सुहानी बारिश

सुहानी बारिश “मुनियाँ के दद्दा !…… सो गये का ?” पत्नी ने झिंझोड़ कर पूछा तो करवट ले कर उठते हुए रामदीन बोला …. “नहीं री नींद कहाँ आवेगी …. तीन दिनों से पानी पड़ रहो है ….. बच्चन के पेट में अन्न का दानों भी नहीं गयो । समझ नहीं आ रहो का करें”…

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स्वराज एवं एक भाषा के हिमायती – महर्षि दयानन्द सरस्वती

स्वराज एवं एक भाषा के हिमायती – महर्षि दयानन्द सरस्वती महर्षि दयानन्द सरस्वती के बारे में जब चिन्तन करने लगते है तो सामान्य मनुष्य अथवा महापुरूषों के व्यक्तित्व व कृतित्व के समान चिन्तन तो करना ही होता है किन्तु यहां पर एक विशेष चिन्तन की गहनता दिखती है, जो उनका ‘ऋषित्व’ होता है। गुजरात के…

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एक लौ उम्मीदों की

एक लौ उम्मीदों की धरती से लेकर आसमां तक उदासियों का मंजर फैला है हर तरफ़ हैं खबरें मौत की हर तरफ़ आंसुओं का रेला है सोचा था संभल जाएंगे हम धीरे-धीरे ज़िन्दगी की उधड़ी तुरपाईयों को जतन से सी लेंगे हम धीरे-धीरे पर इम्तहान की हद अभी बाकी है कुछ कर्ज़ की किश्त अभी…

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सावन- भगवान शिव का पवित्र महीना

सावन- भगवान शिव का पवित्र महीना देवों के देव महादेव रूप अद्भुत निराला डमरू धारी त्रिपुरारी नरमुंड,गले कंठमाला सावन में तुम पूजे जाते हर ओर शिव की गूंज त्रिशूल हाथ में, तांडव साथ में सोहे हर एक रूप कैलाशपति,नीलकंठधारी आओ बन प्रलयकारी।आई है देखो विपदा ऐसी हर लो दुख हे त्रिपुरारी भोले भंडारी।बेलपत्र,भांग से पूजे…

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देश पर बदनुमा दाग ; कश्मीरी पंडितों का कश्मीर से पलायन

देश पर बदनुमा दाग ; कश्मीरी पंडितों का कश्मीर से पलायन अखंड भारत पर ग्रहण उसी समय लग चुका था जब 1947 में नेहरू जैसे रहनुमाओं ने कश्मीर को अलग से संविधान की सुविधा के रूप में 370 धारा जैसा कोढ़ दे दिया। इसी का लाभ उठाकर मजहब के नाम पर अलग होने वाले कुछ…

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पिता पूरा संसार है

पिता पूरा संसार है माँ आधार है तो पिता पूरा संसार है पूरी दुनिया में जो बिना थके चले वो बेशुमार प्यार है बच्चों का भविष्य सुधार सके इसके लिए हर दम तैयार है ऊपर से सख्त अंदर उनके प्यार ही प्यार है माँ आधार है तो पिता पूरा संसार है जिससे सीखा ईमानदारी का…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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कड़ियाँ

कड़ियाँ सात वर्षों के बाद इस जगह से मेरी विदाई हो रही थी। हिन्‍दी टीचर के रूप में यह मेरी पहली पोस्टिंग थी। जिन बच्‍चों को मैंने नौ-दस साल में देखा था, अब वो बड़ी हो गई थीं। आभा और करूणा ने विदाई पर कुछ कहा नहीं, एक लिफाफा पकड़ा दिया, पहले की यादें ताजा…

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