जिंदगी एक एवरेस्ट है

  जिंदगी एक एवरेस्ट है एवरेस्ट के शिखर पर फतह पाने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल ,सही महिलाओं के लिए एक आदर्श व प्रेरणास्रोत हैं। उनके अचीवमेंट के पीछे उनका निरंतर संघर्ष, प्रयास, मेहनत, लगन और चुनौतियों का सामना पूरे आत्मविश्वास और साहस के करने की प्रकृति के कारण ही संभव हो पाया है…

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मेरे राम आ गए

मेरे राम आ गए   मेरे राम आ गए प्रभु फिर लौट कर अपने अयोध्या धाम आ गए मुकुट माथे सजा कर अब मेरे श्री राम आ गए   जगमग हुई अयोध्या नगरी प्राण प्रतिष्ठा हो रही ग्रहण है पांच सदियों का व्यथा उर की पुरानी है हुआ अवतार सरयू पर दबी इक इक निशानी…

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“कलम आज उनकी जय बोल “

“कलम आज उनकी जय बोल “ प्राण हाथों मे हैं लेकर रहते निडर दुश्मन से भीड़ हैं जाते रक्षा थल वायु जल में करते देश पे जान न्यौछावर जय बोल कलम आज उनकी जय बोल दृढ़ संकल्प वीरता भाषा उनके त्याग तपस्या से वे ना मुख मोड़े निश्छल जीत उनके मन लुभाये माता भारती उनके…

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तुम स्वयं उपमान हो

माँ! मेरे यह गीत सारे,आज तुझको हैं निवेदित मन के मेरे भाव निर्मल,तेरे चरणों में हैं प्रेषित शीत की ऊष्मा हो माते और हवा सा प्यार हो स्नेह का सागर समेटे, तुम दैवीय उपहार हो जो मेरा जीवन है गुंजाता,तुम वो अनहद गान हो क्या तुम्हें उपमा मै दूँ माँ,तुम स्वयं उपमान हो जीवनशाला का…

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गुरुपूर्णिमा पर विशेष

गुरुपूर्णिमा पर विशेष अपने राष्ट्र और सामाजिक जीवन में गुरुपूर्णिमा-आषाढ़ पूर्णिमा अत्यंत महत्वपूर्ण उत्सव है। व्यास महर्षि आदिगुरु हैं। उन्होंने मानव जीवन को गुणों पर निर्धारित करते हुए उन महान आदर्शों को व्यवस्थित रूप में समाज के सामने रखा। हनुमान चालीसा हम सब को कंठस्थ है, प्रथम दोहे में ही कहा गया है “श्री गुरुचरण…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की

स्वातंत्र्योत्तर भारत के निर्माण में श्री अजीम प्रेम जी का योगदान स्वातंत्र्योत्तर भारत के निर्माण में श्री अजीम प्रेम जी के योगदान का मूल्यांकन करने के लिए हमें तात्कालिक परिस्थतियों का अवलोकन करना होगा। श्री अजीम प्रेम जी का जन्म 24 जुलाई, 1945 को मुंबई के निजारी इस्माइली शिया मुस्लिम परिवार में हुआ था।उस समय…

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शराबी

शराबी “चलो – चलो, जल्दी -जल्दी लादो… कंबल सब लदा गया न, और खाने का पैकेट….” वार्ड पार्षद के प्रत्याशी गाड़ी में सामान लदवा रहे थे । गाड़ी के ऊपर चिपके हुए पोस्टर, पेंट किये हुए चुनाव चिन्ह और लटकाए हुए बैनर ने गाड़ी के आकार, ढ़ांचे और रंग को उसी तरह से ढ़ंक रखा…

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पूर्णाहुति

पूर्णाहुति “आज बदन टूट रहा है।रात को सिर्फ दूध ही दे देना”, ८५ वर्षीय बृजभूषण जी ने श्याम सुन्दर से कहा।श्याम और बृजभूषण के बीच कोई सांसारिक रिश्ता नहीं था। बृजभूषण जी, जिन्हे परिचित प्यार से बाबू जी कह कर सम्बोधित करते थे, अत्यंत लोकप्रिय थे। उन्होंने अपना सारा जीवन एक निस्वार्थ निष्काम भाव से…

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