नारीशक्ति बनाम नारीवाद

नारीशक्ति बनाम नारीवाद दुनिया की आधी आबादी स्त्री;सृजन की स्वामिनी, सृष्टि की सारथी ,पृथ्वी सी पोषिका, हवा सी जीवनदायिनी ,महक की भाँति मनाहाल्दिका, सुमन की तरह सौंदर्यसम, हरियाली की भाँति हर्षिका, वर्षा की तरह नवजीवनवर्धिका परंतु कालक्रम में कई बार और कितनी जगह विसंगतियों के समक्ष खड़ी। “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता:” कई जगह…

Read More

जीवन और संघर्ष

जीवन और संघर्ष विश्वव्यापी कोरोना महामारी ने यह तो समझा ही दिया है कि स्वास्थ्य ही धन है।स्वास्थ्य के अभाव में सभी सुख सु्विधाएँ व्यर्थ हैं।स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन का उपभोग कर सकता हैव इच्छित लक्ष्य प्राप्त कर सकता है।अक्सर यह देखा जाता है कि कुछ लोग मौसम,खानपान व स्थान परिवर्तन से बहुत जल्दी प्रभावित…

Read More

प्रकृति की पुकार

प्रकृति की पुकार प्रकृति के रूप में मिला है हमें अनमोल उपहार पर ना रख पाये हम उसे मूलरूप में बरकरार कराह रही प्रकृति,लगा रही मानव से ये गुहार ना करो मुझे बंजर औ प्रदूषित,बंद करो अपने अत्याचार करती है जब वो प्राकृतिक आपदाओं के रूप में गुस्से का इज़हार मच जाता है चहुं ओर…

Read More

उनको ना भूल पाएँगे

उनको ना भूल पाएँगे स्वतंत्रता के 75वें साल को मनाते हुए अचानक उन सबकी याद आना जरूरी है। उनके त्याग एवम्‌ बलिदान को कैसे भूल सकते हैं। उनकी जवानी को उन्होंने कुर्बान कर दिया। कर्नाटक राज्य में एक परम्परा का परिपालन किया जाता है जिसमें उन स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान दिया जाता है। उनको आमंत्रित…

Read More

A Successful Woman

A Successful Woman What is success? Is it a subjective feeling of contentment with a job well done? A target achieved and a goal reached after overcoming obstacles? Or is it an evaluation by others, based on certain accepted benchmarks? Is it achievable at every little milestone of life? Or is it a lifetime achievement…

Read More

हिंदी की पीड़ा

हिंदी की पीड़ा हिंदी, आज हिंदी दिवस का निमंत्रण पाकर वैसे ही खुशी से उछल पड़ी जैसे करवा-चौथ पर पति अपनी महत्ता देखकर फूला नहीं समाता है. वो उठी और सोलह श्रृंगार करके सभा-स्थल की ओर बढ़ गयी.वहाँ पर उसे विशिष्ट-अतिथि की कुर्सी पर बिठाया गया. ये देखकर उसका मन बल्लियों उछलने लगा.थोड़ी देर में…

Read More

कैसे कहूं चहूं दिशा में गुणगान करु

कैसे कहूं चहूं दिशा में गुणगान करु ममता तेरी भावों में मैं बांध नहीं पाती मां तुम मेरे लिए क्या हो कैसे बतलाऊ चाहकर भी मै शब्दों में ढाल नहीं पाती समय चक्र पर बैठे देखा है हरदम तुमको सबकी खुशियों को गढकर प्रेम ही भरते देखा खुद को मिटाकर हमे कामयाब बनाने जुनून तेरी…

Read More

एक लौ उम्मीदों की

एक लौ उम्मीदों की धरती से लेकर आसमां तक उदासियों का मंजर फैला है हर तरफ़ हैं खबरें मौत की हर तरफ़ आंसुओं का रेला है सोचा था संभल जाएंगे हम धीरे-धीरे ज़िन्दगी की उधड़ी तुरपाईयों को जतन से सी लेंगे हम धीरे-धीरे पर इम्तहान की हद अभी बाकी है कुछ कर्ज़ की किश्त अभी…

Read More

मैं कतरा कतरा

मैं कतरा कतरा मैं क़तरा क़तरा अन्तस् का लो तुम्हें समर्पित करती हूँ। बस याद में तेरी दीपक सी प्रिय लौ बनकर मैं जलती हूँ। मेरे जीवन के मरुथल में, तुम ही पानी की धार बने। पतझड़ के मौसम में प्रियतम, तुम साँसों का आधार बने। अब दरस की आस में अँखियों से, मैं स्वयं…

Read More