कोरोना और पर्यावरण

कोरोना और पर्यावरण : एक अवसर या सौगात इस कोरोना काल में भविष्‍यत: महात्मा गाँधी की कही दो बातें बहुत ही स्मरणीय हैं। एक यह, कि जो बदलाव तुम दूसरों में देखना चाहते हो वह पहले खुद में लाओ। दूसरा कथन तो शायद पहले से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है – वह यह कि संसार में…

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गर्मियों में सही खानपान

गर्मियों में सही खानपान गर्मी का मौसम चल रहा हैं इसलिए अपने खानपान का पूरा ध्यान जरूर रखें. आपका भोजन या आहार ऐसा होना चाहिए जो आपके शरीर को ठंडा रखे, आसानी से पचे और आपके स्वस्थ को ठीक रखें. शुद्ध और संतुलित आहार लेने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी, पाचन क्रिया बढ़िया…

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उठो हमारा सलाम ले लो

उठो हमारा सलाम ले लो क्या ख़ूबसूरत इत्तेफ़ाक है कि वैलेंटाइन डे के दिन ही आज हिंदी सिनेमा की वीनस कही जाने वाली मधुबाला जी का भी जन्मदिन है। शोख़, चुलबुली अदाओं के साथ-साथ साथ संजीदा अभिनय में भी माहिर करोड़ों दिलों की धड़कन मधुबाला का दिलीप कुमार साहब के साथ असफल प्रेम और किशोर…

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बुरा है

बुरा है हाँ हिंदु बुरा है न मुसलमान बुरा है जो ज़ेहन का गंदा हो वो इंसान बुरा है ए भाई मेरे ,प्यार के चल फूल खिलाएं यह तोप यह तलवार ये सामान बुरा है दोनों का लहू पीके भी प्यासा ही रहेगा ए दोस्त मेरे ,जंग का मैदान बुरा है इँसान किये जाता है…

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बाल मनोविज्ञान की सर्वश्रेष्ठ कहानी ईदगाह

बाल मनोविज्ञान की सर्वश्रेष्ठ कहानी ईदगाह प्रेमचन्द की कहानियां हमारे आसपास और दैनंदिन जीवन की हर छोटी-बड़ी घटनाओं से प्रेरित होती है,उनको पढ़ते समय यही प्रतीत होता है जैसे यह घटना हमारी आंखों के सामने घटित हो रही है अथवा हमारे परिवेश से ही जुड़ी हुई है, विशेष रूप से बाल मनोविज्ञान से जुड़ी कहानियां,अपनी…

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किश्ती और तूफ़ान

किश्ती और तूफ़ान हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के , इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के | तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के , इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के | जैसे जैसे एक और गणतंत्र दिवस निकट आता जा रहा है, मेरी स्मृति के पटल पर…

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चलकर देखें

चलकर देखें   इरादा कर ही लिया जब कि चलते जाना है फिर जरूरी है क्या कि अँधेरे को हम डरकर देखें हौसला लेकर चलें हल की तरह कांधे पर जहाँ पर रौशनी का घर है वहाँ चलकर देखें कसैलेपन के लिए जिंदगी ही काफी है ये जरूरी नहीं कि हर बार हम मरकर देखें…

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शुभकामना संदेश

शुभकामना संदेश  जनवरी २०२०, आज से तीन वर्ष पूर्व गृहस्वामिनी परिवार ने अर्पणा संत जी के नेतृत्व में एक छोटा सा बीज डाला था। भयंकर कोविद महामारी अपनी चरम सीमा पर थी | पूरे विश्व में तबाही छाई थी | भारत भी अछूता न था | हर परिवार से कोई न कोई प्रियजन इस से…

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