वृंदावन की होली

वृंदावन की होली आज जो चली वृंदावन की टोली गीतों की मीठी सुरम्य बोली लगी थाप ढोल पर धमक-धम थिरक-थिरक रंगों की झोली हंसते-हंसते नज़रें झुकीं भोली। गगनांगन में मची धूम वृंदावन की मिट्टी राग रंगी लाल, पीली, नीली, काली धरा भूरी, यमुना काली गोवर्धन की काया हरी-भरी कदम्ब पेड़ हुआ भर-भर पीला उबटन और…

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कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद

कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद मुंशी प्रेमचंद जी इस युग के महान कथा सम्राट हैं । मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित उनका जीवन परिचय करता है। आदर्शोनुमुख, यथार्थवाद , प्रेमचंद साहित्य की मुख्य विशेषता है । इनके जीवन का सफर बहुत कठिन था पर उनका आत्मबल ,उनका आत्मविश्वास ,इतना प्रबल था कि उन्होंने हर आंधी तूफान को…

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ऑनलाइन खाना

    ऑनलाइन खाना पिताजी के इस दुनिया से जाने के बाद माँ का आना-जाना लगा ही रहता था। प्रिया उनकी इकलौती संतान थी,पिताजी के जाने के बाद माँ एकदम अकेली पड़ गई थी।घर का कोना-कोना पिता जी के साथ बिताए मधुर पल की याद दिलाता रहता,जब माँ घर के अकेलेपन से डरने लगती तो…

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प्रतिभाशाली रानी- एलिजाबेथ प्रथम

प्रतिभाशाली रानी- एलिजाबेथ प्रथम वे गगन सी विस्तृत,सूरज सी ओजस्वी और ध्रुव तारे सी उज्ज्वल थीं । वे उच्च चारित्रिक मूल्यों वाली सशक्त महिला थीं और एक महान रानी थी। एलिजाबेथ प्रथम का जन्म 7 सितम्बर, 1533 को पैलेस ऑफ प्लेसेंटिया ,ग्रीनविच, इंग्लैंड में हुआ था। हेनरी अष्टम और उनकी दूसरी पत्नी ऐनी बोलिन की…

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तुम में ही खुद की तलाश है

तुम में ही खुद की तलाश है लोग कहते है तू मेरी परछाई है मैं कहती हूँ तू मुझमे है मैं तुझमे हूँ ये क्या एहसास है कि तुम में ही खुद की तलाश है ज़ब भी देखूँ तुम्हे मेरा अक्स नज़र आये आइना है मेरा तू ,तुझे देख ही श्रृंगार हो जाये ये क्या…

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तड़प

तड़प यादों की धूप में बैठी अंजली का मन साइबेरिया के पंछी की तरह इस शहर से उस शहर उड़ रहा है । अपनी बालकनी से ही न जाने कहाँ कहाँ की सैर कर रही है ।आज उसका मन फिर से विचलित हो रहा था। उसे आज राज की यादें आ रही थी । गाँव…

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दिवाली का घरौंदा

दिवाली का घरौंदा मान्यताओं के अनुसार दीपावली प्रभु राम के चौदह वर्ष के वनवास के बाद पुनः अयोध्या नगरी लौटने पर मनाया जाता है। घर घर मिट्टी के दिए, वंदनवार ,रंगोली की सजावट से उनके आगमन की खुशी का इजहार करना ही उद्देश्य होता है। उस वक़्त को आज भी कुछ नए तौर तरीकों से…

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जीना सिखा दिया इस ‘आफ़ात’ ने मुझे

जीना सिखा दिया इस ‘आफ़ात’ ने मुझे लूटा बहुत है वक्त औ हालात ने मुझे! घायल किया है बस इक़ मुलाकात ने मुझे!! अच्छे कभी थे हम भी जहां की निगाह में बदनाम कर दिया है खुराफात ने मुझे!! अफ़सोस मेरे हाल पे बिल्कुल न तुम करो दी है सज़ा ये मेरी ही अगल़ात ने…

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दिव्या माथुर-सुपर अचीवर

दिव्या माथुर -सुपर अचीवर वातायन- यूके की संस्थापक, रॉयल सोसाइटी ऑफ़ आर्ट्स की फ़ेलो, लंदन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन-2000 की सांस्कृतिक अध्यक्ष, यूके हिन्दी समिति की उपाध्यक्ष और कथा-यूके की अध्यक्ष­ रह चुकी, दिव्या माथुर का नाम ‘इक्कीसवीं सदी की प्रेणात्मक महिलाएं’, ‘ऐशियंस हूज़ हू’ और विकिपीडिया की सूचियों में भी सम्मलित है।  25 वर्षों तक नेहरु केंद्र-लन्दन में वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी के रूप…

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