मजदूर का बेटा
मजदूर का बेटा हम साथ साथ पढ़ते तब , 8 वीं की बात रही होगी, मेरी टक्कर हमेशा से ही उससे हो जाती थी, और मैं हमेशा उससे हार जाता था। खेल में, कक्षा के रिजल्ट के स्थान में, हमेशा वो मुझसे बाजी मार लेता था। मुझे इस बात से उससे चिढ़ हो गई थी,…
मजदूर का बेटा हम साथ साथ पढ़ते तब , 8 वीं की बात रही होगी, मेरी टक्कर हमेशा से ही उससे हो जाती थी, और मैं हमेशा उससे हार जाता था। खेल में, कक्षा के रिजल्ट के स्थान में, हमेशा वो मुझसे बाजी मार लेता था। मुझे इस बात से उससे चिढ़ हो गई थी,…
माँ तुम कितना झूठ बोलती हो माँ तुम कितना झूठ बोलती हो , हाँ माँ तुम कितना झूठ बोलती हो बुखार में तपती भी होती हो , पर फिर भी काम करती रहती हो कहाँ है बुखार कहके हमसे , माँ तुम कितना झूठ बोलती हो परदे बंद करके रोशनी ढक के , हमें आराम…
मास्टर साहब कहिन किस्सा एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के मास्टर साहब की है।आज मास्टर साहब के घर पर अफरा-तफ़री का माहौल है।श्रीमती जी कपड़े प्रेस कर रही, सुपुत्र जूता पॉलिश कर रहा , स्वयं मास्टर साहब दाढ़ी बनाने में व्यस्त।कुल मिलाकर घर का माहौल बड़ा गर्म था।कोई और दिन होता तो बिना प्रेस कपड़ा, बिना…
सृष्टि करती कुछ सवाल….. क्या होता गर बच जाती उसकी जान… आ जाती लौट कर घर,वह बेटी लहूलुहान। स्वीकार कर पाते तुम उसको….? देते उसको उसका स्थान…..? या भोगती वह ,अपने ही ऊपर हुए जुल्म की सज़ा दिन-रात? अनन्त तक खिंच जाती वेदना -व्यथा की रेखाएँ…. जब देखती वह माँ का करुण विलाप.. दिशाओं को…
Parthenon Light Ηowling wind shakes your soul, penetrates it, It’s the miracle of divine creation and inspiration, Called maternal instinct, What nourished you, Woman and mother, Tireless companion and nurturer of emotions and rebirth, Fighter of life, Stable companion and sustainable resource of cell replacement, Unforgotten, Glorious and holy, You vibrate our universe, You constructively…
COVID AND HEALTH As the world continues to deal with the COVID-19 pandemic at least a third of the global population continues to find itself under a so-called ‘lockdown’, while others are having to follow some form of social distancing. While many countries are considering plans to lift restrictions in the coming months, this will…
क्षितिज की ओर मुग्ध हो कर देख रहा हूं और बह रहा हूं अस्तित्व की बाढ़ में तेरी अविजित मुस्कान इधर झनझनाती तंत्रियों में शुरू सामूहिक गान। तू झुलसा रही मेरे अहं को मेरी दुर्बलता को उमड़ रहा न जाने क्या झुकती नज़र, कभी उठती नज़र पर इसके माने क्या? फुलवारी कुछ…
जुगनू अम्मा आज सुबह से ही मन उदास सा है। रात भर नींद नहीं आई थी और अब सात बजने पर भी आंखें खुल नहीं रही हैं। फटाफट फ्रेश होकर गैस पर चाय चढ़ा दी और तेज पत्ती डालकर कप में छानकर बाहर बालकनी में आ गया। आजकल सुबह कितनी सुहानी हो गई है। चिड़ियों…