गुरू एक पथ प्रदर्शक

गुरू एक पथ प्रदर्शक वैदिक काल से शुरू हुआ गुरूकुल का प्रचलन हुआ आवश्यक है गुरू सानिध्य गुरू का हो सुंदर आशीष संसार के हर उत्तम कर्म ज्ञान औ विद्या होये संगम जन्म लेता है मानव शिशु माता पिता पाये औ सीखे सांसारिकता का ज्ञान मिले पर बिन गुरू ना दिशा मिले अक्षर ज्ञान से…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- जवाहरलाल नेहरू

जवाहरलाल नेहरू एक विशिष्ट व्यक्तित्व यदि हम भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की समीक्षा करें तो पाते हैं कि देश को आजादी दिलाने में अनेक राजनेताओं, क्रांतिकारियों देशभक्तों ,रचनाकारों,लेखकों,पत्रकारों व साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले विभिन्न महान व्यक्तियों की असीम संख्या में जवाहरलाल नेहरु जी का विशिष्ट…

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पर्यावरण

पर्यावरण हे मानव! अब क्यूँ करता है क्रन्दन? पर्यावरण दूषित करने का तू ही तो है कारण, मैं पेड़… क्या कसूर था मेरा? मैने तो दिए फल और सदा ही छाँह। और बच्चों के झूले की खातिर फैला दी अपनी बाँह। पर तुमने? काट कर मेरी शाखाएं अपंग मुझको कर दिया। घोंसलों को तरसे पंछी,…

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जागृति

जागृति हरसिंगार के छोटे छोटे फूल पेड़ों के नीचे गलीचा से बिछ गए हैं उनके फूलों की भीनी खुशबू से हवा मदमस्त ! और मदमस्त हवा अपने झोंके में गूंजते मंत्रोच्चारण को जैसे झूला झूला रही, दुर्गा मां का आगमन जो हो गया है, ढाक की आवाज आरती मेें बजती घंटियां, पावन कर रही हैं…

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वीरांगना बीना दास

वीरांगना बीना दास आज से ठीक 88 वर्ष पूर्व 6 फरवरी 1932 का दिन था, जब कलकत्ता विश्वविद्यालय के कनवोकेशन हाल में बैठे सैकड़ों लोग एक युवती द्वारा लगातार चलायी जा रही गोलियों से स्तब्ध रह गए, जिनका निशाना कोई और नहीं बल्कि बंगाल का तत्कालीन गवर्नर स्टेनले जैक्सन था। हालाँकि जैक्सन बच गया पर…

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गणतंत्र दिवस मनाएं

गणतंत्र दिवस मनाएं स्वतंत्र भारत का उत्तम संविधान गण औ तंत्र की सुंदर विवरण छब्बीस जनवरी को दिया मान तंत्र है वो विधिवत संचालन इसका अर्थ साथी सबको बतायें आइए हम गणतंत्र दिवस मनायें गणतंत्र एक है अनोखी प्रणाली भारत का है सार्वजनिक मामला नही होता यह कोई निजी संस्था ना होता ये कभी निजी…

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महिला दिवस के बहाने..

महिला दिवस के बहाने.. तू जिन्दगी का कोमल अहसास है, छुएँ तुझे तो सारा आकाश है, लगती किसी कविता सी, मन के बहुत पास कोई ,अधूरी प्यास हो तुम घर, अंगना दौड़ती ममता की छाँव बनी तुम, माँ हो, प्रिया, बहन, पत्नी, बेटी मेरी, जिन्दगी के टूटते संबंधों में , संजीवनी सी रिश्तों की सांस…

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संघर्ष ही मेरे जीवन की प्रेरणा है

  संघर्ष ही मेरे जीवन की प्रेरणा है।   क्या कहूँ, मैं कौन हूँ! कैसे करूँ, मैं स्वयं को परिभाषित! वर्षों की चिंगारियों की धुंध में, सुलगती आग, संवेदना की ज्वार हूँ। जटिल संघर्षों से उपजी, मौन अकुलाहट….! संभ्रांत, मर्यादित….. शब्दों की व्रिहद अभिव्यक्ति, “सरस व्यवहार हूँ मैं।” अपनी लिखी कविता की इन्हीं पंक्तियों के…

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गुरु महिमा

गुरु महिमा गुरु जन के उपकार बहुत है । गिनती हम नहीं कर पाते ।। पूरा जीवन कम लगता है । उनकी महिमा गाते गाते ।। कोरे कागज जैसे मन पर । गुरु ज्ञान की बात सजाते ।। सच्चा मानव कैसे बनते । पाठ हमें यह रोज पढ़ाते ।। शिखर सफलता के पाने की। राह…

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शून्य से समग्र की ओर

” शून्य से समग्र की ओर “…. इस विराट ब्रह्मांड में हमारे होने का सत्य ही यह जीवन है ।धरती पर बसे हर जीव की अपनी एक कहानी है। संवेदनाओं की अनुभूति गहरे चिंतन के बाद अभिव्यक्ति का वह भास्वर बनती है जहां पारस्परिक एकात्मकता जीवन को मजबूती प्रदान करती है। कहते जिसका जितना समर्पण…

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