उनको ना भूल पाएँगे

उनको ना भूल पाएँगे स्वतंत्रता के 75वें साल को मनाते हुए अचानक उन सबकी याद आना जरूरी है। उनके त्याग एवम्‌ बलिदान को कैसे भूल सकते हैं। उनकी जवानी को उन्होंने कुर्बान कर दिया। कर्नाटक राज्य में एक परम्परा का परिपालन किया जाता है जिसमें उन स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान दिया जाता है। उनको आमंत्रित…

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उमस में भी टिके रहें

  उमस में भी टिके रहें आप बरसात के मौसम को पसंद तो खूब करती हैं, लेकिन इस मौसम में पैदा होने वाली उमस आपको इसलिए पसंद नहीं, क्योंकि वह मेकअप को टिकने नहीं देती. उमस के मौसम में फाउंडेशन मेल्ट हो जाते हैं और आई लाइनर फैल जाता है, वहीं लिपस्टिक चिपचिपे हो जाते…

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रिश्ते हुए तार तार

रिश्ते हुए तार तार नताशा का रो -रोकर बुरा हाल था उस पर दोहरी मार पड़ी थी। एक तो कोरोना की चपेट में आकर उसके पति का स्वर्गवास हो गया था दूसरे उसके बेटे शलभ ने अपने पिता का शव लेने और उनका अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था। वह ऐसा करके अपनी…

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बसंत

बसंत आया बसंत हर्षित हुए अनंग धरती का मगर देख हाल सिकुड़ा किंचित मस्तक भाल दिल्ली में जब देखा तनाव बदले अपने मन के भाव किया उन्होंने एक एलान लड़ूंगा अबकी मैं भी चुनाव दिखाऊंगा अपना प्रभाव रति लाना मेरा धनुष बाण सुनो सब मेरा संकल्प पत्र मैं ही हूं बस तुम्हारा विकल्प तुम भी…

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लौट आया मधुमास

लौट आया मधुमास देविका कहीं शून्य में घूरे जा रही थी लेकिन मस्तिष्क में लगातार उथल-पुथल चल रही थी। आज हर हालत में उसे एक निर्णय पर पहुंचना था। पिछले कई दिनों से वह अनवरत दिल और दिमाग के संघर्ष में बुरी तरह फंसी थी,उलझी थी….पर अब…अब और नहीं।कहीं दूर से आती माँ की आवाज़…

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आ लौट के आ…

आ लौट के आ… उफ्फ बारह बज गये। एक लम्बी सांस ले उसने लैपटॉप शट ऑफ किया और दोनो हाथ ऊपर कर उंगलियां एक –दूसरे में फंसा चटका दीं। चटर- चटर की आवाज के साथ ही एक पुरानी याद कहीं भीतर कुनमुनाई और दादी का सफेद बालों से घिरा ममतालू चेहरा हवा में उभर आया।होती…

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परवाज़

परवाज़ वह पन्द्रह दिन पहले न्यूयॉर्क में बिजनेस मीटिंग मे भाग लेने आया। मीटिंग बहुत अच्छी रही और कम्पनी को नया प्रोजेक्ट मिल गया। वह बहुत खुश था उसे अपनी कामयाबी पर बहुत फक्र हो रहा था आज उसकी मेहनत सफल हुई। खुशी का एक कारण यह भी वह अपने वतन लौट रहा था ।…

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युगदृष्टा प्रेमचंद

युगदृष्टा प्रेमचंद प्रेमचंद युग भारत की दासता का युग था। उस समय देश का जीवन जीर्ण शीर्ण हो गया था ।आडंबर और सामंतवाद का बोलबाला था। वह भारत की अधोगति का समय था किंतु धीरे धीरे अंग्रेजों के अधीन होते हुए भी देश में पुनरुत्थान की भावना जागृत होने लगी।प्रेमचंदजी ने एक सजग, ईमानदार और…

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कोविड -19 और गर्भवती स्त्री

कोविड -19 और गर्भवती स्त्री आज कोविड-19 ने पूरे विश्व को अपने चपेट में ले लिया है । विश्व में बढ़ते हुए संक्रमण को संभालने और इलाज करनें के लिए हर स्तर पर विस्तार से कार्य हो रहें हैं। इस वायरस के तीव्रता को मेडिकल सेवा और रिसर्च में लगें, हर क्षेत्र के चिकित्सकगण और…

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