राम का राज्याभिषेक

राम का राज्याभिषेक आश्वस्त हैं राम अपने धर्म,सभ्यता और संस्कृति से परंतु आशंकित है वर्षों बाद घर वापसी में, मंथरा का (दासो का) कुनबा पूँछ सकता हैं उनका नाम और जन्मस्थान -!!! सीता तुम पुरूष चित्त से सोचना मानवीय आचरण के राम मर्यादा के पुरूषोत्तम राम तुम्हारे लिए वन वन भटके राम कितना कठिन है…

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कोविड -19 और गर्भवती स्त्री

कोविड -19 और गर्भवती स्त्री आज कोविड-19 ने पूरे विश्व को अपने चपेट में ले लिया है । विश्व में बढ़ते हुए संक्रमण को संभालने और इलाज करनें के लिए हर स्तर पर विस्तार से कार्य हो रहें हैं। इस वायरस के तीव्रता को मेडिकल सेवा और रिसर्च में लगें, हर क्षेत्र के चिकित्सकगण और…

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मैं बसंत हो जाती हूँ…

मैं बसंत हो जाती हूँ… ओ मेरे बसंत जब तुम आते हो दिल को लुभाने वाली पवन बहाते हो और मैं मस्तमौला हो सारी चिंताओं को विस्मृत कर निडरता से जिधर रुख कर जाना चाहती हूं उधर चली जाती हूँ क्योंकि मन बसंत हो जाता है बसंत होना तुम जानते हो न खुशी का,उमंग का,उत्साह…

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शार्दुला नोगजा की कविताएँ

शार्दुला नोगजा की कविताएँ     सर्वे सन्तु निरामया! दी रचा स्वर्णिम धरा ने अल्पना ओ समय के रथ ज़रा मद्धम चलो! है सकूरा और जूही की गली ओ सुगन्धा चाँदनी में न जलो!   जैसे पूर्वाभास से भयभीत हो जल छिड़क माँ मंत्र बुद-बुद बोलती मानवों के क्षेम को व्याकुल धरा गाँठ अदरक,  हरिद्रा…

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संघर्ष अदृश्य शत्रु से

संघर्ष अदृश्य शत्रु से कोविद 19 एक सूक्ष्म जीवाणु जो वैश्विक आपदा के रूप में समस्त विश्व के मानव जाति को धीरे धीरे अपने शिकंजे में जकड़ता जा रहा है।एक अदृश्य शत्रु आज मानव सभ्यता के समक्ष एक चुनौती है, न केवल मानव जीवन के लिए बल्कि मानव सभ्यता द्वारा निर्मित प्रत्येक क्षेत्र पर घातक…

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कुछ नया सा

कुछ नया सा अंजलि को जब भी घबराहट महसूस होती है, वह अपने नाखून चबाने लगती है। कितनी बार उसने यह आदत छोड़ने की कोशिश की, लेकिन जाने अनजाने यह हो जाता है। अविनाश ने कितनी बार टोका होगा – लेकिन आदत तो छूटती नहीं। अब यही देखो ना, अविनाश को भूलने की कोशिश भी…

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वरदान

वरदान निर्वाक है वाचक, लेखनी डरी हुई है, अंधेरा रात का दिन में भरी हुई है बहुतेरे प्रश्न उमड़ता, उत्तर मांगता हूँ, जड़ता विनाश को लेखनी दौड़ाना चाहता हूँ। गले में फंसी आवाजें जुबान दब रही है, आपसी भाई चारे की लाशें निकल रही हैं खुला आसमान सांस चाहता हूँ, लेखनी में जोर और बन्दूके…

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