मेरी माँँ

मेरी माँँ माँ की ममता की छाँव है माँ की आवाज दिल का सुरुर है माँ की मौजूदगी दिल का सुकून है माँ की मुस्कुराहट फूलों की खुश्बू है माँ का दुख दिल का लहू है माँ की ममता प्यार का साया है माँ के पैरों के नीचे सारा जहाँ है माँ का साया सघन…

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बापू की ओर

  बापू की ओर मिथ्या से सत्य की ओर घृणा से प्रेम और करुणा की ओर सांप्रदायिकता से भाईचारे की ओर हिंसा की बर्बरता से अहिंसा की संवेदना की ओर बर्बर भीडतंत्र से सत्याग्रह की ओर विलासिता से सच्चरित्रता की ओर उपभोक्तावाद से सादगी की ओर अंध औद्योगीकरण से कुटीर उद्योग की ओर पूंजी के…

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ख्वाब

ख्वाब नैना मेरे चुप मत रहना , कह दो दिल की बात। ख्वाब सुहाने जब भी देखे ,बहते क्यों हर रात।। कभी निराशा ने है जकड़ा , पर उम्मीदें साथ । कभी हँसाते कभी रुलाते , कभी छोड़ते हाथ।। संवेदित हैं मेरी पलकें, या दिल के जज़बात । ख्वाब सुहाने जब भी देखे, बहते क्यों…

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माता और पिता

माता और पिता मैं अपने पिता की सबसे बड़ी आलोचक रहीं हूँ, मेरी अति सौम्य मृदुभाषिनी माता की तुलना में, वे काफी रूखे, सख्त, अहंकारी और अनुशासित इंसान दिखते रहें हैं। अगर प्रतीकों की भाषा में कहा जाए तो, माँ एक कोमल कविता सी हैं, तो पिता एक राष्ट्र गान जैसे, माँ के नर्म –…

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नवरात्रि दक्षिण में – एक सामाजिक झांकी

नवरात्रि दक्षिण में – एक सामाजिक झांकी नाम ही स्पष्ट कर देता है कि यह नौ दिनों का उत्सव जो शरद और वसंत दोनों कालों में आता है संध्याकालीन पूजा का द्योतक है जैसे कृष्ण जन्माष्टमी अर्धरात्री की पूजा है। केरल में विशु नामक पर्व वर्षारंभ का शुभ समय सूर्योदय से पूर्व होता है। होलिका…

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- वीर सावरकर

वीर सावरकर बड़े भाग्यशाली होते हैं वो लोग जिनके सिर पर हमेशा माता-पिता का साया रहता है, मगर किसी के बाल्यकाल में माता-पिता का साया उठ जाना कितना दुःखदायी होता है और यदि ऐसा व्यक्ति देश के नाम पर समन्दर पार किसी खतरनाक जेल भेज दिया जाये जिसमें निर्दयी जेलर उसे कोल्हू के बैल की…

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कोरोना का कमल

कोरोना का कमल एक ऐसी बीमारी जिसने आदमी के शरीर को ही नहीं संवेदनाओं को भी संक्रमित किया है उसका उदाहण चारदीवारियों में क्वारंटाइन हुए हर मनुष्यों के भावनाओं के टेस्ट रिपोर्ट से मिल रहा है। इस कोरोना काल में जब अपने अपनों से दूर हैं वैसे में पराए का अपनापन जीवन और जज्बातों को…

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कितनी और कैसी: आजादी ?

कितनी और कैसी:: आजादी ? आधी आबादी की आजादी कैसी और कितनी? इस पर हमेशा बात होती रहती है। कानूनी और संवैधानिक फ्रेम में सब कुछ बहुत आदर्श लगता है। समानता, स्वतंत्रता, और न्याय पाने के अधिकार सभी के लिए हैं। न्यायपालिका से संरक्षित भी हैं।लेकिन क्या स्त्री क्या पुरुष, दोनों के लिए ये किताबी…

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चीखती खामोशियाँ

चीखती खामोशियाँ उतारो ” साली”के सारे कपड़े और पूरी तरह निर्वस्त्र करके पेड़ पर बांध कर कोड़े से मारो , पंच परमेश्वर में से एक ने ये राय दी , ….तभी दूसरे ने कहा नही इसके मुँह काला करके पूरे गाँव मे घुमाया जाय , इसी तरह जिसके जो मन मे आया फैसला सुना रहे…

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