पीपल का पेड़

पीपल का पेड़ पीपल का पेड़, टीलेके उस पार खड़ा , वह पीपल का पेड़, जिसकी पत्तियां सुबह की रोशनी में, पारे सी झिलमिलाती हैं, नितांत अपना सा लगता है, जिसके सूखे, लरजते पत्तों में, नजाने कितनी यादें छिपी हैं, यह पेड़ हमारी आस्था व् विश्वास का प्रतीक ही नहीं, किसी बूढ़े, ज्ञानी, तपस्वी सा…

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बस इतना सा

बस इतना सा नाम – सीमा भाटिया जन्मतिथि – 5 फरवरी, 1969 शिक्षा – स्नातकोत्तर (हिन्दी) लेखन की विधाएँ – गद्य और पद्य दोनों में प्रकाशित पुस्तकें – सांझा संग्रह_ संदल सुगंध, लम्हों से लफ्ज़ों तक, सहोदरी सोपान, अल्फाज़ ए एहसास (काव्य संग्रह) सफर संवेदनाओं का,आसपास से गुजरते हुए, लघुतम-महत्तम, सहोदरी लघुकथा २, लघुकथा कलश,…

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मन और गुलाब

मन और गुलाब मन गुलाब सा कोमल सुरभित, आज कर रहा स्नेह निवेदित संग साथ का सुख चाहें हम मेरी कविता तुम्हें समर्पित मन वाणी और भाव हृदय के आज सभी तुमको को है अर्पित यह गुलाब सी रंजित कविता बने दोस्ती की मिसाल जब हम तुम बंधे एक बंधन में गुथे हुए फूलों से…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की-वी वी गिरी

भारत रत्न वी.वी. गिरी वी.वी. गिरी का पूरा नाम वराहगिरी वेंकट गिरी था। यह भारत के राजनेता थे और देश के तीसरे उपराष्ट्रपति पद पर तैनात रहे। भारत के चौथे राष्ट्रपति का पदभार भी इन्होंने संभाला था। हम सर्वप्रथम वी.वी. गिरी जी के जन्म और बचपन की बात करते हैं, गिरी जी का जन्म ब्रह्मपुर…

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इसे कहते हैं ज़िंदगी

इसे कहते हैं ज़िंदगी वैसे तो मैं एक लेखिका हूँ लिखना पेशा नहीं जूनून है मेरा लेकिन अपनी जिंदगी के बारे में लिखने बैठी हूँ तो बीती जिंदगी का हर लम्हाँ एक एक करके नजरों के सामने आ गया है।क्या लिखूँ और क्या नहीं ,हर लम्हें की अपनी खूबसूरती हैं और महत्ता है।बात अपने जन्म…

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जन्मजात शासिका- कैथरीन द ग्रेट ऑफ़ रसिया

जन्मजात शासिका- कैथरीन द ग्रेट ऑफ़ रसिया “कैथरीन द ग्रेट” के नाम से जानी जाने वाली,रूस की सबसे अधिक प्रसिद्ध तथा सर्वाधिक समय तक शासन करने वाली साम्राज्ञी थी कैथरीन! उसने 9 जुलाई 1762 से लेकर मृत्यु पर्यन्त शासन किया। उसका शासनकाल “रूस का स्वर्णयुग” कहलाता है। कैथरीन द्वितीय का जन्म प्रुसिया में हुआ था।…

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कुछ कही कुछ अनकही 

कुछ कही कुछ अनकही    एक थी केतकी ,पहाड़ों की खुशनुमा वादियों में अपने रूप रंग की खुशबू बिखेरती,हिरनी सी कुलांचें भरती, इस बुग्याल से उस बुग्याल तक दौड़ती चली जाती थी बस अपने आप में खोई हुई,अपने आप में मगन।दीन दुनिया से कोई वास्ता न था बस अपनी ही धुन में किसी भी टीले…

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पिता

पिता पिता एक शख्स नही संस्कार आदर्श मयार्दा धर्म सहनशीलता की परिभाषा है पिता रामायण कुरान बाइबिल गुरुग्रंथ गीता का ज्ञान भरा भंडार हैं पिता जीवन के संघर्ष में कभी न हारने का संदेश देते है अँधेरे तो क्या हुआ रौशनी को तु तलाश कर यही सिखलाते हैं पिता पिता होते हैं बरगद की छाँव…

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नारी अधिकारियों का मजबूत कंधा-एलिस पाॅल

नारी अधिकारियों का मजबूत कंधा-एलिस पाॅल एलिस स्ट्रोक्स पाॅल का जन्म 11 जनवरी 1885 को न्यूजर्सी के माऊंट लार्रेल टाउन में हुआ। इनके पिता विलियम मिल पाॅल एक सफल व्यवसाई थे तथा विंथ्रोब परिवार के वंशज थे।इनकी मांँ टेसी पेरी पॉल सोसाइटी ऑफ फ्रेंड्स के आंदोलन में सक्रिय सदस्य थीं। एलिस दो बहन एवं दो…

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कुछ ऐसा लिखूँ

कुछ ऐसा लिखूँ मेरा नाम डॉ.सरला सिंह है । मेरा जन्म पूर्वी उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में कादीपुर तहसील के बलुआ नामक गाँव में क्षत्रिय कुल में हुआ । प्रारम्भिक शिक्षा कानपुर तथा गाँव दोनों जगह हुई । पिताजी व बाबा जी दोनों ही कानपुर में सी.ओ.डी. में नौकरी करते थे । वहीं बाबूपुरवा…

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