संघर्ष – ज्ञान के प्रकाश का

संघर्ष – ज्ञान के प्रकाश का आज जब मैं पलट कर अपने जीवन के पिछले पच्चीस वर्षों को देखती हूँ तो उसमें मुझे मेरे दो बच्चे ही नज़र आते हैं। पहला मेरा बेटा सौम्य दीप, अपने नाम के अनुरूप ही शान्त, अपने आप में रहने वाला जिसने मुझे ‘माँ’ के सर्वोच्च ख़िताब से नवाज़ा, मातृत्व…

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संवाद

संवाद “अरि ओ पिंकी,सुना है तेरे पड़ोस में एक नई फैमली रहने आई है,कैसा है वह परिवार?” रिंकी ने घर मे घुसते ही अपनी सहेली पिंकी से पूछा। पिंकी अपनी प्यारी सहेली को देख बहुत खुश हुई,और बोली” मैं सोंच ही रही थी तुम्हें इस नये पड़ोसी के विषय में बताऊँ, जैसा कि तुम्हें पता…

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शारदा

शारदा सारे काम निपटा कर मैं चाय का प्याला लेकर बैठी ही थी कि फोन की घंटी बजी।सरिता का फोन था..”सुमि,मैंने शारदा से तेरे घर के काम के लिए बात कर ली है..एक बार आकर मिल सकोगी?आकर एक बार आमने-सामने बात कर लेती तो…” “शारदा”–एक नाम,जो न जाने कौन सा तार छेड़ गया मन का…

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अयोध्या की ऐतिहासिकता

अयोध्या की ऐतिहासिकता   अयोध्या की ऐतिहासिकता को समझने से पूर्व यह जान लेना आवश्यक है कि अयोध्या शब्द “अयुद्धा” का बिगड़ा हुआ रूप है ।अयोध्या के अस्तित्व का इतिहास आरंभ होता है सूर्यपुत्र वैवस्वत मनु द्वारा इसे बसाए जाने से। विश्व प्रसिद्ध ग्रंथ रामायण में उल्लेख है कि — अयोध्या नाम नगरी तत्रासीत लोक…

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उम्मीदें अभी बाकी हैं

उम्मीदें अभी बाकी हैं जितनी तेजी से मानव सभ्यता का विकास हुआ है, उतनी ही तेजी से प्रकृति और प्रदत प्राकृतिक संसाधनों का दोहन। शोध और अध्ययन भी अनवरत जारी हैं और सामने आने वाले निष्कर्ष कई बार चिंता और डर से युक्त परिस्थिति पैदा कर रहे हैैं। वैश्विक तापमान में वृद्धि एक बड़ी समस्या…

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महात्मा गांधी का जीवन विश्व कल्याण के लिए

महात्मा गांधी का जीवन विश्व कल्याण के लिए गांधीजी की कार्य शैली और साधना वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत पर आधारित रही । गांधी जी के समन्वयवादी सिद्धांत मनुमष्य के विवेक की धुरी हैं । सत्याग्रह और अहिंसा पर आधारित गांधी जी की विचारधारा और कार्यशैली संपूर्ण विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है ।…

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मेरी पीढ़ी का सच

मेरी पीढ़ी का सच कहा जाता है एक व्यक्ति अपने जीवन में पाँच जीवन जीता है,देखता है और समझता है।दादा-नाना से लेकर नाती- पोते तक पर सबसे अधिक लगाव मनुष्य को अपनी पीढ़ी से ही होता है। देश की स्वतंत्रता के वे प्रारंभिक दिन थे।बचपन उसका भी था और मेरा भी।उत्साह और उमंग से भरे…

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पधारो हे अतिथि

पधारो हे अतिथि नववर्ष कुसुम हुआ है आज पुष्पित पल्लवित, देखो मोरे घर आंगन द्वारे उजास प्रकाश का स्त्रोत सांझ सकारे पधारो हे अतिथि अभिनंदन तुम्हारा इनकी सुगंध और निराली अदाएं बरसातीं हैं लिए, मेह नेह, इनकी हवाएँ दवाओं से बढकर करतीं असर इनकी अप्रतिम अदाएं अलौकिक दुआएं, ये चांद रातों में, अमृत बरसाएं, झूमें…

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ये पात्र हर तीसरे घर में हैं ….

ये पात्र हर तीसरे घर में हैं …. प्रेमचन्द को याद करते ही ढेर सारे पात्र साथ साथ चले आते हैं, दिमाग में मन्डराने लगते हैं फ़िर चाहे वह धुनिया,झुनिया, गोबर, होरी, निर्मला, तोताराम हों या कहानियों में से झांकते हलकू, अलगू जुम्मन ,खाला, बड़े घर की बेटी, बुधिया, हामिद, दादी, हीरा मोती की जोडी…

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