कैसे ठहरता बसन्त

कैसे ठहरता बसन्त बसन्त यहां भी आया था द्वार पर ही थी अनुरागी किसलय से भरी थी अंजुरी लहकती उमंग-तरंग सोमरस से भरे घट, परिणय पल्लवों को छूती मंज़र उन पर बैठी अभिलाषा पिक अभी कुहुक ही रही थी पूरी तरह पंचम स्वर पकड़ी भी नहीं ऊपर कहीं से अनायास निर्विघ्न चक्रवाती तूफान ने घेर…

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शक्ति रुपा चिंगारियाँ स्त्री

शक्ति रुपा चिंगारियाँ स्त्री धरणी पर सजे स्नेह मृदुता त्याग भक्ति जीवन की कामना ले आयी नारी स्त्री क्या-क्या लेकर आई धरापर नारी स्त्री तुम कहते पूजते हो भगवती माँ देवी है स्त्री देती नारी स्नेह समर्पण सर्वस्व है तुम्हें उदर पाले माता औ बने प्रेयसी संगीनी स्त्री हजार बलैंया निछावर होती वो नित हर…

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मातृत्व की कुर्सी

मातृत्व की कुर्सी शरीर पर निशान हैं कुछ जो सर्जरी के है मातृत्व के जो स्थाई है रहेंगे ताउम्र..अच्छे लगते हैं शायद मेरी संपूर्णता को इंगित करते.. !! हर स्त्री के जो माँ है…!! स्त्री के ममत्व को परिभाषित करते, स्त्री पुरूष के भेदभाव से कोसो दूर..वे निशान जो नही जानते पुरूष औऱ स्त्री में…

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जय जवान

जय जवान वतन के लिए ऐसा प्यार देखिए हमारे जवानों का अरमान देखिए सीमा पर सालों से हैं अड़े हुए है अपने कर्म पर विश्वास देखिए अनोखे जोश से हैं फड़कती बाहें हैं अलबेले उनकी पहचान देखिए भीड़ जाते हैं वो दुश्मन से बेखौफ शेर हमारे देशके वीरजवान देखिए कुर्बानी के हैं बनाते वो इतिहास…

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प्रेमचंद -युग प्रवर्तक

प्रेमचंद -युग प्रवर्तक प्रेमचंद उन साहित्यकारों में से हैं जिनकी रचनाओं से भारत के बाहर रहने वाले साहित्यप्रेमी हिंदुस्तान को पहचानते हैं। प्रेमचंद का साहित्य हमें सीखलाता है कि किस तरह क्रांतिकारी लफ्फेबाजी से बच कर सीधे सादे ढंग से जनता की सेवा करने वाला साहित्य रचा जा सकता है। अच्छी कहानी लिखने के लिए…

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अखण्ड भारत का सरदार

अखण्ड भारत का सरदार वल्लभ भाई पटेल जी का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, राजनीतिज्ञों में प्रमुख है। भारत की धरती पर उनका नाम ,एक सुलझे हुए सेनानी और राजनेता के रुप में सदा अमर रहेगा ।वल्लभ भाई झावेरभाई पटेल (३१ अक्टूबर १८७५-१५ दिसंबर१९५०) जी सरदार पटेल के नाम से लोकप्रिय थे,वे भारतीय राजनीतिज्ञ थे।उन्होने…

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माँ

माँ वो मां ही तो है, जिस ने सबसे पहले , सिखलाया धीरज रखना सिखलाया बिन व्याकुलता , भी संपन हो सकता है हर कार्य। सिखाया उसी ने, सरलता से जीना उलझनों के बीच रहकर भी, जीत हार के संग, समान व्यवहार का पाठ भी, सबसे पहले उसने ही पढ़ाया। मन जब दुख से घबरा…

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लोहड़ी

लोहड़ी आज से पचास या साठ वर्ष पहले उत्तर पूर्व के राज्यों में लोहड़ी के त्यौहार को कोई कोई जानता था। परन्तु अब पंजाब की ओर से अनेक रिवाज़ अन्य प्रांतों की जीवन शैली में घुल मिल गए हैं। इसका मुख्य कारण सिख समुदाय का परिवहन के क्षेत्र में योगदान है। भारत ही नहीं विश्व…

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शहादत के खुले -अधखुले पन्ने

शहादत के खुले -अधखुले पन्ने विद्रोह ,गदर, क्रांति-इन शब्दों के अर्थ कभी भी बहुत स्पष्ट नहीं रहे। जुल्म के खिलाफ समय-समय पर फूटे जन असंतोष को यदि शासकों , शासितों ने अलग- अलग नाम दिए तो इसका कारण स्पष्ट है-दोनों की मंशा अलग होती है, उद्देश्य अलग। जिस विद्रोह को विप्लव, गदर, राजद्रोह कहकर जुल्मी…

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