छठ सिखाता है – डूबना अन्त नहीं है

छठ सिखाता है – डूबना अन्त नहीं है छठ पूजा को महापर्व के नाम से अलंकृत किया जाता है। इसकी उपासना से आत्मिक उत्कर्ष के साथ परिवार के सुख सौभाग्य में वृद्धि होती है।कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला महनीय पर्व है।सूर्योपासना के यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से बिहार…

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यू आर माय वैलेंटाइन

    यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और…

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बुद्ध

बुद्ध “बुद्धं शरणं गच्छामि ऽऽऽ, धममं शरणं गच्छामि ऽऽऽ, संघं शरणं गच्छामि ऽऽऽ॥” महलों में पाया जन्म भोगी विलासी ना बने बुद्ध थे वे, सब त्याग वनवासी हो चले। बैठ वर्षों तप किया आत्मज्ञान प्रज्ज्वलित हुआ बोधिवृक्ष की छाया में बुद्ध वचनों से शिष्यों का उद्धार हुआ। उपदेश से उनके प्रभावित हो त्याग हिंसा की…

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राष्ट्र निर्माण में चित्रगुप्त-समाज का योगदान

राष्ट्र निर्माण में चित्रगुप्त-समाज का योगदान भगवान श्री चित्रगुप्त जी महाराज कायस्थों के पूर्व पुरुष एवं कुल देवता हैं।(स्कंदपुराण) वह स्वर्ग में धर्मराज के दरबार के महालेखा अधिकारी हैं और प्राणियों के धर्माधर्म कार्यों का लेखा-जोखा रखते हैं। वे मेधा के अधिष्ठाता देवता हैं। उन्हें धर्मराजपुरी का न्यायाधीश कहा जाता है। वह धर्म को जानने…

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शहीद-ए-आजम

शहीद-ए-आजम ” वेदना में एक शक्ति है, जो दृष्टि देती है। जो यातना में है, वह द्रष्टा हो सकता है।”- यह अज्ञेय द्वारा रचित “शेखर एक जीवनी- भाग एक” पुस्तक की पहली पंक्ति है। सत्य है, वेदना मनुष्य को अन्याय का प्रतिकार करना, उसके विरुद्ध मोर्चा लेना और कभी -कभी जान की कीमत लगा कर…

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अपनी शक्ति पहचानो

अपनी शक्ति पहचानो निर्भया ! अब जागो डरो नहीं, तुम उठो अपनी शक्ति पहचानो कब तलक दामिनी सी अपना मुँह छुपाओगी कोई राम हनुमान नहीं आएँगे बचाने वानर सेना भी तुम बना नहीं पाओगी कृष्ण भी चीर ना बढ़ाएगा राम के रहते भी हरी गई थी सीता दुःशासनी दुनिया में अंधे तो थे ही अब…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- प्रोफेसर यशपाल

प्रोफेसर यशपाल- स्काई लैब अंकल किसी भी देश अथवा जाति के लिए आजादी बहुत महत्वपूर्ण होती है। एक आजाद देश ही अपना विकास, अपने नागरिकों का सही अर्थों में उन्नयन उनकी आवश्यकताओं तथा अपेक्षाओं के अनुरूप कर सकता है। लगभग 200 वर्षों तक गुलाम रहने के बाद हम आजाद हुए थे। यह आजादी कठिन संघर्षों…

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अयोध्या – ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत

अयोध्या – ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत मानव सभ्यता के विकास के साथ साथ जीवन पद्धति में भी अनेक परिवर्तन आते रहे। पाषाण युग से वर्तमान आधुनिक कही जाने वाली इक्कीसवीं सदी तक मनुष्य ने अपने खान पान, आचार विचार, रहन सहन, वेशभूषा में भी बहुत बदलाव किए हैं। जिस नदी के जल से उसकी तृषा…

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हम अब भी आज़ाद नहीं….

हम अब भी आज़ाद नहीं…. आज़ाद हो गया है भारत, हम अब भी आज़ाद नहीं, फल-फूल रहे मुट्ठीभर लोग, सारे हुए आबाद नहीं। है कहां सुरक्षित अब भी, मेरे भारत की हर बाला, वासनांध दुष्‍टों ने जिसका, जीना दूभर कर डाला, अंधेरा रात सा हिस्‍से में आया, हो सका प्रभात नहीं आज़ाद हो गया है…

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