बसंत

बसंत पतझड़ से शोभाहीन हुई, प्रकृति के नव शृंगार को। पिछले बरस की नीरसता हटा, आस के फूल पल्लवित करने को। वन उपवन को पुनर्जीवन देने, है एक और बसंत आने को। अंतर्मन में कहीं सुप्त पड़ी, मानवता झकझोरने को। एहसासों को अंकुरित कर, रिश्तों को नई तरंग देने को। काश, इस बार बसंत आए…

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मेरे पापा

मेरे पापा कई बार जब मतलबी बनना चाहा, मेरे पापा की परछाईं ने मुझे बनने नहीं दिया ।। कई बार जब खुद को दोराहे पर खड़ा पाया, मेरे पापा की सीखों ने सही राह ही चुनवाया।। हर परिस्थिति में ढलना, हर संघर्ष से जूझना इस लायक पापा ने ही बनाया ।। ईमानदारी और सच्चाई के…

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Random lines

Random lines.. Some memories always linger Some incidents often trigger Few instances buzz loud Very few silently sound Often past carry forward in action As if present has to accept the motion Carrying the concept we think , Concurrence may happen in future So our action becomes it’s reaction We always think we are right…

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शिक्षक

  शिक्षक जननी, प्रथम, सर्व श्रेष्ठ शिक्षक होती है अपनी, लिए गोद में पीना खाना है सिखलाती; नन्हें नन्हें पैरों से चलना है वो सिखलाती। अब बारी आती है उन शिक्षकों की, जो प्यारे प्यारे नौनिहाल को, सहनशक्ति बिन विचलित हुए क ख ग ए बी सी का पाठ पढ़ाते हैं, ख़ुद बच्चा बन बच्चों…

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Before Christmas

Before Christmas One day before Christmas comes Twenty-four hours before enjoining the Christmas carol My fingers have sung themselves with poetry I filled the sheets of my life with the lyrics of my songs Then I’m going to look for you I invite to accompany me here Feel the presence of the little Lord Jesus…

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हिंदी अपने राजभाषा के गौरव से बहुत दूर

हिंदी अपने राजभाषा के गौरव से बहुत दूर वैचारिक संप्रेषण के लिए भाषा को आवश्यकता होती है। धरती पर जब से मनुष्य का अस्तित्व है तभी से वह भाषा का प्रयोग कर रहा है। ध्वनि एवं संकेत दोनों रूपों में वैचारिक आदान-प्रदान होता रहा है। भारत भाषा और बोलियों की दृष्टि से समृद्ध देश है।…

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यू आर माय वैलेंटाइन

यू आर माय वैलेंटाइन मैं और तुम दो अलग अलग चेहरे दिल शरीर जान आत्मा व्यक्तित्व परिवार दोस्त वातावरण फिर भी हम ऐसे एक दूसरे मे यूं समाहित हुए मेरा सब कुछ हुआ तेरा तेरा सब कुछ हुआ मेरा तेरा मान सम्मान स्वभिमान सुख दुःख सफलता धन सम्पत्ति परिवार जिम्मेदारी हुई मेरी और मेरी हुई…

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विद्या भंडारी की कविताएं

विद्या भंडारी की कविताएं 1.अनबोला लड़की जब तब्दील होती है स्त्री में जाने कहाँ खो जाता है समय । निगल लिए जाते हैं जुबान पर आए शब्द । गुम हो जाती हैं परिंदो सी खिलती आवाजें ।। उड़ते पंख बदल जाते है फड़फड़ाते पंखों में । आंखो में अनचाहे ख्वाब लगते है तैरने । ऐसे…

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है दुर्गा आनेवाली

है दुर्गा आनेवाली है दुर्गा आनेवाली काश फूलों से सज गई धरती सुगंध महकाए शेफाली है दुर्गा आनेवाली। न है मंडप की शोभा न है रोशनी की लड़ी न है घूमने फिरने की बारी कब थमेगी यह महामारी ? किसान का आत्महनन है जारी उसपर हल का बोझ हुआ भारी ऊपर से कर्ज की लाचारी…

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