Τurbulence

Τurbulence Deafening sounds surround us Strong winds, painful… Anger overcomes our flesh Eternal the cycle of life We are immersed in absolute darkness We can not catch up The endless journey And the last hymn accompanies us Salvation in a Godless homeland is unbearable… Dr. Sofia Skleida Writer Athens, Greece 0

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Alicia Minjarez Ramírez’s poems

Alicia Minjarez Ramírez’s poems 1.NOCTURNAL SUN There, where the wind fades away The sky waves its own branches Retouching icy mornings In the shades, Blackbirds and pigeons flapping And disturbing the sky. I aimlessly wander through. Every corner evokes Spiral lines of perpetually Ever written sonnets, Unveiled brides Blur the color lines Upon vacant altars….

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- डॉ बिधानचंद्र राय

भारत रत्न डॉ बिधान चंद्र राय  (चिकित्सक,स्वतंत्रता सेनानी समाज सेवी राष्ट्र निर्माता) डॉ बिधान चंद्र रॉय जी को  भारत और विश्व में एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी वरिष्ठ चिकित्सक, शिक्षाविद, निर्भीक स्वतंत्रता सेनानी,कुशल राजनीतिज्ञ और प्रसिद्ध समाज सेवक के साथ-साथ आधुनिक भारत के राष्ट्र निर्माता  के रूप में बड़े ही श्रद्धा और सम्मान से स्मरण…

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कोरा कागज

कोरा कागज सफेद गंदगी से कोसों दूर, दो मोटे तहों के बीच सहेज कर रखी, काली धब्बे स्याह से बची । कोरा कागज था सिर्फ कोरा। जमाने की गंदगी से महरूम था वह, रोडे हिचकोले को जानता नहीं था पहचानता नहीं था। अनगिनत लिखावटों से घिरा है अब वह। रंग रूप से अपना स्वरूप खो…

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एक गुफ़्तगु

एक गुफ़्तगु जिंदगी के पल के साथ सोचूँ बैठु आज तुम्हें लेकर रूबरू गुलाबी इस ठण्ड की चटक धुप में थोड़ी देर…! हो हाथ में गर्म अदरक की कड़क चाय और उलझाऊँ तुम्हें कुछ सवालो के चक्रव्यूह में…! बाँटू कुछ तजुर्बे अपने और पूछूँ कुछ तुम्हारे तरीके जिंदगी के फ़लसफ़े पर करना चाहूँ एक गुफ्तगूं…!…

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इस्तीफा

इस्तीफा हिन्दी कथा साहित्य की प्रथम सीढ़ी प्रेमचंद की कहानियों से प्रारम्भ हुई प्रतीत होती है। तीसरी- चौथी कक्षा से प्रेमचन्द की कहानियाँ जैसे’ बूढी काकी ‘, हामिद का चिमटा ‘, नमक का दरोगा आदि से शुरू होते- होते आत्माराम, कफन, इस्तीफा आदि कहानियों के द्वारा’उच्च स्तर की कक्षाओं तक अपनी अमिट छाप छोड़ती चलती…

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मेरे पापा

मेरे पापा कई बार जब मतलबी बनना चाहा, मेरे पापा की परछाईं ने मुझे बनने नहीं दिया ।। कई बार जब खुद को दोराहे पर खड़ा पाया, मेरे पापा की सीखों ने सही राह ही चुनवाया।। हर परिस्थिति में ढलना, हर संघर्ष से जूझना इस लायक पापा ने ही बनाया ।। ईमानदारी और सच्चाई के…

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‘ईदगाह’ मेरी पसंद

‘ईदगाह’ मेरी पसंद ‘ईदगाह’ हिन्दुस्तान के महान कहानीकार मुंशी प्रेमचंद जी की कहानी है। यह मुझे इसलिए बहुत अच्छी लगती है क्योंकि इस कहानी का मुख्य किरदार एक छोटा सा बच्चा है हामिद । यह अपनी दादी के पास रहता है क्योंकि उसके मां-बाप दोनों की मौत हो चुकी है। बचपन के सामान्य सपने व…

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तेरे जैसा दोस्त कहाँ

जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी! सिर्फ हमारे प्यार में ही नहीं बल्कि दुनिया के हर रिश्ते में शामिल होना चाहिए दोस्ती का एक अहम भाव क्योंकि सुना है दोस्त तब भी जान लुटा सकते हैं जब दोस्त की जान पर बन आए फिर चाहे वो सही हो या गलत, दोस्त अपनाते हैं…

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