हम जीतेंगे

हम जीतेंगे हम जीतेंगे, हम जीतेंगे लाज़िम है कि हम ही जीतेंगे वो दिन कि जिसका अरमां है हम सारे जनों का फ़रमां है जब ये भय, ये दहशत का आलम बन इक गुबार उड़ जाएंगे बेशक़ हम दिलों को जोड़ेंगे औऱ ज़ंजीरों को तोड़ेंगे लेकिन, लेकिन……. ना रखे दुश्मन कोई भरम नहीं है मुश्किल…

Read More

सलाम आधी आबादी

सलाम आधी आबादी 8 मार्च को पूरी दुनिया अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाएगी,बधाई आधी आबादी आपको। कुछ तस्वीरें साझा करती हूं—- 22 वर्षीय महसा अमीनी , ईरान की नैतिक पुलिस ने 13 सितम्बर को हिरासत में लिया था। महसा अपने परिवार के साथ तेहरान आई थी। जब उसकी गिरफ्तारी हुई, कारण बताया गया…

Read More

बहिष्कार

बहिष्कार गंगा किनारे एक बुजुर्ग महिला को देख ऐसा प्रतीत होता है जैसे कोई तपस्विनी देवलोक से तपस्या हेतु अवतरित हुई हों । शिला पर बैठे देख उनसे बात करने के लोभ को संवरण न कर सकी और उनके समीप मैं भी आँखे मूंद बैठ गयी । स्नेहिल स्पर्श महसूस कर मैं आँखे खोल अपलक…

Read More

बिना पते की चिठ्ठी

बिना पते की चिठ्ठी मेरे घर के आगे एक छोटा बगीचा है जिसमें मैंने नारियल, नींबू, अमरूद, चम्‍पा, रातरानी, आम के पेड़ लगा रखे हैं। छोटी क्‍यारियों में गेंदा, चमेली, उड़हुल के फूल हैं। उड़हुल के भी कितने रंग है ना। जब छोटी थी तब केवल लाल या गुलाबी रंग के उड़हुल के फूल हुआ…

Read More

पुत्री को पत्र

पुत्री को पत्र प्रिय तान्या खुश रहो कुछ दिनों से देख रही हूँ तुम बीच बीच में बहुत भावुक हो जाती हो।कल ही तुमने बातों बातों में मुझसे कहा कि माँ कभी-कभी लगता है मैं तुम्हारेजैसी होती जा रही हूँ। अब तो वही सब करने लगी हूँ जिनका मैं कभी मजाक बनाया करती थी। माँ तुम्हारा…

Read More

श्रमदान

श्रमदान आधी आबादी करती श्रमदान बिन वेतन ताजमहल यादगार निशानी “कटते हाथ” होते हैं पूरे मजदूरों के हाथों स्वप्न हमारे आनंदबाला शर्मा साहित्यकार जमशेदपुर, झारखंड 0

Read More

बड़े शहर का छोटा सा गांव

बड़े शहर का छोटा सा गांव नई दिल्ली में छोटा सा गांव क़ुतुब मीनार से मात्र कुछ मिनट की दूरी पर। कीकर के पेड़ मीलों तक, साथ में चारों ओर हरियाली।सड़के भी २० बरस पहले निकली ,चारो ओर से घनी हरियाली में फैला हुआ।जहां आबादी संभ्रांत परिवार जाटों की ,अपने में मस्त होकर जीने वालों…

Read More

इसे कहते हैं ज़िंदगी

इसे कहते हैं ज़िंदगी वैसे तो मैं एक लेखिका हूँ लिखना पेशा नहीं जूनून है मेरा लेकिन अपनी जिंदगी के बारे में लिखने बैठी हूँ तो बीती जिंदगी का हर लम्हाँ एक एक करके नजरों के सामने आ गया है।क्या लिखूँ और क्या नहीं ,हर लम्हें की अपनी खूबसूरती हैं और महत्ता है।बात अपने जन्म…

Read More

प्रेमचंद की “सुहाग की साड़ी”

प्रेमचंद की “सुहाग की साड़ी” मानवीय संवेदना के कुशल चितेरे, नव जागरण के प्रणेता, सर्वहारा की प्रखर वाणी और तत्कालीन समय को अपनी लेखनी से जीवंत करने वाले, सकारात्मक ऊर्जा की आभा से नव दीप प्रदीप्त करने वाले सर्वकालिक महान लेखक, चिंतक और कहानी सम्राट मुंशी प्रेमचंद किसी परिचय के मोहताज नहीं । मुंशी जी…

Read More