मैं ख़ुद ही हूँ एक गुलाब
मैं ख़ुद ही हूँ एक गुलाब प्रतीक्षा तो थी मिलेगा मुझे भी गुलाब मन मसोस कर रह गयी जब बिन कुछ कहे चले गए वो, मायूस हो जा खड़ी हुई आईने के सामने क्या सचमुच उम्र हो चली अब ? क्या नहीं हक़ एक गुलाब का भी ? तभी आई अंतस से आवाज़ न हो…
मैं ख़ुद ही हूँ एक गुलाब प्रतीक्षा तो थी मिलेगा मुझे भी गुलाब मन मसोस कर रह गयी जब बिन कुछ कहे चले गए वो, मायूस हो जा खड़ी हुई आईने के सामने क्या सचमुच उम्र हो चली अब ? क्या नहीं हक़ एक गुलाब का भी ? तभी आई अंतस से आवाज़ न हो…
Shyam Benegal, A Director Par Excellance Born in Alwal, Andhra Pradesh on December 14, 1934 ,Shyam Benegal, a forerunner of parallel cinema and master story teller who always showed concern for society, breadth his last in the evening of 23rd December at Mumbai. Aged 90, he is survived by his wife and a daughter.He was…
भारतीय गणतंत्र का मूल्यांकन कोविड-19 से उपजी समस्याओं और दुश्चिंताओं के बीच देश 72वां गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी में है।धर्मनिरपेक्ष ,समाजवादी और लोकतान्त्रिक गणराज्य भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इसी उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष राष्ट्रपति द्वारा दिल्ली के राजपथ पर राष्ट्र-ध्वजारोहण किया जाता है।सभी भारतीय नागरिकों द्वारा यह…
सूर्योपासना का महापर्व: लोकपर्व छठ आस्था की भावभूमि भारत, जहाँ संस्कृतियों की महानदी आकर एकाकार हो जाती है, जहाँ जीवन त्योहारों, लोकपर्वों, परंपराओं की रंगोली से सदैव सुशोभित होता रहता है, ऐसे’ विविधता में एकता ‘ वाले देश की अपनी विशिष्टता है- विविध प्रांतों की अपनी-अपनी क्षेत्रीय संस्कृति, उस संस्कृति के अनुरूप मनाए जाने वाले…
“माँ तेरे सोच जैसा….” मेरे सारे सपनों को , अपना ही मानकर मेरी परेशानियों में , हाथ मेरा थामकर मुझमें वह एक अटूट विश्वास भरती थी बस , हर वक़्त एक चमत्कार करती थी कब सोती, कब वह जगती , रब ही जाने पर , मिन्नतें दुआयें , वह हजार करती थी अपनी आंखों में…
PEACE ON EARTH Christmas is a time of venerable peace, You can look at bejewelled stacks of trees, And the world often perceived as intense, When family reunions break messy fences. Snow’s candid praise bedecks the gate, Children hang their socks and wait , It is the eve of Christmas never late, Harbinger of change…
भारतीय सिनेमा के रत्न – सत्यजित राय 2-3 साल की शैशवावस्था में पिता का साया सिर से उठ गया और मामा के यहाँ रहना हुआ। ननिहाल का वातावरण साहित्यिक और संगीतमय था। घर में तमाम लोगों का आना-जाना लगा रहता था। माँ सुप्रभा देवी अपना सारा लाड़-प्यार अपने इकलौते बेटे सत्यजित पर लुटातीं। बाबा (पिता…
Sukardi Wahyudi’s poem MATARA IS A WILD LAND Matara is a wild land picking the light in a full moon incantation is left to the shadow come here whose far away from the eyes be a hero whose standing closer holy heart, there are no stains treating heart attack without difficulty Fuh! Fuh! Fuh! the…
वृंदावन की होली आज जो चली वृंदावन की टोली गीतों की मीठी सुरम्य बोली लगी थाप ढोल पर धमक-धम थिरक-थिरक रंगों की झोली हंसते-हंसते नज़रें झुकीं भोली। गगनांगन में मची धूम वृंदावन की मिट्टी राग रंगी लाल, पीली, नीली, काली धरा भूरी, यमुना काली गोवर्धन की काया हरी-भरी कदम्ब पेड़ हुआ भर-भर पीला उबटन और…