भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- तुलसी गौड़ा

पद्मश्री तुलसी गौड़ा    “मुझे खुशी है कि मैंने यह पुरस्कार जीता। मैंने कई अन्य पुरस्कार भी जीते हैं।इन सभी पुरस्कारों के बावजूद, पौधे मुझे सबसे ज्यादा खुशी देते हैं।” -यह भावाभिव्यक्ति जीवन के 77 वें वसंत में प्रवेश कर चुकीं कर्नाटक की आदिवासी महिला तुलसी गौड़ा की है, जिनका नाम अब दुनिया आदर से ले रही…

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बबूल वन से होकर यात्रा

बबूल वन से होकर यात्रा (विद्यालय के दिनों की आत्मकथा ) मैंने नवीं कक्षा में प्रवेश लिया था। यह वर्ष 1964 रहा होगा। उसी वर्ष 26 जनवरी के दिन मेरे प्रखंड वजीरगंज में निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गयी थी। अपने विद्यालय से भाग लेने के लिए मेरा भी चुनाव हुआ था। मेरे गाँव से वजीरगंज…

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मौसम

मौसम है तुझी से बहार का मौसम मेरे दिल के क़रार का मौसम एक मुद्दत से मुन्तिज़र है दिल जाने कब आये प्यार का मौसम मेरी खुशियों के बादशाह बता उम्र भर है? ख़ुमार का मौसम रात बेचैन सी कोई रुत है और दिन इंतिज़ार का मौसम आरती तुमसे ज़िंदगी रौशन तुमसे ही ऐतबार का…

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“राष्ट्रपिता”

“राष्ट्रपिता” किसने जाना था कि सत्य के प्रतीक बन जाओगे अहिंसा के मसीहा भारत की तकदीर बना जाओगे ! किसने समझा था तुम्हे एक दुबली सी काया देगा भारत को आजादी का स्वरुप ! आज नत हम भारतवासी तुम्हारी अद्भुत सीख को याद करे बापू समय के इस चक्र में संसार को समझना होगा संकल्प…

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एक थी कल्ली

एक थी कल्ली   तूने आज फिर मुझे रुला दिया कल्ली। अपनी पच्चीस बरस की नौकरी में तेरी जैसी न जाने कितनी छोरियां इस बाल सुधार गृह में आई और चली गई। लेकिन तूने तो पहले दिन से ही …. ऐसा किया जिसे कोई नहीं भूल सकता। चोरी चकारी, मारपीट, हुल्लड़बाजी, गाली गलौच और फिर…

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कोरोना और करूणा

कोरोना और करूणा पिछले एक साल में एक छोटे वायरस ने जिंदगी बिल्कुल ही बदल डाली। और इस बार तो इसने ठान ली है कि दुनिया को अपना लोहा मनवा कर ही दम लेगा। कोरोना की इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं। दुनिया मे इसके व्यवहार की चर्चा हो रही है, रिसर्च चल रहे हैं।…

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युगदृष्टा प्रेमचंद

युगदृष्टा प्रेमचंद प्रेमचंद युग भारत की दासता का युग था। उस समय देश का जीवन जीर्ण शीर्ण हो गया था ।आडंबर और सामंतवाद का बोलबाला था। वह भारत की अधोगति का समय था किंतु धीरे धीरे अंग्रेजों के अधीन होते हुए भी देश में पुनरुत्थान की भावना जागृत होने लगी।प्रेमचंदजी ने एक सजग, ईमानदार और…

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My Christ

My Christ Turn your gaze to the world, to every living being in the Universe. Merciful to your children who, while asking for your help, Oh Christ, they continue to scourge You every day. Pitiful, suffering eyes, they beg man to change. My brother, listen: open your heart, it is my Christ who speaks to…

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फिर से वहीं

फिर से वहीं बैंक खुलने का समय तो दस बजे है लेकिन छोटे से गाँव के बैंक में कौन देखता है। आधा-एक घंटा देरी तो मामूली-सी बात है। अभी चार छह लोग आ गए हैं। बिनय है, उसे अपनी दुकान के लिए लोन चाहिए। आशा देवी हैं, जिन्‍हें सिलाई मशीन खरीदने के लिए लोन चाहिए…

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