शहादत

शहादत शहादत जो हुआ सो हुआ अब तू संभाल ले खुद को दूर चलना है, रास्ता अभी बाकी आशाओं की तरह | आसान नहीं है रास्ता यहाँ जंगल भी है फूलों भरी बगिया भी, खूंखार शेर भी है मासूम तितली भी | फिर भी चलना है लक्ष्य के लिए और दिल में प्रेम लिए.. |…

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पहला झरोखा (मैं और नानी)

पहला झरोखा (मैं और नानी) मैं शायद पाँच साल की… खड़ी हूँ नानी के साथ। चेन्नई का मैलापुर इलाक़ा। स्त्री, पुरुष, युवा सभी कीमती रेशमी कपड़ों में सजे, मैं और नानी सामान्य पर पारम्परिक वस्त्रों में…नानी नौ गज की साड़ी में, मैं सूती पावाड़ा में। सामने मंच पर सुर बद्ध चार संगीतकारों के समूह में…

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विश्व रंगमंच दिवस

विश्व रंगमंच दिवस के. मंजरी श्रीवास्तव थिएटर और कविता का जाना-माना नाम है. मंजरी इसलिए विशेष हैं कि वे थिएटर नहीं करतीं बल्कि थिएटर करनेवालों की बखिया उधेड़ती हैं अर्थात नाट्य समीक्षक हैं, नाट्य आलोचक हैं और एक मुकम्मल शब्द में कहें तो नाट्यविद हैं, कलामर्मज्ञ हैं. मंजरी पिछले 17 वर्षों से दिल्ली में रह…

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तुम लौट आओ

तुम लौट आओ हे बुद्ध तुम लौट आओ क्योंकि तुमने कहा था “ईर्ष्या या घृणा को प्रेम से ही खत्म किया जा सकता है” पर असंवेदनशील आत्माओं के साथ जी रही मानव जाति भूल चुकी है किसी से भी निःस्वार्थ प्रेम करना लौटकर अब तुम प्रेम क्या है इन्हें फिर से याद दिलाओ हे बुद्ध…

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सावन की हरीतिमा

सावन की हरीतिमा सावन की हरीतिमा धानी ये धरती, कजरारी मेघा बारिश की छम छम हरी बिंदिया हरी साड़ी, मह- मह महकती हरी मेहंदी की धमधम!! झूलों की उठान गोरी की तान, बलखाती नदियां मेघों का घम घम!! बौराया मन भरमाया तन, बूंदों की सरगम हवाओं का सन -सन! ये मौसम ये सावन धुला धुला…

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ठाकुर का कुआंँ–प्रेमचंद

ठाकुर का कुआंँ–प्रेमचंद मुझे प्रेमचंद की लिखी यह कहानी ‘ठाकुर का कुआँ’ अत्यंत पसंद है।इस कहानी में अछूत संदर्भ को ही संस्पर्श करती है तथा ऊँच-नीच के भेदभाव को बड़ी ही बारीकी के साथ प्रस्तुत किया गया है। हम सब जानते हैं कि प्रेमचंद आधुनिक युग के एक महत्वपूर्ण लेखक हैं जिन्होंने दलित समस्याओं पर…

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भूदान आंदोलन के प्रणेता – आचार्य विनोबा भावे

भूदान आंदोलन के प्रणेता – आचार्य विनोबा भावे भारत में भूदान तथा सर्वोदय आन्दोलनों के लिए सुपरिचित सन्त विनोबा भावे भगवद गीता से प्रेरित जनसरोकार वाले नेता थें। वे महात्मा गाँधी से बहुत प्रभावित थे तथा गाँधीजी के साथ उन्होंने देश के स्वाधीनता संग्राम में बढ़ चढ़कर भाग लिया था। सन्त स्वभाव के बावजूद उनमें…

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क्या है हिन्दी..?

क्या है हिन्दी..? “हिंदी” क्या है..? एक भाषा, जो संस्कृत से जन्म लेकर संस्कृति का निर्माण करती है..? एक संस्कृति..? जो किसी उन्नत सभ्यता को पहचान दिलाती है..? एक सभ्यता…? जिसमें मिट्टी की पकड़ है सोंधी सी प्राकृतिक महक है..? एक सोंधी सी खुशबू…? जो आत्मा में बसती है ईश्वरीय अहसास कराती है..? एक स्वरूप..?…

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