पधारो हे अतिथि

पधारो हे अतिथि नववर्ष कुसुम हुआ है आज पुष्पित पल्लवित, देखो मोरे घर आंगन द्वारे उजास प्रकाश का स्त्रोत सांझ सकारे पधारो हे अतिथि अभिनंदन तुम्हारा इनकी सुगंध और निराली अदाएं बरसातीं हैं लिए, मेह नेह, इनकी हवाएँ दवाओं से बढकर करतीं असर इनकी अप्रतिम अदाएं अलौकिक दुआएं, ये चांद रातों में, अमृत बरसाएं, झूमें…

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दिखता

दिखता घर के बाहर गली गली में सन्नाटा सा पसरा दिखता बन्द हो गया हाथ मिलाना करे दूर से सभी नमस्ते शोर शराबा कहाँ खो गया पूछ रहे हैं हमसे रस्ते समय भूलकर अपनी गति को एक जगह ही ठहरा दिखता ऑफिस घर में स्कूल घर में बदल गई दिनचर्या सारी उलझन अब तक सुलझ…

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आओ करें हम जल का दान

आओ करें हम जल का दान मूख से मरे ना कोई बिन भोजन तरसे ना कोई कृषको का श्वेत रक्त थोड़ा अल्प बहे बंजर बसुंधरा की प्यास बुझानेको आओ करें हम जल का दान!! निमुह नीरीह पशुओं और गैया को खग चीं चीं कुहु गौरैया को शस्य श्यामला धरती मैया को आओ करें हम जल…

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A Nondescript Thought

A Nondescript Thought One of the noticeable and remarkable annual events,World Environment Day(WED) is being organised in all the Continents since1972.It is one of the Dream if Not Cream initiatives of the UNO.It aims at creating adequate awareness about importance of nature,the nature which surrounds us,the nature that comprises of Bio-diversity. The components thereof, are:…

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गाँधी का शिक्षा दर्शन : कितना प्रासंगिक

गाँधी का शिक्षा दर्शन : कितना प्रासंगिक महात्मा गाँधी के विराट् व्यक्तित्व का प्रभाव भारतीय मानस पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्श जीवन से कम नहीं है. अल्बर्ट आइंस्टीन ने सही कहा था कि आने वाली सदियां विश्वास नहीं करेंगी कि गांधी जैसा हाड़ मांस का कोई पुतला इस धरती पर चला होगा।राष्ट्र पिता मोहन…

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आह्वान

आह्वान नारी अबला नहीं , तुम हो सबल। शक्ति से भरपूर। सृजन करती हो, सृष्टि करती हो, रचनाकार हो इस धरती की। जीवन नहीं है एक अंतहीन अंधेरी सुरंग, उसे तुम आलोकित करो अंत:तिमिर का नाश करो। अपने अंदर का विश्वास जगाओ। रश्मि किरणों का अहसास करो, विधु की शीतलता का भी तुम विस्तार करो।…

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हरेला

हरेला आज सोलह जुलाई है। इस दिन हमारे उत्तराखंड का राजकीय पर्व हरेला मनाया जाता है। पर्व की परंपरा यह रही है कि परिवार के मुखिया एक टोकरी में मिट्टी डालकर उसमें गेहूं, जौ, मक्का, उड़द, गहत, सरसों, चना बो देते हैं। नवें दिन डिकर पूजा यानी गुड़ाई होती है। दसवें दिन हरेला काटा जाता…

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“आजादी – उत्सव या कर्त्तव्य “

 ” आजादी – उत्सव या कर्त्तव्य “ आजादी के बहत्तर साल , बोल कर देखिए , एक सुकून और गर्व का एहसास होगा , 15 अगस्त 2019 को हमारा देश आजादी की बहत्तरहवीं वर्षगाँठ मनाएगा। बहुत मुश्किलों और संघर्षों के दौर से निकल कर आज हम उस जगह हैं जहाँ हम ये कह सकते हैं…

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संप्रभु भारत में गणतंत्र दिवस

संप्रभु भारत में गणतंत्र दिवस प्रत्येक भारतीय के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण दिन हैं: १५ अगस्त को मनाए जाने वाला स्वतंत्रता दिवस और २६ जनवरी को मनाए जाना वाला गणतंत्र दिवस। दोनों के बीच बुनियादी अंतर यह है कि १५ अगस्त १९४७ को भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की, लेकिन १९५० में देश के संविधान को…

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शहीद-ए-आजम

शहीद-ए-आजम ” वेदना में एक शक्ति है, जो दृष्टि देती है। जो यातना में है, वह द्रष्टा हो सकता है।”- यह अज्ञेय द्वारा रचित “शेखर एक जीवनी- भाग एक” पुस्तक की पहली पंक्ति है। सत्य है, वेदना मनुष्य को अन्याय का प्रतिकार करना, उसके विरुद्ध मोर्चा लेना और कभी -कभी जान की कीमत लगा कर…

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