बड़े लोकेर बेटी लोग

बड़े लोकेर बेटी लोग यह बहुत पुरानी बात नहीं है। एक शहर में एक व्यापारी परिवार था। धन दौलत, ऐशो–आराम की कोई कमी नहीं थी। दूसरे विश्व युद्ध के समय कपड़ों के व्यापार में अच्छी आमदनी हुई। पूरे शहर में एक ही कोठी थी-पीली कोठी। घर के सामने बगीचा, शेरों वाली मूर्ति और संगमरमर का…

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लौटा दो बचपन

लौटा दो बचपन डंगा डोली पकड़म पकड़ाई तू भाग कर छिप जा मैं आई। आओ कबड्डी और खो-खो खेलें नदी पहाड़ के भी मजे ले लें। पोसंपा भई पोसंपा डाकिए ने क्या किया। सौ रुपए की घड़ी चुराई अब तो जेल में जाना पड़ेगा। ऐसा कौन सा बच्चा जिसने “विष अमृत” न खेला होगा। लूडो…

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सरिता सुराणा की कविताएं

सरिता सुराणा की कविताएं १.आओ अमृत महोत्सव मनाएं आओ अमृत महोत्सव मनाएं आजादी की गौरव गाथा गाएं। याद करें आजादी के रणबांकुरों को गुमनामी के अंधेरों में खोए उन वीर शहीदों को श्रद्धानत हम शीश नवाएं। आओ अमृत महोत्सव मनाएं।। न भूलें बाल, पाल और लाल के साहस को भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदानों…

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स्वराज एवं एक भाषा के हिमायती – महर्षि दयानन्द सरस्वती

स्वराज एवं एक भाषा के हिमायती – महर्षि दयानन्द सरस्वती महर्षि दयानन्द सरस्वती के बारे में जब चिन्तन करने लगते है तो सामान्य मनुष्य अथवा महापुरूषों के व्यक्तित्व व कृतित्व के समान चिन्तन तो करना ही होता है किन्तु यहां पर एक विशेष चिन्तन की गहनता दिखती है, जो उनका ‘ऋषित्व’ होता है। गुजरात के…

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उत्तराखंड की दिवाली

उत्तराखंड की दिवाली वर्षों तक उस बैलों की जोड़ी के कंधों पर हल रखकर खेत जोते गए। खेती में दिन-दूनी रात चौगुनी उन्नति होती गई। अपने साथी ग्वारा के साथ ही बुल्ला भी उस घर के लोगों की जान था। लेकिन एक दिन जंगल से घास चरकर लौटते समय बुल्ला की आंख में किसी पेड़…

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GOD IS LOVE

GOD IS LOVE Love is a metaphor of absolute surrender, Unspeakable closeness with every breath together. L, is for the laughter we share everyday, We hold on to each other in every way. 0, is for opulence that we treasure each other, Knowing our wealth will never wither. V, is for the values of our…

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लॉकडाउन के पश्चात रोजगार और व्यवसाय के नये अवसर

“लॉकडाउन के पश्चात रोजगार और व्यवसाय के नये अवसर” “खेती न किसान को भिखारी को न भीख भली, वनिक को वनिज न चाकर को चाकरी। जीविकविहीन लोग सिद्यमान सोच बस, कहैं एक एकन सो ‘कहाँ जाइ का करी’।।” तुलसीदास ने भले ही ये पंक्तियां सोलहवीं शताब्दी के परिस्थितियों को देखते हुए रचा हो किन्तु ये…

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दिल का सूकुन

दिल का सूकुन दिल को सुकून देता है तेरा चांद सा मुखड़ा। बड़े भाई की जान है तू मम्मी पापा के जिगर का टुकड़ा।। बड़ी मिन्नत से तुमको पाया मां अंबे का आशीर्वाद है तू । सूने हमारे आंगन में छन छन पायल की आवाज है तू ।। तेरी बोली- मधुर रस की गोली कानों…

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जन्मकुंडली बनाम मानव चोला

जन्मकुंडली बनाम मानव चोला अद्भुत है यह मानव चोला। और उससे भी अद्भुत हैं यह ज़िंदगी। हमें ज़िंदगी का राज़ पाने के लिए ज़िंदगी को ज़िंदगी से जोड़े रखना होता है। इसी जोड़ के लिए ज्योतिष विज्ञान में जन्मपत्रिका, एक बहुत ही महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य निभाती है। यहाँ कुछ प्रश्न उत्पन्न होते हैं- जैसे…

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