रूपांतर
रूपांतर सोचती है सारा काम निपटा कर ही जाए पर हो नहीं पाता उससे। बॉस के दिए फ़ाइलों की संख्या कम है पर बहुत कुछ निपटाना है उनमें। काम मिलता उसे ज़्यादा है, जानती है वह, क्योंकि ज़िम्मेदार है, कर्त्तव्यनिष्ठ है। हरिनारायण बॉस ज़रूर हैं पर उसका कष्ट समझते हैं समझाते भी हैं। एकल अभिभावक…
संघर्ष अदृश्य शत्रु से
संघर्ष अदृश्य शत्रु से कोविद 19 एक सूक्ष्म जीवाणु जो वैश्विक आपदा के रूप में समस्त विश्व के मानव जाति को धीरे धीरे अपने शिकंजे में जकड़ता जा रहा है।एक अदृश्य शत्रु आज मानव सभ्यता के समक्ष एक चुनौती है, न केवल मानव जीवन के लिए बल्कि मानव सभ्यता द्वारा निर्मित प्रत्येक क्षेत्र पर घातक…
Holy lamentation- PIETA
Holy lamentation- PIETA The heavy and embarrassed look imprisons the sadness of the moment The mourning of life The Holy Virginity captivates and invites The inanimate Divine Body completely surrendered looks eternally youthful perpetually moving The pain of the soul overflows and the Heavenly Kingdom receives the only truth crowning with glory our passions and…
महात्मा गांधीजी के महत्वपूर्ण विचार
महात्मा गांधीजी के महत्वपूर्ण विचार सर्वप्रथम महात्मा गांधी जी के संबंध में जानकारी ;मोहनदास करमचन्द गांधी (२ अक्टूबर १८६९ – ३० जनवरी १९४८) भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की…
अतीत के साये
अतीत के साये कहानियों के कितने पात्र सदियों से हमारे आसपास इर्दगिर्द घूमते रहते हैं और न जाने कितनी कहानियां, लघुकथाएं, कितने उपन्यास लिखे पढ़ें गए, सराहे गए। कुछ धूल धूसरित हुए पड़े रहे हैं, शेल्फों में। ऐसी ही असंख्य पुस्तकें उस लाइब्रेरी में मौजूद थीं, जिन्हें बरसों से झाड़ा तक नहीं गया था, खोलकर…
माँ का मातृत्व
माँ का मातृत्व नौ महीने गर्भ से हो जाता सफर शुरू माँ का फिर जन्म देते ही उसकी सारी दुनिया घूमती सिर्फ अपने बच्चे के ही इर्द गिर्द हर आँसू, हर दर्द, हर दुःख हर तकलीफ बन जाती उसकी छोटी अपने बच्चे की मुस्कान के आगे माँ का मातृत्व ही कुछ ऐसा है जिसका न…
भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- बिरसा मुंडा
बिरसा मुंडा का उलगुलान तब भगत सिंह का जन्म नहीं हुआ था, सुभाष अपनी माँ की गोद में थे, गाँधी को अफ्रीका से लौटना बाकी था और छोटानागपुर के घने जंगलों में एक आदिवासी नवयुवक अपने सीमित संसाधनों और सेना के साथ अंग्रेजों के शासन से आजादी का बिगुल फूंक रहा था | स्वराज्य की…
प्रेमपत्र सन बहत्तर का
प्रेमपत्र सन बहत्तर का किशन आज बहुत लंबे समय के बाद तुम दिखे।समय को दिनों, महिनों और वर्षों में बाँटने की शक्ति कहाँ थी मुझमें।हर एक पल तो युग की तरह बीता था। कितने युग बीत गए इसका भान ही कहाँ रहा मुझे।मन तो सदा तुम्हें खोजता रहता था। आज तुम पर दृष्टि पड़ी तो…