माँ की याद

माँ की याद ————— तुम याद बहुत आती हो माँ। खुद में तुमकों, तुममें खुद को पाती हूँ, माँ तुम याद बहुत आती हो माँ। आती हैं याद बचपन की। जब बच्चो को करती प्यार डांट और फटकार लगाती, तब तुझको खुद में पाती हूँ माँ। तुम याद———-। हम बच्चों के खातिर, दिन भर करती…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- सिद्धू और कान्हू

’संताल-हूल’ के महान सेनानी-सिदो एवं कान्हू  संथाल परगना के भू-खंड जो ’दामिन-ई-को, के नाम से जाना जाता था, उसी क्षेत्र में भगनाडीह ग्राम के देश परगना चुनका मुर्मू के घर में चार महान सपूतों-सिदो-कान्हू एवं चांद-भैरो ने जन्म लिया। उन्होंने स्वतंत्र संग्राम के उस गौरवमय इतिहास को लिखा । उन महान अमर शहीदों के जीवन…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- सुभाषचंद्र बोस

स्वतंत्रता संग्राम के अविस्मरणीय योद्धा :नेताजी सुभाष चंद्र बोस जब हम आजादी की लड़ाई के माध्यम से स्वतंत्र भारत का सपना देख रहे थे, उस समय हमारे बीच एक ऐसा शख्स था , जो स्वयं में पूर्णतः आश्वस्त था कि आजादी तो हमें मिलेगी। उसके लिए हर्जाना भी भुगतना पड़ेगा । लेकिन आजादी को मिलने…

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एक थी कल्ली

एक थी कल्ली   तूने आज फिर मुझे रुला दिया कल्ली। अपनी पच्चीस बरस की नौकरी में तेरी जैसी न जाने कितनी छोरियां इस बाल सुधार गृह में आई और चली गई। लेकिन तूने तो पहले दिन से ही …. ऐसा किया जिसे कोई नहीं भूल सकता। चोरी चकारी, मारपीट, हुल्लड़बाजी, गाली गलौच और फिर…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- धीरूभाई अंबानी

धीरूभाई अंबानी अगर आपको परीकथाओं पर विश्वास नहीं है तो आप इस कहानी को जरूर पढ़िए. यह किसी परीकथा से कम नहीं है. एक आदमी जो हाईस्कूल की शिक्षा भी पूरी नहीं कर पाया. वह इतने गरीब परिवार से था ​कि खर्चा चलाने के लिए उसे अपनी किशोरावस्था से ही नाश्ते की रेहड़ी लगाने से…

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बाजीगर

बाजीगर बैठी हूं आसमान तले सामने लहरों का बाजार है , उन्मादीत लहरों के दिखते अच्छे नहीं आसार हैं । अब उफनाती लहरों से कह दो राह मेरी छोड़ दे, बैठी हूं चट्टान बनकर रुख अपना मोड़ ले । ज्वार भाटा से निकली प्रचंड अग्नि का सैलाब हूं, हैवानियत को जलाकर खाक करने वाली आग…

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चेहरा बनाये बेदाग

चेहरा बनाये बेदाग स्कीन पर किसी प्रकार का दाग केवल आपकी खुबसूरती पर ही दाग नहीं है बल्कि आपके आत्मविश्वास को भी कम करता है । साथ ही साथ यह मानसिक तनाव का कारण भी बन जाता है। लेकिन आज के इस आधुनिक युग में अब प्रत्येक प्रकार के दाग का इलाज संभव है। केवल…

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पहले मैं इंसान हूँ

पहले मैं इंसान हूँ पहले मैं इंसान हूँ फिर नारी हूँ बेटी हूँ बहन हूँ पत्नी हूँ माँ हूँ दोस्त हूँ दुश्मन हूँ रिश्वतों का दरीचा हूँ जानती हूँ हज़ारों खामियां हैं मुझमें पर जैसी हूँ अच्छी हूँ आखिर इंसान हूँ देखती हूँ खुद को खुद की निग़ाहों से अपूर्ण हो कर भी खुद में…

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डॉ विनीता कुमारी की कविताएं

  डॉ विनीता कुमारी की कविताएं 1.भारत की नारी कवि नहीं, कवयित्री नहीं, भारत की नारी मैं हृदय की बात सुनाती हूं। वैदिक जीवन – दर्शन का, भारत के वीर शहीदों का, वतन के राष्ट्रगीतों का, मैं वंदनगान करती हूं। भारत की नारी मैं, हृदय की बात सुनाती हूं। गोरे घर छोड़ गए, लोगों को…

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