गांधी गुजरात का!!

गांधी गुजरात का!! ना मानी हार जो करता गया वार वो, बंदूक ना गोली से प्यार की बोली से वो संत अहिंसा का करता रहा चमत्कार जो!! मन में था जिसके कुछ भी कर जाने की, हर सांस में थी उसके धुन आज़ादी पाने की, लाज बचाने भारत मां की त्याग दिया घर -बार जो,…

Read More

हिन्दी है अभिमान

हिंदी है अभिमान हिंदी हिंदी प्यारी हिन्दी हिन्दी है अभिमान जग जग में गूंजे ये है, हमको हैअभिमान मीठे बोली लगती हिन्दी, प्रेम रस बरसाती है अनजाने भी मीठे कंठ से बोले है हिंदी महान प्रेम पाठ पढ़ाती है देश को, देश से मिलाती है हिंदी देश की शान है हम सबको अभिमान है भाषाओं…

Read More

ऋचा वर्मा की कविताएं

ऋचा वर्मा की कविताएं १.इस बार का बसंत इस बार के बसंत में खिले पलाश ने, बिल्कुल नहीं लुभाया हमें ये पलाश के फूल लगते हैं छींटे से रक्त के, पत्रविहिन पलाश के गाछ, मानो देहविहिन बहते लहू, न है इंतजार अमलतास के पीले फूलों का, जो चमका करतें हैं सोने की तरह, आजकल भय…

Read More

नर का पौरुष

नर का पौरुष जब-जब संकट ने जाल बुना नर ने पौरुष का वार चुना यूँ शैय्या पर जीकर क्या हो उसने मृत्यु अधिकार चुना विद्युत सम तलवार लिये तड़ितों को अपने तुनीर धरे लगा गाँठ जनेऊ में भरकर भीषण हुंकार चला कितने रत्नाकर लाँघ दिए अगणित सेतु भी बाँध दिए माँ के वचनों की रक्षा…

Read More

साइकिल

साइकिल “गौरी की माँ जरा पानी तो पिलाओ।” रामधर पसीने से तर-बतर थे,चेहरा गर्मी से लाल हो रहा था। “कुछ काम बना..?” रामधर ने एक सांस में पानी गले के नीचे उतार दिया और तौलिये से मुँह पोछने लगे। “जरा पंखा तेज कर दो..” मालती मशीन की तरह रामधर की हर बात का पालन करती…

Read More

कासे कहूं अपने जिया की

कासे कहूं अपने जिया की   हल्की हल्की सावन की रिमझिम फुहारें पड़ रही थी, मौसम बहुत खुशगवार था । नीता का मन चाय पीने का हो रहा था पर अपने लिये चाय बनाने में आलस आ रहा था इसलिये बैठकर अखबार पढ़ने लगी, हालांकि अखबार में कुछ पढ़ने के लिये होता ही कहाँ है…

Read More

बसंत

बसंत पतझड़ से शोभाहीन हुई, प्रकृति के नव शृंगार को। पिछले बरस की नीरसता हटा, आस के फूल पल्लवित करने को। वन उपवन को पुनर्जीवन देने, है एक और बसंत आने को। अंतर्मन में कहीं सुप्त पड़ी, मानवता झकझोरने को। एहसासों को अंकुरित कर, रिश्तों को नई तरंग देने को। काश, इस बार बसंत आए…

Read More

प्रत्यक्ष भगवान

प्रत्यक्ष भगवान ईश्वर को किया जा सकता है महसूस मगर डाँक्टर जब देता है मरीज को जीवन दान तो दर्शन होते हैं प्रत्यक्ष भगवान के जो न बंधा होता है किसी पंथ/जाति/रंग हर सीमा से दूर मानवता का पोषक सेवा का अवतार मान/अपमान की परवाह किये बिना कर्तव्य के पथ पर अग्रसर सोनिया अक्स समर्पित…

Read More

लता मंगेशकर: मानवता को उपहार

लता मंगेशकर: मानवता को उपहार लता मंगेशकर जैसी विभूतियाँ इस धरा पर कभी-कदा ही अवतरित होती हैं। वे मानवता को मिला दैवी उपहार हैं। स्वर साम्राज्ञी ने आम और खास सबके दिल पर राज किया। उन्हें कई पुरस्कार मिले पर वे किसी पुरस्कार की मोहताज नहीं रहीं। चार पीढ़ियों को अपने सुर से उपकृत करने…

Read More

India’s Neighbourhood Policy Must Change In View Of Emerging Developments                             

India’s Neighbourhood Policy Must Change In View Of Emerging Developments      Well, it’s election time in our neighbourhood : Myanmar, Bangladesh and Nepal. Fed up with slowing down of the economy, bouts of violence & unrest and a bleak future for youth, the common voter is looking for much needed change and relief in…

Read More