माँ भारती की रक्षा करना रक्षा गृह किसान की वन्दें मातरम् वन्दे मातरम् लहरों पर कश्ती खेना तुफ़ा दीया जला…
एक नई सुबह
एक नई सुबह माना गहरा है रात का अंधियारा, है घोर तमस, नहीं गगन में एक भी तारा, छुप गया चाँद भी, ग़मों की बदलियों में, सुबक पड़ी चांदनी, बादलों का लेकर सहारा। माना तूने खोया प्यार जीवन का, कहां गया वह हँसता चेहरा, वह मीठी बातें, वह साथ तुम्हारा। इस बेरहम महामारी ने, तोड़…
किश्ती और तूफ़ान
किश्ती और तूफ़ान हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के , इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के | तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के , इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के | जैसे जैसे एक और गणतंत्र दिवस निकट आता जा रहा है, मेरी स्मृति के पटल पर…
चाहत चाय की
चाहत चाय की गुदगुदाती सर्द तन को, ताप देती है बदन को, भोर की स्वर्णिम लाली। उसपे गर्म चाय की प्याली तन को देती सुकून निराली। चाय में घुलता मिठास, जब अपनो का हो साथ। चाय की हर गर्म चुस्की, होठों पे बिखेरतीं मुस्की, हर घूंट पियूषा सा लागे जब चाय की चाहत जगे। फूर्ति…
एक लड़की थी…
एक लड़की थी… शरारती किस्से वो फ़ोन पर सुनाया करती थी एक लड़की थी मुझे गोद में सुलाया करती थी बिन बाबा के कैसे बीती थीं उसकी माँ की रातें कुछ बेचैनियाँ थीं सिर्फ़ मुझे बताया करती थी डर मेरी उल्फ़त से था, कोई और पसंद था उसे इसी बात पर ज़्यादा खुद को रुलाया…