प्रेमचंद की कहानी”बड़े भाईसाहब”- एक विश्लेषण

प्रेमचंद की कहानी”बड़े भाईसाहब”- एक विश्लेषण कहानी का सार… प्रेमचंद जी की सभी सशक्त और जीवंत रचनाओं में मुझे “बड़े भाई साहब” नामक कहानी अत्यंत ही आकर्षित करती है। इस कहानी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पाठकों का मनोरंजन करती हुई आज भी उतनी ही प्रासंगिक है और शिक्षा प्रणाली पर चोट…

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आ लौट के आ…

आ लौट के आ… उफ्फ बारह बज गये। एक लम्बी सांस ले उसने लैपटॉप शट ऑफ किया और दोनो हाथ ऊपर कर उंगलियां एक –दूसरे में फंसा चटका दीं। चटर- चटर की आवाज के साथ ही एक पुरानी याद कहीं भीतर कुनमुनाई और दादी का सफेद बालों से घिरा ममतालू चेहरा हवा में उभर आया।होती…

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अनुत्तरित प्रश्न

अनुत्तरित प्रश्न एक बार फिर… नहीं..नहीं.. इस बार आने दो मुझे। .. क्यों नहीं आने देती हो… मैं आना चाहता हूँ… नहीं वह सब नहीं होगा जिसका तुम्हें भय है… तुम बहुत अच्छी हो। .. वह भी बहुत समझदार है… देखा नहीं उसने अपनी जिम्मेदारियां कितनी खूबसूरती से निभाईं हैं… … माना उसका विश्वास उठ…

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कैसे कहूं चहूं दिशा में गुणगान करु

कैसे कहूं चहूं दिशा में गुणगान करु ममता तेरी भावों में मैं बांध नहीं पाती मां तुम मेरे लिए क्या हो कैसे बतलाऊ चाहकर भी मै शब्दों में ढाल नहीं पाती समय चक्र पर बैठे देखा है हरदम तुमको सबकी खुशियों को गढकर प्रेम ही भरते देखा खुद को मिटाकर हमे कामयाब बनाने जुनून तेरी…

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भारतीय गणतंत्र का मूल्यांकन

भारतीय गणतंत्र का मूल्यांकन कोविड-19 से उपजी समस्याओं और दुश्चिंताओं के बीच देश 72वां गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी में है।धर्मनिरपेक्ष ,समाजवादी और लोकतान्त्रिक गणराज्य भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इसी उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष राष्ट्रपति द्वारा दिल्ली के राजपथ पर राष्ट्र-ध्वजारोहण किया जाता है।सभी भारतीय नागरिकों द्वारा यह…

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मेरे राम आ गए

मेरे राम आ गए   मेरे राम आ गए प्रभु फिर लौट कर अपने अयोध्या धाम आ गए मुकुट माथे सजा कर अब मेरे श्री राम आ गए   जगमग हुई अयोध्या नगरी प्राण प्रतिष्ठा हो रही ग्रहण है पांच सदियों का व्यथा उर की पुरानी है हुआ अवतार सरयू पर दबी इक इक निशानी…

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पचास की दहलीज पार करती औरतें

पचास की दहलीज पार करती औरतें ये पचास की दहलीज पार करती औरतें वाकई बहुत विचित्र होती हैं, एकदम समझ से परे.. कई बार लगता मानों समेटे हों कितने गहरे राज अपने भीतर बिल्कुल सीप में मोती के मानिंद.. दबाए रखती हैं कितने एहसास चेहरे पर बढ़ती झुर्रियों में और फिर उन्हें में मेकअप की…

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वो धुकधुक 

वो धुकधुक    “रात के दस बज गए, आज फैक्ट्री में कुछ ज्यादा ही देर हो गई!” घना सन्नाटा उसे दबोचकर जैसे उस पर हावी होना चाहता था मगर घबराती गरिमा स्ट्रीट लाइट की रोशनी की आड़ में अपनी चुन्नी से सिर ढक चेहरा छुपाती हुई बस स्टॉप की ओर जल्दी-जल्दी तेज कदमों से कभी…

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शत शत नमन

  शत शत नमन ममता से ओतप्रोत वे सभी ममतामयी सम्मानीय माताएं जिनका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ही रूप से मेरे और मेरे अपनों के जीवन में महत्वपूर्ण योगदान रहा हैं उन सभी माताओं एवं मेरी जन्मभूमि भारत माता के श्री चरणों में मैं सत् सत् नमन करता हूं एवं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं…

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