शहादत

शहादत क्या कहें कैसे कहें ,कहने को कुछ रहा नहीं । माँ की लंबी तपस्या , बक्से में बंद रहा नहीं । बक्से में तन टुकड़ों में , आत्मा ब्रह्म लीन है । साधना सिद्धि तपस्या , देश धरोहर रहा नहीं । बस तिरंगा देखतीं हूं , लाल मेरा दहाड़ा नहीं । आस थी विश्वास…

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तुम सब कैसे जान जाती हो

जब जब उदास होती हूं पर तुम्हें ना बताती हूं, क्यों दर्द दूं अपने गम को बताकर इसलिए तुमसे छुपाती हूं, पर जादूगरी कैसी तुमको आती है मां !तुम सब कैसे जान जाती हो … जागती हूं में रातों को जब नयनों में समंदर लिए, तुम भी तो फिक्र में मेरी रात आंखों में बिताती…

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खुद को जानती हूँ मैं

“खुद को जानती हूँ मैं” ऐसा नहीं है कि– औरत हूँ तो बस नशा है मुझमें पत्नी हूँ,माँ हूँ,बहन हूँ– इक दुआ है मुझमें… ऐसा नहीं है कि– संगमरमर के साँचे में ढला जिस्म हूँ केवल नमी हूँ,आग हूँ,धरती,आकाश हूँ– जीने के लिए जरूरी हवा हूँ शीतल… ऐसा भी नहीं है कि– बस मुहब्बत, खुशबू,…

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सम्मान

सम्मान कुली ने मनोरमा से रुपये लिए और अपनी पहली बोहनी को मस्तक पर लगाकर ट्रेन से नीचे उतर गया | खुशी के कमल मन में सजाए मनोरमा पहली बार छब्बीस जनवरी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इलाहाबाद से दिल्ली जा रही थी | पास वाली सीट पर बैठा युवक मोबाइल में न…

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नई शिक्षा नीति और प्राथमिक शिक्षा

  नई शिक्षा नीति और प्राथमिक शिक्षा भारतीय शिक्षा का इतिहास अगर देखा जाए तो यह तब से है जब से भारतीय सभ्यता का इतिहास है । सभ्यता के साथ साथ निरंतर भारत में शिक्षा की अविरल धारा प्रवाहित होती ही रही है । आज से पूर्व भारतीय समाज में शिक्षा की रूपरेखा जो थी…

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ये गुलाब

ये गुलाब खुद टूटकर भी ये गुलाब दो दिलों को जोड़ता है, खूबसूरती बेहिसाब इसकी रुख इश्क़ का जो मोड़ता है! कांटो से बाबस्ता मगर निखार भी कमाल का , ये मोहब्बत का नूर है जवाब हर सवाल का ! प्रेम की निशानी है सुंदर प्रेम कहानी है रूमानियत की अक्श है धडकनों की जुबानी…

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Life is A Dream

Life is A Dream 1. As if I’d stepped into the world three times Over the earth three rivers flowed Delivering their waters to the great ocean Their stones their sand left outside The edge is meaning of the first river Where in the same figure all branches meet The wreck of a row boat…

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मां की ममता

मां की ममता माँ मेरी माँ तूँ ममता की मूरत है, निश्छल और प्यारी हसीं तेरी सूरत है, वो एहसास आज भी मेरे पास है….. जब तूँ मुझे हर पल अपने आँचल में ही छुपा कर रखना चाहती थी, क्यूंकि तुम्हे डर था की किसी की नज़र न लग जाये मुझे,… मैं बड़ी हो गयी…

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बदलाव

बदलाव दीदी अस्पताल से घर आ गई हैं …चार कंधों पर सवार ..घर की दहलीज से कमरे तक का सफर भारी हो रहा है ,…कमरे का सन्नाटा अचानक महिलाओं .बच्चों के रुदन से गूंज उठा ,–आज घर की मालकिन .लक्ष्मी –चली गई ..पर अपने पीछे यादों का एक लम्बा काफिला छोड़ कर …घर -आंगन में…

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