कभी देखा है किसी स्त्री को कर्ण होते..!!

कभी देखा है किसी स्त्री को कर्ण होते..!! कभी देखा है किसी स्त्री को कर्ण होते..!! कानो में कुंडल जिस्म पर कवच धारण किए हुए..??? संवेदनाओं का लक्ष्य भेद कुण्डलों सा सामाजिक विचारों को धारण करने की बातें।हाथों में मर्यादाओं की चूड़ियाँ, माथे पर भव्य सुर्ख लाल सौभाग्य की बड़ी सी बिंदी मानो सूर्य को…

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शिखर से पहले

शिखर से पहले दरवाजा खोलते ही सामने अंजान शख्स को देख विभा हैरान हो गई। हाथ में कुछ सामान लिए उस पच्चीस-छब्बीस वर्षीय युवक के चेहरे में न जाने कैसा अपनत्व था कि बिना संकोच के उसे अंदर आने दिया। “नमस्ते मैम! पहचाना नहीं मुझे?” सोफे पर बैठते हुए उस शख्स ने कहा। “कौन, भुवन…

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माँ तेरे सोच जैसा

“माँ तेरे सोच जैसा….” मेरे सारे सपनों को , अपना ही मानकर मेरी परेशानियों में , हाथ मेरा थामकर मुझमें वह एक अटूट विश्वास भरती थी बस , हर वक़्त एक चमत्कार करती थी कब सोती, कब वह जगती , रब ही जाने पर , मिन्नतें दुआयें , वह हजार करती थी अपनी आंखों में…

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बसंत बहार

बसंत बहार पीली सरसों पीले खेत बसन्ती छटा में रंगा धरती का परिवेश पवन सुगन्धित मन आह्लादित बसंत बहार सुनाये रे… पतंग रंगा, नीला आकाश “वो काटा” से गूंजा जाए अमराई बौरें झूम झूम डोलें मन मयूर बहका जाए रे… सरस्वती पूजन मन्त्रोच्चारण, कानों में शहद सा घुलता जाए हिय हुलसै,मन उडे बचपन की गलियों…

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हे माँ शारदे

हे माँ शारदे अंतर्मन में बसी है मूरत मनमोहिनी प्रेममयी सूरत हे माँ वीणावादिनी शारदे कृपा कर माँ, आशीष वर दे। शुक्ल पंचमी के पावन तिथि पर आती तू जब इस धरा पर बसंत के बयारों को साथ लाती नए प्रेम की कलियाँ खिलाती बाल वृद्ध में उमंगें भरती नव जीवन का आह्वान करती हे…

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हां मैं प्रेम में हूं

हां मैं प्रेम में हूं प्रेम में हूँ..! हां मैं प्रेम में हूं..! स्वयं के..! और लगता मुझे… ये सारा संसार है प्रेममय…! शबनमी रेशमी एक सूत.. एक धागा महीन सा..! जुड़ता जोड़ता… रूहों की खुशबूओं से.. रूहों को… और रूहानियत से.. सराबोर ये ब्रम्हांड…! कल कल करता झरने सा…! अकूत स्तोत्र के खजानों संग……

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प्रेमचंद का ‘नशा’

प्रेमचंद का ‘नशा’ यूँ तो प्रेमचंद की सारी कहानियां दिल को छू लेने वाली हैं.पर उनमें से एक जो मेरे दिल में गहरी उतरती है वह है उनकी उत्कृष्ट रचना ‘ नशा ‘. यह कहानी हमारे स्कूल के हिन्दी पाठ्यक्रम का एक हिस्सा थी औऱ उस उम्र में भी इसका मर्म मुझे झकझोर गया था….

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भारत के महानायक:गाथावली स्वतंत्रता से समुन्नति की- अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी:भारतीय राजनीति के अजातशत्रु भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अपने नाम के ही समान अटल एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय नेता, प्रखर राजनीतिज्ञ, नि:स्वार्थ सामाजिक कार्यकर्ता, सशक्त वक्ता, कवि, साहित्यकार, पत्रकार और बहुआयामी व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे। अपने प्रारंभिक जीवन में खुद का परिचय देते लिखते है – “हिन्दू तन मन, हिन्दू जीवन, रग रग हिन्दू…

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Father’s Day

मेरे बाबूजी भोले भाले ,सीधे-साधे, सबसे अच्छे बाबूजी थे । दृढ़ प्रतिज्ञ, उज्जवल चरित्र, कर्म योग के योगी थे। सबसे प्यारे सबसे अच्छे बाबूजी थे। अनुशासित जीवन था उनका। उच्च कोटि के शुद्ध विचार। न्याय सदा करते थे। सबसे प्यारे सबसे अच्छे बाबूजी थे । गहराई से सोच समझ कर कर, बात समय पर करते…

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