छोटा कद, ऊँचा व्यक्तित्व

छोटा कद, ऊँचा व्यक्तित्व देश को आजादी मिले बीसेक बरस हुए होंगे, जब हमने एक छोटे शहर के एक छोटे स्कूल में पढ़ाई शुरु की थी। तब देश कितनी समस्याओं से जुझारू होकर लड़ रहा है, नहीं पता था। लेकिन देश के दूसरे प्रधानमंत्री की मौत पर स्कूल के प्रांगण में एक छोटी सभा हुई…

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स्वराज एवं एक भाषा के हिमायती – महर्षि दयानन्द सरस्वती

स्वराज एवं एक भाषा के हिमायती – महर्षि दयानन्द सरस्वती महर्षि दयानन्द सरस्वती के बारे में जब चिन्तन करने लगते है तो सामान्य मनुष्य अथवा महापुरूषों के व्यक्तित्व व कृतित्व के समान चिन्तन तो करना ही होता है किन्तु यहां पर एक विशेष चिन्तन की गहनता दिखती है, जो उनका ‘ऋषित्व’ होता है। गुजरात के…

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पिता

पिता देखा है बचपन से कैसे अपनी हर ख्वाहिश को छिपा कर हम भाई बहन को दी हर सुख की छांव कभी न रुके न थके कभी न कहीं गए कभी न कोई छुट्टी बस काम और बस काम अच्छी से अच्छी शिक्षा खान पान ,पहनावा रखा हम भाई बहन का कर खुद के लिए…

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वास्तविक आजादी से दूर

  वास्तविक आजादी से दूर हम भारतवासी पिछले 70 वर्षों से आज़ादी की खुशफ़हमी में जरूर जी रहे हैं, परन्तु क्या वास्तव में हम स्वछन्द, स्वतन्त्र और निर्भीक जीवन बिता पा रहे हैं। आज भी देश का एक बड़ा वर्ग जीवन के मूलभूत आवश्यकताओं, जैसे, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्याप्त सन्तुलित आहार इत्यादि से भी वंचित है।…

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Father’s Day

मेरे आदर्श और मैं उनकी छाया पापा के बारे में मैं क्या कहूं। दुनिया के सबसे अच्छे पिता थे। मेरे सबसे अच्छे मित्र सबसे अच्छे सलाहकार और सबसे अच्छे मार्गदर्शक थे। मैं जो कुछ भी हूं उन्हीं के कारण हूँ।पिता जी की सबसे अच्छी बात थी कि वह अपने बच्चों के साथ समय बिताते थे…

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मोटेराम जी शास्त्री

मोटेराम जी शास्त्री कौआ चला हँस की चाल, अपनी भी भूल गया, प्रस्तुत पंक्ति ही जैसे आधार है मुंशी प्रेमचंद जी की हास्य कथा पंड़ित मोटेराम जी शास्त्री का। बड़े ही सरल एवं सहज भाव से इस पूरी कहानी को आकार दिया है मुंशी जी ने। बहुत ही कम पात्रों के साथ इस कहानी का…

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COVID AND HEALTH

COVID AND HEALTH As the world continues to deal with the COVID-19 pandemic at least a third of the global population continues to find itself under a so-called ‘lockdown’, while others are having to follow some form of social distancing. While many countries are considering plans to lift restrictions in the coming months, this will…

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मैं तेरी परछाई सब कहते हैं।

मैं तेरी परछाई सब कहते हैं। मैं तेरी ही परछाई हूं मेरी माँ! ऐसा सब कहते हैं पर यह कैसे संभव है माँ! मैं तेरी परछाई, कैसे हो सकती हूँ माँ ? बिना पलक झपकाए, जग कर सारी सारी रातें, मैं ने कभी तुम्हारी सेवा की है क्या माँ ? नहीं ना? फिर मैं तेरी…

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नशा

नशा कथासम्राट् मुंशी प्रेमचंदको मेरा नमन । ३१जुलाई सन् १८८०में वाराणसी के लमही गॉंव में जन्मे धनपत राय का जीवन परिवार की ज़िम्मेदारी,विमाता के क्रोध और गरीबी में बीता ।उनके ही शब्दों में-“पॉंव में जूते नथे,देह पर साबुत कपड़े न थे,महँगाई अलग थी ।दस रुपये मासिक वेतन पर एक स्कूल में नौकरी की ।” एक…

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