मंजुला अस्थाना महंती की कविताएं

  मंजुला अस्थाना महंती की कविताएं   1.तृषित आत्मा   नैन बावरे इत उत् निहारे न जाने किस को पुकारे प्यासे नैना मरम न जाने तृष्णा क्योंकर ना पहचाने   अनजानी अव्यक्त सी मूरत कैसी होगी उसकी सूरत मन में हल चल फ़िर भी बेकल   तिष्णगी सी बढ़ती जाती हर क्षण, पल पल उत्सुकतावश…

Read More

स्त्रीयोचित गुण ही सशक्तिकरण

स्त्रीयोचित गुण ही सशक्तिकरण अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष की तरह 8 मार्च को आ गया | पिछले दिनों भारतीय महिलाओं ने शारीरिक मानसिक ,राजनैतिक आर्थिक सभी दंश झेले हैं | यौन उत्पीड़न का मानसिक त्रास , बलात्कार और घरेलु हिंसा के शारीरिक घाव ,महंगाई की आर्थिक मार , शाहीन बाग़ और दंगों के राजनीतिक…

Read More

Christmas Eve

Christmas Eve Long ago, in a far off land On a cool dark night A sudden music of choir grand A surprising wondrous sight! The angels delivered a message – A message to humankind A message in heavenly language From the heavenly Father kind: ‘Let there be Peace on earth Let humanity sing and rejoice…

Read More

ठाकुर का कुआंँ–प्रेमचंद

ठाकुर का कुआंँ–प्रेमचंद मुझे प्रेमचंद की लिखी यह कहानी ‘ठाकुर का कुआँ’ अत्यंत पसंद है।इस कहानी में अछूत संदर्भ को ही संस्पर्श करती है तथा ऊँच-नीच के भेदभाव को बड़ी ही बारीकी के साथ प्रस्तुत किया गया है। हम सब जानते हैं कि प्रेमचंद आधुनिक युग के एक महत्वपूर्ण लेखक हैं जिन्होंने दलित समस्याओं पर…

Read More

दिव्या माथुर: मेमेन्तो मोरी

दिव्या माथुर: मेमेन्तो मोरी ब्रिटेन में रहने वाली प्रवासी भारतीय हिन्दी लेखक सुश्री दिव्या माथुर से हमारी पहली मुलाक़ात सितम्बर 1999 में हुई थी, जब मैं मास्को विश्वविद्यालय में संस्कृत के प्रोफ़ेसर बोरिस जाखारयिन के साथ छठे विश्व हिन्दी सम्मेलन में भाग लेने के लिए लन्दन गई थी। दिव्या जी ने बड़ी हार्दिकता के साथ…

Read More

लौट आया मधुमास

लौट आया मधुमास देविका कहीं शून्य में घूरे जा रही थी लेकिन मस्तिष्क में लगातार उथल-पुथल चल रही थी। आज हर हालत में उसे एक निर्णय पर पहुंचना था। पिछले कई दिनों से वह अनवरत दिल और दिमाग के संघर्ष में बुरी तरह फंसी थी,उलझी थी….पर अब…अब और नहीं।कहीं दूर से आती माँ की आवाज़…

Read More

एंजेला मिस

एंजेला मिस बात बहुत पुरानी है किन्तु बाल्यावस्था का वह अनुभव आज भी मेरे स्मृतिपटल पर अंकित है। मैं कक्षा पाँच में पढ़ती थी और अपने पठन-पाठन से संबंधित वस्तुओं के बारे में काफी सचेत रहती थी। विशेषकर गणित की पुस्तक के बारे में क्योंकि यह विषय सदा मेरे लिये टेढ़ी खीर ही बना रहता…

Read More

साँझ

साँझ गाड़ी तेजी से पटना से राजगीर की ओर बढ़ रही थी। हल्की बूंदा-बांदी शुरू हो गई थी। आषाढ़ का महीना चढ़ा ही था। मोना सुबह आठ बजे पति राजेश के साथ घर से निकली थी। राजेश को ऑफिस के कार्य से वहाँ तीन दिनों के लिए रूकना था। मोना की एक सहेली रीना राजगीर…

Read More

करिश्माई आईना

करिश्माई आईना राजा सिर्फ़ नाम का ही राजा था, वैसे अपने आपको रंक ही समझता था। ऐसा नहीं था कि वह एकदम मुफलिस खानदान में जन्मा था या मां बाप उसका खयाल नहीं रखते थे, पर उसका दुःख ये था कि हर मामले में वह बड़ा मामूली था – दिखने में, बोलने में, पढ़ने में,…

Read More

रश्मिरथी: राष्ट्रकवि की रचनाओं में मेरी अति प्रिय रचना

रश्मिरथी: राष्ट्रकवि की रचनाओं में मेरी अति प्रिय रचना युगधर्मा, शोषण के विरुद्ध विद्रोह को अपनी कलम की वाणी बनाने वाले , जीवन रस को ओज और आशावादिता से पूरित करने वाले, सौंदर्य और प्रेम के चित्र को भी अपने कलम की कूची से रंगने वाले रामधारी सिंह ‘दिनकर’  हिन्दी के एक प्रमुख राष्ट्रवादी एवं प्रगतिवादी…

Read More