जाड़े में जनतंत्र
जाड़े में जनतंत्र गठरी बांधे धूप की, जाड़े में जनतंत्र । शीतलहर में फूँकता,कुहरा जन में मंत्र।। रैन निहारे बस्तियाँ, बंद घरों में योग। हाड़ कँपाती ठंड में, धूप कुतरते लोग।। धुआँ रात रचता रहा,स्याही-स्याही रूप। शीत लहर में बैठकर,कुहरा बांचे धूप।। शैल शिखर को चूम कर,लेकर हिम रैवार। मधुर मदिर…