स्त्रीयोचित गुण ही सशक्तिकरण

स्त्रीयोचित गुण ही सशक्तिकरण अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष की तरह 8 मार्च को आ गया | पिछले दिनों भारतीय महिलाओं ने शारीरिक मानसिक ,राजनैतिक आर्थिक सभी दंश झेले हैं | यौन उत्पीड़न का मानसिक त्रास , बलात्कार और घरेलु हिंसा के शारीरिक घाव ,महंगाई की आर्थिक मार , शाहीन बाग़ और दंगों के राजनीतिक…

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अंतरिक्ष की धरोहर .. कल्पना चावला

अंतरिक्ष की धरोहर .. कल्पना चावला   कुछ कर गुजरने की तमन्ना थी , कुछ जीने का नया तराना था । चांद सितारों से मिलने भरी उड़ान, किसे पता था जिंदगी खत्म करने आ जायेगा तूफान ।। भारत की वह बेटी जिसने प्रथम बार अंतरिक्ष पर अपने पाँव रखे, जिसने अपने मन की कल्पना को…

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शार्दुला की कलम से

सच कहूँ तेरे बिना! सच कहूँ तेरे बिना ठंडे तवे सी ज़िंदगानी और मन भूखा सा बच्चा एक रोटी ढूँढता है चाँद आधा, आधे नंबर पा के रोती एक बच्ची और सूरज अनमने टीचर सा खुल के ऊंघता है ! आस जैसे सीढ़ियों पे बैठ जाए थक पुजारिन और मंदिर में रहे ज्यों देव का…

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हम सुंदर दिखते हैं

हम सुंदर दिखते हैं ट्रिन ट्रिन ट्रिन… मेरी सुबह की शुरुआत ऐसी होती है। सुबह साढ़े छह बजे उठो, गैस पर चाय का पानी चढ़ाओ, उसके खौलने का इंतजार करो। परात में आटा निकालो, उसमें नमक मिलाओ और पानी डालो। फिर उसको धीरे-धीरे गूंथ डालो। चाय का पानी भभक रहा है। चाय की पत्ती डालो।…

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दोगले इंसान

दोगले इंसान सहमी खड़ी है इंसानियत कौन मसीहा कौन हैवान ! सोच-समझ चली चालों को फिर दे देते हादसों का नाम ! पूज कर कन्या रस्म निभाते नज़रों में छुपा रखते शैतान ! ओढ़ मुखौटा धर्म-कर्म-कांड पूजते अल्लाह औ भगवान ! पत्थरों में दिखता जिनको ईश् जीवों की पीड़ा से वो अनजान ! पढ़ न…

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मेरे राम आ गए

मेरे राम आ गए   मेरे राम आ गए प्रभु फिर लौट कर अपने अयोध्या धाम आ गए मुकुट माथे सजा कर अब मेरे श्री राम आ गए   जगमग हुई अयोध्या नगरी प्राण प्रतिष्ठा हो रही ग्रहण है पांच सदियों का व्यथा उर की पुरानी है हुआ अवतार सरयू पर दबी इक इक निशानी…

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तीसरी दुनिया की इन्सान

तीसरी दुनिया की इन्सान जी.. सुनो .. मैं एक अलग दुनिया की इन्सान हूं. जो बिन नींव के महल बनाती हूं.. और ताउम्र उनके टिक जाने ……..का इंतजार भी करती हूं. समुन्दर से आकाश में तारों की इस बाढ़ में.. देखो.. इक दिया .लिये….. खडी़ हूं मैं.. दुखों की इस बगिया का .. अश्रु सिचंन…

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आतंक

आतंक घर के कोने में पड़ा मकड़े का जाला,देता है गवाही, कि वर्षों से यह मकान खाली पड़ा है, आस पास के दीवारों पर पड़े खुन के छींटे, धूल की मोटी परतों के बावजूद, उसे साफ़ – साफ़ दिख पा रहे हैं। नन्हीं गुड़िया सी वह, चैन की नींद सो रही थी, अपने नर्म गर्म…

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एक शिक्षिका ऐसी भी

एक शिक्षिका ऐसी भी बात उन दिनों की है जब मेरी नियुक्ति मुम्बई के एक प्रसिद्ध कनिष्ठ महाविद्यालय में हुई थी।परिवार,दोस्त,रिश्तेदार सभी प्रसन्न थे कि सरकारी नौकरी मिल गयी,अब जिंदगी आराम से गुजरेगी।काम हो ना हो,तनख्वाह तो शुरू ही रहेगी।आज भी सरकारी नौकरी के प्रति लोगों की मानसिकता में अधिक अन्तर या बदलाव नहीं आया…

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कोरोना की मार झेलता बचपन

कोरोना की मार झेलता बचपन कोरोना ने पूरी दुनिया को फिर से सहमा दिया है। पिछले साल के कहर को अभी हम भूले नहीं थे। फिर भी इस उम्मीद से बंधे थे कि कुछ दिनों की बात है, फिर सब कुछ सामान्य हो जाएगा। लेकिन अब कोरोना वायरस की दूसरी खतरनाक लहर इस उम्मीद को…

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