मैं बोल रही हूँ

मैं बोल रही हूँ शाम के तीन बज चुके थे। सेमिनार खत्‍म होने में एक घंटा और था। स्‍मृति सामने बैठकर सुन रही थी। कमरे में अच्‍छी खासी भीड़ थी। ज्‍यादातर अभी अभी कॉलेज से निकले युवा थे। इस सेमिनार में डॉ.. त्‍यागी, मधुसूदन गुलाटी भाई अग्रवाल और न जाने कितने नामी गिरामी लोग थे।…

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चाहत चाय की

चाहत चाय की गुदगुदाती सर्द तन को, ताप देती है बदन को, भोर की स्वर्णिम लाली। उसपे गर्म चाय की प्याली तन को देती सुकून निराली। चाय में घुलता मिठास, जब अपनो का हो साथ। चाय की हर गर्म चुस्की, होठों पे बिखेरतीं मुस्की, हर घूंट पियूषा सा लागे जब चाय की चाहत जगे। फूर्ति…

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कैसे कहूँ!

कैसे कहूँ! कैसे कहूँ कि मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ? कैसे कहूं! हर वक़्त पास आने का – तुम्हारा, मैं इंतेजार करता हूँ। बिना कुछ कहे ही तुम कितना कुछ कह जाती हो? फिर भी तुम्हारे मुस्कुराने का, मैं इंतेजार करता हूँ। कैसे कहूँ कि मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ? कैसे कहूं! तुम्हारे…

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उसे तोड़ खुश होता क्यूँ है

उसे तोड़ खुश होता क्यूँ है जो आता है जाता क्यूँ है ? और बेबस इतने पाता क्यूँ हैं ? सज़ा मिले सत्कर्मों की यह सोच हमें सताता क्यूँ है ? सच्चाई की राह कठिन है उसपर चलकर रोता क्यूँ है ? है राग वही रागनी भी वही फिर गीत नया भाता क्यूँ है ?…

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टिंगू

‘‘टिंगू’’ ‘‘मृदु….. देखो भई कौन है’’ इन्होंने मुझे नीचे के बरामदे से आवाज लगाई. सुबह का अखबार पढ़ते समय तनिक व्यवधान हो तो इनकी आवाज ऐसी ही रूखी हो जाती है. मैं सीढ़ियाँ फाँदती नीचे आई तो देखा कि एक बारह तेरह साल का लड़का साफ धुली हुई हाफ पैंट व टी-शर्ट पहने अपनी माँ…

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सबसे बड़ी पराजय

सबसे बड़ी पराजय सरिता से हमारा परिचय फेसबुक पर ही हुआ था।वह हमारें उन तमाम मित्रों में से एक थी,जो फेसबुक की सूची में थे और पोस्टों पर लाइक या कॉमेंट कर देते थे।व्यक्तिगत एक दूसरे को नहीं जानते थे।लड़कियों के मामले में मैं अपनी ओर से संकोचशील ही रहता था;यानी येन केन प्रकारेण,जल्दी जल्दी…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- प्रोफेसर यशपाल

प्रोफेसर यशपाल- स्काई लैब अंकल किसी भी देश अथवा जाति के लिए आजादी बहुत महत्वपूर्ण होती है। एक आजाद देश ही अपना विकास, अपने नागरिकों का सही अर्थों में उन्नयन उनकी आवश्यकताओं तथा अपेक्षाओं के अनुरूप कर सकता है। लगभग 200 वर्षों तक गुलाम रहने के बाद हम आजाद हुए थे। यह आजादी कठिन संघर्षों…

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प्रेम -बंधन

प्रेम -बंधन दो प्राणों का है अटूट ये बंधन । दो श्वांसों का श्वांसों से अनुबंध । दो प्राणों की मधुर आलाप है दो प्राणों की ये वेदना है। प्रेम ..मौन की बोलती भाषा प्रेम …हृदय की है परिभाषा । दो नयनों का स्मित -हास जीवन का है जो दीर्घ श्वास। प्रेम … राधा का…

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मेरी सुपर वूमन

मेरी सुपर वूमन महिला दिवस पर मुझसे जब भी पूछा जाता है कि मैं किसी ऐसी महिला का नाम लूं जिसे देखकर लगता हो कि महिला दिवस ऐसी ही महिलाओं के व्यक्तित्व को सेलिब्रेट करने के लिए बनाया गया है तो मेरे दिलोदिमाग़, मेरे ज़ेहन में सिर्फ़ एक ही नाम आता है और वह नाम…

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