शिक्षा – क्या और क्यों
शिक्षा – क्या और क्यों इसी वर्ष जनवरी के महीने में एक अन्तरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस के दौरान नागालैंड के राज्यपाल पी बी आचार्य को सुनने का मौका मिला । अपने संभाषण के दौरान उन्होंने जो एक बहुत गूढ बात कही वो ये थी कि ” शिक्षित वो नहीं जिसके हाथ में सर्टिफिकेट का भंडार हो बल्कि…
अयोध्या- ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत
अयोध्या- ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत अयोध्या को प्राचीन धार्मिक सप्तपुरियों में से एक माना जाता है। सरयू नदी के तट पर बसी अयोध्या नगरी एक प्राचीन तीर्थ है,जिसका उल्लेख रामायण में मिलता है– “अयोध्या नाम नगरीतत्रासील्लोकविश्रुता”। मनुना मानवेंद्रेण या पुरी निर्मिता स्वयम् ।। (रामायण१-५-६) कहते हैं यह नगरी सूर्य के पुत्र,वैवस्वत मनु द्वारा स्थापित की…
दुनिया की पहली नारीवादी कवयित्री: सप्पो
दुनिया की पहली नारीवादी कवयित्री: सप्पो वो झुकती रही दुनिया झुकाती रही उसने सहे हैं दर्द पर मुस्कुराती रही यही दस्तूर है तो परवाह न कर नाजुक फूल नही अब तू पाषाण बन कठोर रियायतें हैं ये दुनिया की सदा पार कर हौंसले से तू आगे तो बढ़ अब सरस्वती के संग संग दुर्गा का…
छत से छाये पिता
छत से छाये पिता माँ के आशीष-फूल में तुम मनका से जड़ते रहे पिता मौसम की बौछारों में भी तुम छत से छाये रहे पिता रोके थे अपने दम-खम से दिन के सब झंझावातों को गिरने से बचा लिया हरदम तुमने सपनों के पातों को विपरीत दिशा से धूलों की रोकते रहते आँधियों को जगते…
सुनो दिसम्बर
सुनो दिसम्बर सुनो दिसंबर, यह जो वक्त की गाड़ी तुम खींचकर यहाँ तक लाए हो बहुत भारी थी मजदूरों पर, मजबूरों पर कमजोरों पर, मजबूतों पर कितनों की कमर टूटी कितनों की संगत छूटी बेबस रहा हर एक लम्हा जीवन भी रहा कुछ थमा-थमा परेशान रहे हम सभी कैद रही हर चलती साँस पर इंतजार…
स्वागत गणतंत्र
स्वागत गणतंत्र स्वागतम सुमधुर नवल प्रभात, स्वागतम नव गणतंत्र की भोर, स्वागतम प्रथम भास्कर रश्मि, स्वागतम पुन:, स्वागतम और। जगा है अब मन में विश्वास, कि सपने पूरे होंगे सकल, कुहुक कुहकेगी कोयल कूक, खिलेगा उपवन का हर पोर। युवा होती जायेगी विजय, सुगढ़ होता जायेगा तंत्र, फैलती जायेगी मुस्कान, विहंसता जायेगा जनतंत्र। कल्पनाएं सब…
Dewy Loves
Dewy Loves I’m wearing on my shoulders the coquettish autumns, as jewels, the green singing of the bird with the wide open wings, when the cunning destiny gathers us again into a syllable, it rains with soft snowfalls over the blue hours. Then I’m carrying the Gate key in my quiet hands, the boundless horizon,…