ढ़ाई आखर प्रेम
ढ़ाई आखर प्रेम प्रेम शाश्वत है।इसे परिभाषित करना कठिन है।प्रेम ही जीवन का आधार है।मानव जीवन का अन्तहीन सफ़र है।मानवीय मूल्यों का निकष है प्रेम।प्रेम ही रसों का उद्गमस्थल है। बिना प्रेम दुनिया में जीना असंभव है। प्रेम स्त्री पुरुष में ही नहीं सीमित है।यह कभी कहीं किसी से हो सकता है। यहाँ पति पत्नी…
हिन्दी फिल्में और हिन्दी का प्रसार
हिन्दी फिल्में और हिन्दी का प्रसार कहते हैं कि राजनीति, फिल्में और क्रिकेट — हम भारतवासियों का अस्सी से ज्यादा समय इनकी चर्चा करने में ही बीतता है। इन तीनों ने देश को कभी तोड़ा भी है और बहुत कहीं जोड़ा भी है। फिल्मों का तो भारतीय जीवन में और उनके मानस पटल पर बहुत…
आपदा में अवसर
आपदा में अवसर मुद्दे की राजनीति अच्छी लगती है| हर मुद्दे पर राजनीति अच्छी नहीं लगती| इधर एक भयंकर रवायत चल पड़ी है| अति सम्वेदनशील विषयों को अखाड़े में खींच लाना और उसी पर कुकुरकाट मचाना| कोरोना को अन्य देश के नागरिक भयंकर आपदा के रूप में देख रहे हैं| आम आदमी से लेकर सरकार…
Regret for the Soil
Regret for the Soil I have came to the hostile land I feared from infecting Infecting to the regret for the soil I have no shelter Except of cold embracement of winter There are the ruminations before me The roof of my home is chaffy My luggage is shabbily chagrin My crime is most heavily…
The Wintertime Lover
The Wintertime Lover Skipping through the surface of pond, your smile greets me with solemn pride, a relentless poker-faced killer. nonchalant and composed. The four- leaf clover sprang up from the earth, longing for your gentle touch. Alas, you turned away in disdain for such a young love in bud. A flicker of hope came…
उचित सहयोग
उचित सहयोग जब से संदीप को पैरालिटिक अटैक आया था और उसका कामकाज बंद सा ही हो गया था, तब से परिवार की आर्थिक स्थिति डवाँडोल रहने लगी थी। वैसे तो उसकी पत्नी काजल बहुत ही समझदार और संतुलित महिला थी, हिसाब किताब से घर चलाना उसे आता था, किसी से सहयोग लेना भी…
शार्दुला की कलम से
सच कहूँ तेरे बिना! सच कहूँ तेरे बिना ठंडे तवे सी ज़िंदगानी और मन भूखा सा बच्चा एक रोटी ढूँढता है चाँद आधा, आधे नंबर पा के रोती एक बच्ची और सूरज अनमने टीचर सा खुल के ऊंघता है ! आस जैसे सीढ़ियों पे बैठ जाए थक पुजारिन और मंदिर में रहे ज्यों देव का…
हिंदी पर ग़ज़ल
हिंदी पर ग़ज़ल वतन की आन है हिन्दी , वतन की शान है हिन्दी वतन की आत्मा हिन्दी, वतन की जान है हिन्दी ॥ सरल है व्याकरण इसका ,सरल है लिखने पढ़ने में करें हम काम हिन्दी में,बहुत आसान है हिन्दी ॥ विलक्षण सभ्यता साहित्य का दर्शन कराती है ज़मानेभर में भारत देश की,पहचान है…