भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- राम प्रसाद बिस्मिल

राम प्रसाद बिस्मिल सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है जोर कितना बाजूए-कातिल में है इन पंक्तियों को आत्मा में उतार कर कोई जिया हो तो वे हैं राम प्रसाद बिस्मिल। भले ऐसा समझा जाता है इनके रचयिता वास्तव में बिस्मिल अजिमाबादी थे। ११जून १८९७ को शाहजहाँपुर गाँव में पंडित मुरलीधर और…

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आजादी

आजादी क्या?? क्या कहा – ५० रूपये, दिमाग तो सही है तेरा।” काव्या ने जोर से कहा तो रिक्शा चालक ने भी कहा-“हाँ ,मैडम! कुछ अधिक नहीं मांग रहा। पचास रूपये बिल्कुल सही है। मुझे दे दें तो मैं आगे जाऊँ।” काव्या ने कहा “बिल्कुल नहीं दूंगी।२० रूपये लो।अब निकलो यहाँ से।” रिक्शे वाले ने…

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शीतला अष्टमी

शीतला अष्टमी शीतला अष्टमी का उल्लेख स्कंदपुराण में मिलता है. शीतला माता की उपासना का मुख्य पर्व शीतला अष्टमी है. शीतला अष्टमी का पर्व चैत्र मास की कृष्णपक्ष की अष्ठमी को यह त्योहार मनाया जाता है. इस बार शीतला अष्टमी 4 अप्रैल को है. होली के बाद इसे मनाया जाता है. इस दिन शीतला माता…

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“आजादी – उत्सव या कर्त्तव्य “

 ” आजादी – उत्सव या कर्त्तव्य “ आजादी के बहत्तर साल , बोल कर देखिए , एक सुकून और गर्व का एहसास होगा , 15 अगस्त 2019 को हमारा देश आजादी की बहत्तरहवीं वर्षगाँठ मनाएगा। बहुत मुश्किलों और संघर्षों के दौर से निकल कर आज हम उस जगह हैं जहाँ हम ये कह सकते हैं…

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अनुभूति

अनुभूति ” माँ कल मेरे स्कूल में लेख प्रतियोगिता है, क्या आप मेरी मदद कर देंगी ” – अंकुर ने स्कूल से आ कर माँ से कहा । ” हाँ क्यों नहीं बेटा किस विषय पर लिखना है ” – माँ ने प्यार से पूछा । ” प्रेम ” पर — कहा अंकुर ने अरे…

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मौसी

मौसी मैं ‘आल इंडिया ओरिएण्टल कांफ्रेंस’ में शिरकत करने कश्मीर गई हुई थी।उस दिव्य प्रदेश का अवलोकन कर मैं अचरज में थी कि इतना मनोरम दृश्य ! वास्तव में इसे धरती का स्वर्ग कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा। यह तो ख्वाब से भी बढ़ कर है। मैं ऐसा अनुभव कर रही थी, जैसे स्वप्न देख…

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मां के सपने

“मां के सपने” कितने सपने संजोए थे तूने, हम सबके संग, कितने सपने थे तुम्हारी आंखों में, कितनी कल्पनाएं थी, तुम्हारे आंखों में चमक, जिन्दगी जीने की ललक, एक उल्लास मन में लिए, सबको संवारा बड़ी लगन से, अपनी सजग नयन से, कई सपने भी टूटे, फिर भी !! तुम मुस्कुराती रही, हम-बच्चों के संग,…

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दो शब्द प्रेम के नाम

दो शब्द प्रेम के नाम नई दुनिया की नई रंगत, कब फरवरी का माह प्रेम को अर्पित हो गया और वह भी एक विशिष्ट खोल में लिपटा हुआ, पता नहीं, पर प्रेम तो शाश्वत है, इतना व्यापक कि एक पल भी जीवन का धड़कना प्रेम के बगैर संभव नहीं। सृष्टि अगर सृजन से जुड़ी है…

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प्रेमचंद की युग चेतना

प्रेमचंद की युग चेतना कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद का साहित्य हिंदी साहित्य के इतिहास में टर्निंग प्वाइंट के रूप में माना जाता है ,जहां साहित्य जीवन और समाज के यर्थाथ से जुड़ता है ।प्रेमचंद्र का उद्देश्य जीवन और समाज को समझना था। उनकी पैनी दृष्टि जीवन के अनछुए पहलुओं को हमारे सम्मुख लाती हैं ,जो…

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